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Budget 2023: टैक्स स्लैब में 5 साल से नहीं मिली राहत, क्या इस बार वित्त मंत्री देंगी ये बड़ी सौगात?

  • Written by: प्रभाष रावत
  • Updated Jan 30, 2023, 08:27 PM IST

Budget 2023 Tax Slabs: टैक्स भुगतान की प्रक्रिया को दो रिजीम में बांटा गया है, एक पुराना टैक्स सिस्टम है और एक नया सरलीकृत टैक्स सिस्टम है। यहां पर टेबल की मदद से पुराने और नए टैक्स सिस्टम के अंतर को समझा जा सकता है और जान सकते हैं कौन सा सिस्टम आपके लिए ज्यादा उपयुक्त है।

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इनकम टैक्स स्लैब

Photo : iStock

बढ़ती महंगाई के दौर और मंदी के बीच मोदी सरकार का 2024 के आम चुनाव से पहले अंतिम पूर्ण बजट जारी होने वाला है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद बजट सत्र की शुरुआत के साथ वित्त वर्ष 2023-24 के लिए आम बजट को पेश करेंगी। बीते कई सालों से सैलरी पर गुजारा करने वाले मध्यम वर्ग को टैक्स स्लैब में राहत नहीं मिली है और इस साल चुनाव से पहले ऐसी संभावना जताई जा रही है कि सरकार टैक्स स्लैब में लोगों के लिए कुछ छूट दे सकती है।

बीते साल टैक्स भुगतान की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए वित्त मंत्रालय ने बजट 2020 के दौरान अपनी नई आयकर व्यवस्था पेश की थी। साल 2020 का सिस्टम, जिसे 'सरलीकृत कर व्यवस्था' के रूप में जाना जाता है, उसमें आयकर गणना के दौरान कुछ कटौतियों और छूटों को छोड़ने के विकल्प के साथ कम टैक्स रेट की पेशकश की थी। यहां दोनों पुराने और नए टैक्स सिस्टम की स्लैब पर नजर डाल सकते हैं और जान सकते हैं कि कौन सी व्यवस्था आपके लिए ज्यादा उपयुक्त हो सकती है।

1. पुराना टैक्स सिस्टम:

अगर पुरानी कर व्यवस्था को देखा जाए तो नई कर व्यवस्था की तुलना में टैक्स रेट ज्यादा है। लेकिन पुरानी व्यवस्था कई तरह की कटौती या टैक्स छूट देती है जैसे हाउस रेंट अलाउंस (HRA), लीव ट्रैवल अलाउंस (LTA) टैक्स छूट, सेक्शन 80C, 80 D कटौती आदि।

टैक्स देने वाले व्यक्तियों के लिए कटौती की सबसे बड़ी धारा 80सी है, जिसकी मदद से एक बार में कर योग्य आय को 1.5 लाख रुपये तक कम किया जा सकता है।

2. 2020 तक का टैक्स सिस्टम:

नई आयकर व्यवस्था में कई बेहतर बिंदु हैं। जैसे यह कुल आय पर कर के बोझ को कम करने के लिए कम आयकर दरों की पेशकश करता है। यह वेतनभोगी करदाता की ओर से किए निवेश/व्यय के प्रमाण को बनाए रखने की जरूरत को भी खत्म करता है। इसके अलावा, टैक्स स्लैब से आयकर की भी गणना की जाती है। नया सिस्टम 15 लाख रेंज तक उप-रुपये में कम दरों की पेशकश करता है।

इनकम लेवल (स्लैब)पुराना टैक्स रेट रिजीमनया टैक्स रेट रिजीम
2,50,000 रुपये तक0%0%
2,50,001 रुपये से 5,00,000 रुपये तक5%5%
5,00,001 से 7,50,000 रुपये तक20%10%
7,50,001 रुपये से 10,00,00020%15%
10,00,001 रुपये से 12,50,00030%20%
12,50,00130%25%
15,00,00030%30%
Tax Slabs New vs Old: पुराना सिस्टम बनाम 2020 तक का टैक्स सिस्टम

दोनों सिस्टम में एक बड़ा अंतर संशोधित स्लैब दरों का है। व्यक्तियों की ओर से भुगतान किया जाने वाला आयकर भारत में एक स्लैब प्रणाली पर आधारित है, जिसे व्यक्तियों की औसत आय के आधार पर बनाया गया है। इसलिए, 15 लाख रुपये तक आय वर्ग के लिए, नई कर व्यवस्था में कम आयकर दरों का प्रस्ताव किया है, लेकिन केवल तभी जब व्यक्ति आयकर अधिनियम के अलग-अलग प्रावधानों के अनुसार उपलब्ध छूट और कटौती छोड़ने को तैयार हो।

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प्रभाष रावत
प्रभाष रावत author

रक्षा और अंतर्राष्ट्रीय कूटनीतिक विषयों में विशेष रुचि रखने वाले प्रभाष रावत कुछ-ना-कुछ नया सीखते रहने में विश्वास करते हैं। बीते 5 साल से ज्यादा समय ... और देखें

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