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₹90000 करोड़ में जर्मनी के साथ सबसे बड़ा रक्षा सौदा, Make In India को बूस्ट

राजनाथ सिंह जर्मनी के साथ 90,000 करोड़ रुपये की ऐसी डील की नींव रख आए हैं, जिससे चीन और पाकिस्तान का पसीना छूटना तय है। राजनाथ सिंह ने खुल अपने एक्स हेंडल पर इस डील की जानकारी दी है।

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भारत जर्मनी कर रहे बड़ी डिफेंस डील

India-Germany Submarine Deal: देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जर्मनी में एक सबमरीन सौदे की नींव रखकर आए हैं। यह डील भारत की समुद्री ताकत को नया आयाम देने वाली होगी। जर्मनी के साथ करीब ₹90,000 करोड़ की सबमरीन डील अगले 90 दिनों में फाइनल हो सकती है। भारत और जर्मनी के बीच यह सबसे बड़ा रक्षा सौदा है। इस डील के बाद हिंद महासागर में भारत की पकड़ मजबूत होगी। इसके साथ ही डिफेंस में आत्मनिर्भरता और Make In India को बूस्ट मिलने के साथ ही और चीन-पाकिस्तान पर रणनीतिक बढ़त मिलेगी।

क्या है पूरा मामला

जर्मनी के रक्षा मंत्री Boris Pistorius ने संकेत दिया है कि भारत और जर्मनी के बीच यह ऐतिहासिक समझौता जल्द साइन हो सकता है। इस डील के तहत 6 आधुनिक पनडुब्बियों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट में जर्मनी की कंपनी थाइसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स (TKMS) और भारत की सरकारी शिपबिल्डिंग कंपनी Mazagon Dock Shipbuilders मिलकर काम करेंगी।

टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का फायदा

यह सिर्फ खरीद नहीं, बल्कि हाई-एंड टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की डील है। जर्मनी पहली बार किसी गैर-यूरोपीय देश को अपनी सबमरीन निर्माण तकनीक देने जा रहा है। रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने जर्मनी दौरे के दौरान TKMS यार्ड का निरीक्षण किया और Type-212 क्लास सबमरीन की क्षमताओं का जायजा लिया।

‘मेक इन इंडिया’ को बूस्ट

इन सबमरीन का निर्माण भारत में होने से घरेलू रक्षा उद्योग को मजबूती मिलेगी। इससे रोजगार, स्किल डेवलपमेंट और सप्लाई चेन इकोसिस्टम को भी बड़ा फायदा होगा। हिंद महासागर में चीन की बढ़ती मौजूदगी और पाकिस्तान की नौसैनिक गतिविधियों के बीच यह डील भारत को बड़ा रणनीतिक बढ़त देगी। नई पनडुब्बियां स्टेल्थ, लंबी दूरी और एडवांस हथियारों से लैस होंगी, जिससे समुद्री निगरानी और स्ट्राइक क्षमता कई गुना बढ़ेगी।

रक्षा सहयोग में नई दिशा

भारत और जर्मनी के बीच Defence Industrial Cooperation Roadmap पर भी सहमति बनी है। इससे दोनों देशों के बीच को-डेवलपमेंट, ट्रेनिंग और टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप को नई गति मिलेगी। सरकार अगले तीन महीनों में इस डील को फाइनल करने की तैयारी में है। अगर यह समझौता तय समय पर साइन हो जाता है, तो यह भारत के रक्षा इतिहास की सबसे बड़ी डील बन सकती है और इंडो-पैसिफिक में पावर बैलेंस बदल सकता है।

Make In India Defense deal

हिंद महासागर में बदलेगा पावर डायनेमिक्स

21 फीसदी भागा Mazagon Dock का शेयर

डिफेंस सेक्टर की सरकारी कंपनी Mazagon Dock Shipbuilders Ltd. के शेयरों में जोरदार तेजी देखने को मिली है और बीते एक महीने में यह करीब 21 फीसदी उछलकर ₹2,680.70 के स्तर पर पहुंच गया है। 23 अप्रैल दोपहर 12:05 बजे तक स्टॉक ₹2,703.90 के ओपन के बाद ₹2,709 का हाई और ₹2,670.90 का लो छू चुका है। कंपनी का मार्केट कैप करीब ₹1.08 लाख करोड़ है, जबकि P/E रेशियो 44.96 पर बना हुआ है। 52 हफ्तों में यह शेयर ₹3,775 के हाई और ₹2,057.40 के लो के बीच रहा है, जबकि डिविडेंड यील्ड 0.60 फीसदी है, जो निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है।

डिस्क्लेमर: TIMES NOW नवभारत किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ या कमोडिटी में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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