सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के बीच हुए समझौते को मंजूरी दे दी है। यह समझौता को-लोकेशन और डार्क-फाइबर मामलों से जुड़ा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बाद वर्षों से चले आ रहे इन कानूनी विवादों का पूरी तरह से निपटारा हो गया है और अदालत ने इससे जुड़े सभी मामलों को खत्म कर दिया है।
क्या है पूरा मामला और कितना दिया जुर्माना?
न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक SEBI के सेटलमेंट (सहमति) नियम के तहत, NSE ने मामलों को बंद करने के लिए ₹1,491.21 करोड़ की भारी-भरकम राशि का भुगतान किया है। यह मामला कई सालों से देश के सबसे बड़े शेयर बाजार NSE की साख पर सवाल उठा रहा था।
- को-लोकेशन मामला: इसमें आरोप था कि कुछ चुनिंदा ब्रोकर्स को NSE के सर्वर के पास अपनी मशीनें लगाने की अनुमति दी गई, जिससे उन्हें सामान्य निवेशकों की तुलना में तेजी से डेटा मिला और फायदा हुआ।
- डार्क-फाइबर मामला: इसमें कुछ ब्रोकर्स को बिना जरूरी अनुमतियों के एक बहुत तेज़ इंटरनेट लाइन (डार्क-फाइबर) इस्तेमाल करने का फायदा मिलने का आरोप था।
2019 में SEBI ने NSE को करीब 625 करोड़ रुपये की रकम 12% ब्याज के साथ चुकाने का आदेश दिया था। हालांकि, बाद में सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) ने SEBI के इस आदेश को रद्द कर दिया। इससे पहले डार्क-फाइबर मामलों में SAT के फैसलों के खिलाफ SEBI की सुप्रीम कोर्ट में दायर अपीलों का भी समझौते के जरिए निपटारा हुआ था। इसके बाद SEBI ने SAT के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। जुलाई में मार्केट रेगुलेटर ने दोनों मामलों को एक साथ मिलाकर NSE के करीब 1,491 करोड़ रुपये के सेटलमेंट प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी SEBI और NSE के बीच हुए इस सेटलमेंट को अपनी मंजूरी दे दी है।
विवाद खत्म होने से क्या बदलेगा?
NSE द्वारा पूरी सेटलमेंट राशि जमा करने के बाद SEBI ने इस समझौते को हरी झंडी दे दी। इसके तुरंत बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी लंबित मामलों को खारिज कर दिया। लंबे समय से चल रहे इन मुकदमों के खत्म होने से NSE को राहत मिली है। अब शेयर बाजार का यह प्रमुख एक्सचेंज बिना किसी कानूनी अड़चन के आगे के कामकाज और रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित कर सकेगा।
