Loan Against FD : फिक्स्ड डिपॉजिट में जमा पैसा आमतौर पर मैच्योरिटी तक छूने के लिए नहीं होता, लेकिन आपात स्थिति किसी का इंतजार नहीं करती। अचानक आया मेडिकल बिल, घर की मरम्मत या कोई बड़ा खर्च कई बार ऐसी स्थिति पैदा कर देता है कि समझ नहीं आता कि जमा FD को समय से पहले तोड़ दिया जाए या उस पर लोन ले लिया जाए। इसका कोई एक सीधा जवाब नहीं है। यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि आपको पैसों की जरुरत कितने समय के लिए है और क्या आपके पास उसे वापस चुकाने की कोई ठोस योजना है।
FD समय से पहले तोड़ने का नुकसान
समय से पहले FD से पैसा निकालने का मतलब यह नहीं होता कि आपका अब तक का सारा ब्याज डूब जाएगा। हालांकि, बैंक आपकी जमा राशि पर मिलने वाले ब्याज की दर को फिर से तय करते हैं। नियम के अनुसार, बैंक आपको शुरुआती तय ब्याज दर देने के बजाय उस ब्याज दर का भुगतान करते हैं, जो आपके द्वारा वास्तव में पैसा रखे गए समय (अवधि) के लिए लागू होती है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशानिर्देशों के तहत बैंकों के पास समय से पहले निकासी के लिए एक बोर्ड-अनुमोदित नीति होती है। इसके तहत बैंक ब्याज दर घटाने के साथ-साथ आमतौर पर 0.5% से 1% तक का पेनल्टी चार्ज (दंड) भी लगाते हैं। इस वजह से, अगर आपने किसी ऊंची ब्याज दर पर FD बुक की थी, तो समय से पहले निकालने पर आपको उम्मीद से काफी कम रिटर्न मिलता है। इसके अलावा, एक बार FD बंद हो जाने के बाद उस पर आगे मिलने वाला ब्याज भी हमेशा के लिए बंद हो जाता है।
FD पर लोन: बिना डिपॉजिट बंद किए पाएं फंड
अगर आप FD बंद नहीं करना चाहते, तो उस पर लोन लेना एक अच्छा विकल्प हो सकता है। इसमें बैंक आपकी FD को सिक्योरिटी (बंधक) के रूप में रखता है और उसे बंद किए बिना आपको लोन दे देता है। बैंक आमतौर पर आपकी FD की कुल रकम का 80 से 90 प्रतिशत तक हिस्सा लोन या ओवरड्राफ्ट के रूप में देते हैं। इस विकल्प की सबसे बड़ी खासियत यह है कि आपकी FD बैकग्राउंड में चलती रहती है और उस पर तय दर से ब्याज जुड़ता रहता है। बैंक आमतौर पर आपकी FD की ब्याज दर से 1 से 2 प्रतिशत अधिक दर पर लोन देते हैं। उदाहरण के लिए, अगर आपकी FD पर 7% ब्याज मिल रहा है, तो लोन पर आपसे 8% या 9% का ब्याज लिया जाएगा। कुछ बैंक इसे ओवरड्राफ्ट सुविधा के रूप में भी देते हैं, जहां आप अपनी जरुरत के मुताबिक ही पैसा निकालते हैं और आपको ब्याज भी सिर्फ निकाली गई रकम और समय पर ही देना होता है।
पैसे की जरूरत की अवधि से तय करें सही विकल्प
यह फैसला लेने का सबसे आसान और प्रभावी तरीका यह देखना है कि आपको पैसे कितने समय के लिए चाहिए। मान लीजिए कि आपको तीन महीने के लिए 2 लाख रुपये की तुरंत जरुरत है। ऐसे में FD तोड़ने पर आपको ब्याज का नुकसान और पेनल्टी दोनों सहने पड़ेंगे। इसकी तुलना में 3 महीने के लिए FD पर लोन लेना सस्ता और समझदारी भरा विकल्प साबित हो सकता है, क्योंकि आप इसे जल्दी चुकाकर अपनी FD को सुरक्षित रख सकते हैं। इसके विपरीत, अगर आपको वही 2 लाख रुपये दो साल जैसी लंबी अवधि के लिए चाहिए और आपके पास इसे चुकाने का कोई निश्चित साधन नहीं है, तो गणित बदल जाता है। लंबे समय तक लोन का ब्याज भरते रहना केवल FD को बचाए रखने के लिए सही सौदा नहीं है। ऐसी स्थिति में FD समय से पहले तोड़ लेना ही ज्यादा किफायती होता है।
अंतिम फैसला लेने से पहले यह हिसाब जरूर लगाएं
कोई भी कागजात साइन करने या फैसला लेने से पहले अपने बैंक से दो साफ आंकड़े जरूर मांगें:-
- अगर आप आज ही FD बंद करते हैं, तो पेनल्टी कटने के बाद आपको कुल कितना पैसा मिलेगा?
- अगर आप उस पर लोन लेते हैं, तो चुकाने तक कुल कितना ब्याज और प्रोसेसिंग चार्ज देना होगा?
इसके साथ ही, अगर आपकी FD मैच्योर होने के बहुत करीब है (जैसे कुछ ही हफ्ते या महीने बचे हैं), तो उसे तोड़ने से नुकसान बहुत कम होता है। ऐसे मामलों में नया लोन लेने के झंझट से बचना ही बेहतर है। सही फैसला 'बचत' या 'उधार' में से किसी एक को चुनने का नहीं, बल्कि अपनी जमा पूंजी का इस्तेमाल करने की कुल लागत को समझने का है। कम समय के लिए लोन लें और लंबी अवधि या अनिश्चितता होने पर FD बंद करने को प्राथमिकता दें।
