इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने का सीजन चल रहा है। इस बार 31 जुलाई तक नौकरीपेशा लोग अपना रिटर्न फाइल कर सकते हैं। उसके बाद अगर रिटर्न फाइल करेंगे तो पेनल्टी देना पड़ सकता है। आयकर रिटर्न हर साल भरने की एक आम प्रक्रिया है लेकिन सावधानी बहुत जरूरी है। एक छोटी गलती भी आपको परेशानी में डाल सकती है। आइए आपको उन 5 गलतियों के बारे में बताते हैं, जिसके करने पर आपको आयकर विभाग का नोटिस मिल सकता है।
1. आय की जानकारी छुपाना
सेक्शन 270A के तहत, अगर कोई टैक्सपेयर अपनी इनकम कम बताता है या छुपाता है, तो उसे कम बताई गई रकम पर देय टैक्स का 50 प्रतिशत जुर्माना देना होगा। अगर टैक्सपेयर तथ्यों को छिपाता है, गलत जानकारी भरता है या गलत डिडक्शन का दावा करता है, तो इसे गलत रिपोर्टिंग माना जाता है। ऐसे मामलों में जुर्माना बहुत ज़्यादा होता है - गलत रिपोर्ट की गई इनकम पर देय टैक्स का 200 प्रतिशत तक होता है। इसलिए रिटर्न भरने में आय की जानकारी बिल्कुल सही दें। गलत जानकारी देने पर आपको आयकर विभाग का नोटिस मिल सकता है और पेनल्टी देना पड़ सकता है।
2. अकाउंट्स की किताबें न रखना
जो बिजनेस और प्रोफेशनल अकाउंट्स की किताबें नहीं रखते, उन्हें सेक्शन 271A के तहत 25,000 रुपये का जुर्माना भरना पड़ सकता है। इसके अलावा, सेक्शन 271B के तहत, जिन टैक्सपेयर्स को अपने अकाउंट्स का ऑडिट करवाना जरूरी है लेकिन वे ऐसा नहीं करते, उन पर टर्नओवर या कुल कमाई का 0.5% जुर्माना लग सकता है, जो ज्यादा से ज़्यादा 1.5 लाख रुपये तक हो सकता है।
इसके अलावा TDS या TCS स्टेटमेंट फाइल करने में देरी होने पर, टैक्सपेयर्स को सेक्शन 234F के तहत हर दिन 200 रुपये का जुर्माना देना पड़ सकता है, जो TDS या TCS की रकम पर निर्भर करता है।
3. AIS और फॉर्म 26AS से मेल न खाना
आयकर रिटर्न फाइल करने से पहले अपनी सभी जानकारी का सही से मिलान कर लें। फॉर्म 16, AIS और फॉर्म 26AS के बीच अंतर होने से गलत जानकारी रिपोर्ट हो सकती है और टैक्स डिपार्टमेंट से नोटिस मिल सकता है, साथ ही प्रोसेसिंग में देरी भी हो सकती है।
4. देर से ITR फाइल करना
रिटर्न फाइल करने में सबसे आम गलतियों में से एक है तय तारीख के बाद ITR फाइल करना। इनकम टैक्स एक्ट की धारा 234F के तहत, जो टैक्सपेयर समय पर ITR फाइल नहीं कर पाते, उन्हें 5,000 रुपये तक की लेट फीस देनी पड़ती है। अगर टैक्सपेयर की कुल इनकम 5 लाख रुपये से ज़्यादा नहीं है, तो लेट फाइलिंग फीस घटकर 1,000 रुपये हो जाती है।
वहीं, सेक्शन 234I के तहत, अगर संबंधित असेसमेंट ईयर खत्म होने के नौ महीने बाद लेकिन 12 महीने से पहले रिवाइज्ड रिटर्न फाइल किया जाता है, तो जिन टैक्सपेयर्स की कुल इनकम 5 लाख रुपये से ज़्यादा नहीं है, उन पर 1,000 रुपये तक का चार्ज लग सकता है। दूसरे मामलों में लागू फीस 5,000 रुपये है।
5. गलत ITR फॉर्म चुनना
गलत ITR फॉर्म में रिटर्न फाइल करने से रिटर्न में गड़बड़ी हो सकती है और प्रोसेसिंग में देरी हो सकती है। टैक्स एक्सपर्ट का कहना है कि रिटर्न फाइल करने से पहले सही ITR फॉर्म को ध्यान से चुनें। इसके अलावा, फाइल करने से पहले पुरानी और नई टैक्स व्यवस्थाओं की ठीक से तुलना न करने पर कुल टैक्स की रकम बढ़ सकती है। इस गलती पर भी आयकर विभाग का नोटिस मिल सकता है।
