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'हर नागरिक का जीवन अनमोल', Sonam Wangchuk की बिगड़ती सेहत पर दिल्ली HC सख्त; रोजाना मेडिकल मॉनिटरिंग का आदेश

Sonam Wangchuk Hunger Strike: दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले करीब ढाई हफ्तों से अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार को उनके स्वास्थ्य की नियमित निगरानी करने का निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने कहा कि "हर नागरिक का जीवन अनमोल है" और जरूरत पड़ने पर तुरंत चिकित्सकीय हस्तक्षेप किया जाना चाहिए।

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दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र को दिए निर्देश, वांगचुक की रोज होगी स्वास्थ्य जांच।

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

Sonam Wangchuk Hunger Strike: पिछले करीब ढाई हफ्तों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे वांगचुक की सेहत तेजी से गिरती जा रही है। इसी बीच आज (गुरुवार) को दिल्ली हाईकोर्ट ने सोनम वांगचुक के अनशन को लेकर दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई की।

दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार को उनके स्वास्थ्य की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि "हर नागरिक का जीवन अनमोल है" और सरकार का दायित्व है कि उसकी सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाए जाएं। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। अदालत ने याचिका में लगाए गए इस आरोप का संज्ञान लिया कि लंबे समय से जारी भूख हड़ताल के कारण सोनम वांगचुक की सेहत बिगड़ रही है।

केंद्र ने कोर्ट को क्या बताया?

केंद्र और दिल्ली सरकार की ओर से वर्चुअली पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सोनम वांगचुक का रोजाना मेडिकल चेकअप किया जा रहा है और उनके स्वास्थ्य से जुड़े सभी पैरामीटर नियमित रूप से रिकॉर्ड किए जा रहे हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा, "क्या उनके स्वास्थ्य की निगरानी के लिए कोई व्यवस्था है?" इस पर मेहता ने जवाब दिया कि सरकारी डॉक्टर रोज उनकी जांच कर रहे हैं। अदालत ने कहा कि यदि सरकारी डॉक्टरों को जांच के दौरान किसी भी तरह के मेडिकल इंटरवेंशन (चिकित्सकीय हस्तक्षेप) की जरूरत महसूस होती है, तो तुरंत उचित कदम उठाए जाएं।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

अदालत ने कहा कि यदि सरकारी डॉक्टरों को जांच के दौरान किसी भी तरह के मेडिकल इंटरवेंशन (चिकित्सकीय हस्तक्षेप) की जरूरत महसूस होती है, तो तुरंत उचित कदम उठाए जाएं। कोर्ट ने टिप्पणी की, "हम चाहते हैं कि सरकारी डॉक्टर नियमित रूप से उनकी जांच करें। यदि डॉक्टरों की राय में किसी चिकित्सकीय हस्तक्षेप की आवश्यकता हो तो तत्काल कार्रवाई की जाए। हर जीवन अनमोल है।"

दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने आदेश में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया कि सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य की रोजाना सरकारी डॉक्टरों और विशेषज्ञों द्वारा निगरानी की जाएगी। डॉक्टरों की सलाह के अनुसार यदि किसी उपचार या मेडिकल हस्तक्षेप की जरूरत होगी तो उसे तुरंत उपलब्ध कराया जाएगा।

करीब 8 किलो घटा वांगचुक का वजन

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा जारी मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक, सोनम वांगचुक की तबीयत लगातार कमजोर होती जा रही है। रिपोर्ट में बताया गया है कि अनशन शुरू करने के बाद से 59 वर्षीय वांगचुक का करीब 8.9 किलो वजन घट चुका है। ताजा हेल्थ बुलेटिन के अनुसार, उनका वजन 57.15 किलोग्राम रह गया है, जो पिछले दिन के मुकाबले 400 ग्राम कम है। उनका ब्लड शुगर 80 mg/dL है, शरीर में पानी की कमी नहीं है और वह मानसिक रूप से पूरी तरह सतर्क हैं। वहीं, उनका ब्लड प्रेशर 105/76 mmHg दर्ज किया गया है।

Gaurav Srivastav
गौरव श्रीवास्तवauthor

टीवी न्यूज रिपोर्टिंग में 10 साल पत्रकारिता का अनुभव है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से लेकर कानूनी दांव पेंच से जुड़ी हर खबर आपको इस जगह मिलेगी। साथ ही चुनाव आयोग, विपक्ष के राजनीतिक घटनाक्रम से लेकर हर जनहित मुद्दे पर मेरी नजर रहती है।

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