Kharif Crops : देश में खरीफ फसलों की बुवाई इस साल पिछले साल की तुलना में कम हुई है। कमजोर मानसून और जून में कम बारिश के कारण किसानों को बुवाई में देरी का सामना करना पड़ा है। हालांकि, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) का कहना है कि अभी बुवाई का समय बाकी है और आगे चलकर इस कमी को पूरा किया जा सकता है। सरकार मौसम की स्थिति और खेती की प्रगति पर लगातार नजर बनाए हुए है। कृषि मंत्री ने बुधवार (15 जुलाई 2026) को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि खरीफ फसलों की बुवाई का काम अभी जारी है और किसान 15 अगस्त तक बुवाई कर सकते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होने पर बुवाई का रकबा बढ़ सकता है।
जुलाई में बारिश से जगी उम्मीद
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जून महीने में बारिश कम हुई थी, जिसकी वजह से खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हुई। लेकिन जुलाई के पहले सप्ताह में अच्छी बारिश हुई है और 20 जुलाई के बाद भी बेहतर बारिश की संभावना जताई जा रही है। इससे किसानों को राहत मिल सकती है और जिन क्षेत्रों में बुवाई पिछड़ी है, वहां तेजी आ सकती है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पूरे हालात पर नजर रख रही है। किसानों को समय पर बीज, खाद और अन्य जरूरी कृषि सामग्री उपलब्ध कराने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। कृषि मंत्री ने भरोसा जताया कि आने वाले समय में बुवाई में सुधार देखने को मिल सकता है।
खरीफ फसलों का कुल रकबा 16% घटा
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस खरीफ सीजन में 10 जुलाई तक कुल बुवाई क्षेत्र पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले करीब 16 प्रतिशत कम रहा है। इस साल अब तक खरीफ फसलों का कुल रकबा 531.25 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है। कमजोर मानसून को इसकी मुख्य वजह माना जा रहा है। खरीफ फसलों की बुवाई आमतौर पर जून में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन के साथ शुरू होती है। लेकिन इस बार बारिश में देरी के कारण कई इलाकों में किसान समय पर बुवाई नहीं कर पाए।
धान, दलहन और तिलहन की खेती प्रभावित
धान की बुवाई का क्षेत्रफल भी इस साल कम हुआ है। आंकड़ों के मुताबिक, धान का रकबा पिछले साल के 125.53 लाख हेक्टेयर से घटकर 114.69 लाख हेक्टेयर रह गया है। यानी इसमें करीब 8.63 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। दलहनों की खेती पर भी मौसम का असर पड़ा है। दलहन का रकबा 73.85 लाख हेक्टेयर से घटकर 56.63 लाख हेक्टेयर रह गया है। इसमें करीब 23.31 प्रतिशत की कमी आई है। अरहर, उड़द और मूंग जैसी प्रमुख दलहन फसलों की बुवाई भी पिछले साल की तुलना में पीछे चल रही है।
मोटे अनाज और सोयाबीन की बुवाई में गिरावट
मोटे अनाजों की खेती का क्षेत्रफल भी घटा है। इस साल मोटे अनाजों का रकबा 127.30 लाख हेक्टेयर से कम होकर 98.69 लाख हेक्टेयर रह गया है। इसमें करीब 22.47 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसी तरह तिलहन फसलों की बुवाई भी प्रभावित हुई है। तिलहन का कुल क्षेत्रफल 149.18 लाख हेक्टेयर से घटकर 117.83 लाख हेक्टेयर रह गया है। सोयाबीन की खेती का रकबा भी 16 प्रतिशत कम होकर 90.51 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है।
कपास की बुवाई सबसे ज्यादा पिछड़ी
नकदी फसलों में कपास की बुवाई सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। इस खरीफ सीजन में अब तक कपास का रकबा 93.95 लाख हेक्टेयर से घटकर 79.54 लाख हेक्टेयर रह गया है। इसमें करीब 15.33 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, गन्ने और जूट जैसी कुछ फसलों के रकबे में मामूली बढ़ोतरी हुई है। गन्ने का क्षेत्रफल पिछले साल के 56.72 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 57.58 लाख हेक्टेयर हो गया है, जबकि जूट और मेस्टा का रकबा भी 6.16 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 6.28 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है। सरकार को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में बेहतर बारिश और किसानों की सक्रियता से खरीफ फसलों की बुवाई में सुधार आएगा। कृषि मंत्रालय लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है ताकि किसानों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
