India Current Account : चालू वित्त वर्ष 2026-27 के पहले दो महीनों में भारत की अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल और मई 2026 के दौरान देश का चालू खाता (Current Account) 2.8 अरब डॉलर के सरप्लस में रहा। इसका मतलब है कि इस अवधि में देश को विदेशों से होने वाली कुल आय, विदेशों पर होने वाले खर्च से अधिक रही। पिछले साल इसी अवधि में भारत का चालू खाता 4.1 अरब डॉलर के घाटे में था। यानी एक साल के भीतर देश की बाहरी आय-व्यय की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है।
क्या होता है चालू खाता?
चालू खाता किसी देश के विदेशों के साथ होने वाले आर्थिक लेनदेन का महत्वपूर्ण पैमाना होता है। इसमें वस्तुओं का आयात-निर्यात, सेवाओं का कारोबार, विदेशों से मिलने वाली आय और प्रवासी भारतीयों द्वारा भेजा गया पैसा शामिल होता है। जब इन सभी स्रोतों से होने वाली कुल आय, विदेशों पर होने वाले कुल खर्च से अधिक होती है, तो उसे सरप्लस कहा जाता है। वहीं खर्च अधिक होने पर घाटा (डेफिसिट) दर्ज होता है।
सेवा निर्यात और विदेशों से आने वाले पैसे ने निभाई अहम भूमिका
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक आरबीआई के अनुसार, चालू खाते (India Current Account) में सुधार की सबसे बड़ी वजह सेवा क्षेत्र का मजबूत प्रदर्शन और विदेशों में रहने वाले भारतीयों द्वारा भेजे गए धन (रेमिटेंस) में बढ़ोतरी रही। अप्रैल-मई 2026 के दौरान सेवा क्षेत्र से भारत को 34.3 अरब डॉलर की शुद्ध प्राप्तियां हुईं, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 31.7 अरब डॉलर था। वहीं सेवा निर्यात बढ़कर 70.4 अरब डॉलर पहुंच गया, जिससे देश की विदेशी कमाई में अच्छी बढ़ोतरी हुई।
प्रवासी भारतीयों ने भेजे रिकॉर्ड पैसे
विदेशों में रहने वाले भारतीयों ने भी इस दौरान पहले की तुलना में कहीं अधिक पैसा भारत भेजा। अप्रैल-मई 2026 में शुद्ध अंतरण (नेट ट्रांसफर) बढ़कर 29.6 अरब डॉलर हो गया, जबकि पिछले साल यह 20 अरब डॉलर था। एक्सपर्ट्स का मानना है कि प्रवासी भारतीयों से आने वाला यह धन घरेलू अर्थव्यवस्था के साथ-साथ विदेशी मुद्रा भंडार को भी मजबूती देता है। इसके अलावा इस अवधि में शुद्ध आय निकासी मामूली रूप से घटकर 5.2 अरब डॉलर रह गई, जिससे चालू खाते की स्थिति और बेहतर हुई।
व्यापार घाटा फिर भी बढ़ा
हालांकि चालू खाते में सुधार के बावजूद वस्तुओं के आयात और निर्यात के बीच अंतर बढ़ा है। अप्रैल-मई 2026 के दौरान भारत का वस्तु व्यापार घाटा बढ़कर 55.9 अरब डॉलर हो गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 49.7 अरब डॉलर था। इस दौरान देश का कुल आयात 146.5 अरब डॉलर रहा, जबकि निर्यात 90.7 अरब डॉलर तक पहुंचा। आयात में तेजी से हुई बढ़ोतरी के कारण व्यापार घाटा बढ़ा, लेकिन सेवा निर्यात और रेमिटेंस ने इस असर को काफी हद तक संतुलित कर दिया।
भुगतान संतुलन में आया घाटा
आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-मई 2026 के दौरान देश का समग्र भुगतान संतुलन 11 अरब डॉलर के घाटे में रहा। पिछले साल इसी अवधि में यह 5 अरब डॉलर के सरप्लस में था। भुगतान संतुलन में चालू खाते के साथ-साथ पूंजी खाते के लेनदेन भी शामिल होते हैं। इसलिए चालू खाते में सुधार के बावजूद पूंजी प्रवाह में बदलाव का असर समग्र भुगतान संतुलन पर पड़ा।
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बढ़ा, लेकिन पोर्टफोलियो निवेश घटा
पूंजी खाते के आंकड़ों में मिली-जुली तस्वीर देखने को मिली। अच्छी बात यह रही कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) बढ़कर 6.5 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले साल इसी अवधि में 2.5 अरब डॉलर था। इसका मतलब है कि विदेशी कंपनियां भारत में लंबे समय के निवेश को लेकर पहले से ज्यादा भरोसा जता रही हैं।
दूसरी ओर, विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) में बड़ी निकासी दर्ज की गई। अप्रैल-मई 2026 के दौरान विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर और बॉन्ड बाजार से 12 अरब डॉलर की शुद्ध निकासी की, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह निकासी केवल 80 करोड़ डॉलर थी। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, ब्याज दरों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों की स्थिति को इसका प्रमुख कारण माना जा रहा है।
अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत
एक्सपर्ट्स का कहना है कि चालू खाते का सरप्लस भारत की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है। सेवा निर्यात, आईटी सेक्टर की मजबूत कमाई और प्रवासी भारतीयों से बढ़ते धनप्रेषण ने देश की बाहरी वित्तीय स्थिति को मजबूती दी है। हालांकि व्यापार घाटा और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश की निकासी अभी भी चिंता का विषय हैं। आने वाले महीनों में यदि निर्यात और विदेशी निवेश में सुधार जारी रहता है, तो भारत की बाहरी आर्थिक स्थिति और मजबूत हो सकती है।
