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कहीं आप तो नहीं भर रहे जरूरत से ज्यादा Insurance Premium? आपकी इस गलती से बढ़ रहा बीमा खर्च

बीमा का उद्देश्य जरूरत के समय आर्थिक सुरक्षा देना है। हालांकि, बहुत से लोग बिना जरूरत ज्यादा प्रीमियम भरते हैं, जिससे उनका बीमा खर्च बढ़ता ही जाता है। इसलिए समय-समय पर सभी पॉलिसियों की समीक्षा करना जरूरी हो जाता है।

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क्यों बढ़ रहा बीमा खर्च (Photo: iStock)

बीमा (Insurance) का उद्देश्य किसी बड़े आर्थिक नुकसान से सुरक्षा देना होता है। लेकिन कई बार लोग सुरक्षा के नाम पर इतनी ज्यादा पॉलिसियां खरीद लेते हैं कि हर साल भारी-भरकम प्रीमियम भरना पड़ता है। ऐसे में सवाल उठता है कि कहीं आपके पास जरूरत से ज्यादा बीमा तो नहीं है? इसका मतलब केवल ज्यादा कवरेज होना नहीं है, बल्कि ऐसी पॉलिसियों पर पैसा खर्च करना भी है, जिनका लाभ आपको वास्तव में नहीं मिल रहा।

Overinsured होने का क्या मतलब है?

सबसे पहले तो यही समझें कि ओवरइंश्योर्ड होने से क्या मतलब है। दरअसल, ओवरइंश्योर्ड होने का मतलब यह नहीं कि आपके पास बहुत ज्यादा सुरक्षा है। इसका मतलब यह भी हो सकता है कि आपने एक ही जोखिम को कवर करने वाली कई पॉलिसियां ले रखी हैं या ऐसे ऐड-ऑन और राइडर्स खरीद लिए हैं, जिनकी आपको जरूरत ही नहीं है। समय के साथ लोग बैंक, एजेंट, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म या नियोक्ता के जरिए अलग-अलग बीमा पॉलिसियां लेते जाते हैं और बाद में उनकी समीक्षा नहीं करते। यही वजह है कि अनावश्यक प्रीमियम का बोझ बढ़ता जाता है।

ऐसे कम होगा बीमा खर्च

सभी पॉलिसियों की लिस्ट बनाएं

अगर आपको लगता है कि आपका बीमा खर्च बढ़ गया है, तो सबसे पहले अपनी सभी पॉलिसियों की एक लिस्ट तैयार करें। इसमें हेल्थ इंश्योरेंस, लाइफ इंश्योरेंस, पर्सनल एक्सीडेंट कवर और बैंक के जरिए मिली बीमा योजनाएं शामिल करें। हर पॉलिसी के लिए यह देखें कि उसका सम इंश्योर्ड कितना है, सालाना प्रीमियम कितना है, कौन-सा जोखिम कवर हो रहा है और क्या किसी दूसरी पॉलिसी में भी वही सुविधा पहले से मौजूद है। कई बार दो या तीन पॉलिसियां लगभग एक जैसा कवर देती हैं।

एक से ज्यादा हेल्थ पॉलिसी

हेल्थ इंश्योरेंस में कई लोगों के पास कंपनी का ग्रुप हेल्थ कवर भी होता है और साथ ही एक या दो अलग-अलग व्यक्तिगत हेल्थ पॉलिसियां भी होती हैं। एक से ज्यादा हेल्थ पॉलिसी रखना गलत नहीं है, लेकिन यह समझना जरूरी है कि अस्पताल के खर्च से अधिक क्लेम नहीं किया जा सकता। यानी कई पॉलिसियां होने का मतलब यह नहीं कि आपको कई गुना भुगतान मिलेगा। इसलिए अतिरिक्त प्रीमियम भरने से पहले उसकी वास्तविक जरूरत का आकलन करें।

लाइफ इंश्योरेंस पर भी दें ध्यान

लाइफ इंश्योरेंस के मामले में यह देखना ज्यादा जरूरी है कि आपके परिवार की आर्थिक जरूरतों के हिसाब से कुल कवरेज पर्याप्त है या नहीं। कई लोगों के पास छोटी-छोटी पारंपरिक पॉलिसियां होती हैं, लेकिन कुल बीमा राशि परिवार की जरूरतों के लिए पर्याप्त नहीं होती। वहीं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो पुराने लोन खत्म होने और बच्चों के आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होने के बाद भी अनावश्यक पॉलिसियों का प्रीमियम भरते रहते हैं।

हर ऐड-ऑन खरीदना जरूरी नहीं

बीमा कंपनियां अक्सर क्रिटिकल इलनेस, एक्सीडेंटल डेथ, हॉस्पिटल कैश जैसे कई राइडर्स ऑफर करती हैं। ये सुविधाएं कुछ लोगों के लिए काम की साबित हो सकती हैं, लेकिन हर उपलब्ध ऐड-ऑन खरीद लेना समझदारी नहीं है। इससे प्रीमियम बढ़ जाता है, जबकि कई बार वास्तविक सुरक्षा में खास अंतर नहीं आता। इसलिए हर अतिरिक्त सुविधा लेने से पहले उसकी जरूरत का मूल्यांकन करें।

Shivani Kotnala
शिवानी कोटनालाauthor

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने बिजनेस और टेक से जुड़ी खबरों पर काम किया है। यूटीलिटी, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग से जुड़ी खबरों पर वह लगातार लिख रही हैं। शिवानी ने डिजिटल के साथ-साथ न्यूज एजेंसी में भी काम किया है।

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