बिजनेस

रिटायरमेंट के लिए पैसा बचाना काफी नहीं, पेंशन की भी करें प्लानिंग; ऐसे करें तैयारी

किसी भी व्यक्ति को .रिटायरमेंट और पेंशन प्लानिंग समय रहते कर लेने की सलाह दी जाती है ताकि रिटायरमेंट के बाद भी व्यक्ति अपनी जीवनशैली बनाए रख सके और उसे दूसरों पर निर्भर न रहना पड़े।

Image

ऐसे करें रिटायरमेंट प्लानिंग (Photo: iStock)

आज के समय में लोग अपने भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए रिटायरमेंट प्लानिंग पर पहले से ज्यादा ध्यान देने लगे हैं। वित्तीय संस्थानों द्वारा उपलब्ध करवाए जा रहे अलग-अलग निवेश विकल्पों ने रिटायरमेंट की तैयारी को पहले की तुलना में काफी आसान भी बना दिया है। हालांकि कई लोग Retirement Planning और Pension Planning को एक ही मान लेते हैं, जबकि दोनों में महत्वपूर्ण अंतर है।

रिटायरमेंट व्यक्ति के जीवन के उस चरण को कहा जाता है, जो नौकरी या रोजगार समाप्त होने के बाद शुरू होता है। वहीं, पेंशन वह नियमित आय या भुगतान है जो व्यक्ति को रिटायरमेंट के बाद प्राप्त होता है।

रिटायरमेंट और पेंशन प्लानिंग को समझें

रिटायरमेंट प्लानिंग एक बड़ी वित्तीय रणनीति है, जिसका उद्देश्य व्यक्ति की आमतौर पर 60 वर्ष की आयु के बाद, आर्थिक सुरक्षा और वित्तीय स्वतंत्रता सुनिश्चित करना होता है। अधिकांश लोग इसकी शुरुआत अपने 20वें या 30वें दशक में ही कर देते हैं। वहीं, पेंशन प्लानिंग भविष्य के लिए एक ऐसा फंड तैयार करने की प्रक्रिया है, जो रिटायरमेंट के बाद नियमित आय का स्रोत बन सके। रिटायरमेंट प्लानिंग और पेंशन प्लानिंग दोनों का उद्देश्य व्यक्ति को वित्तीय रूप से सक्षम बनाना है ताकि रिटायरमेंट के बाद भी वह अपनी जीवनशैली बनाए रख सके और उसे दूसरों पर निर्भर न रहना पड़े।

.

रिटायरमेंट की ऐसे करें तैयारी

रिटायरमेंट की योजना बनाते समय ऐसा निवेश चुनना जरूरी है, जो एक तरफ तत्काल जरूरतों के लिए पर्याप्त लिक्विडिटी दे और दूसरी तरफ लंबे समय में संपत्ति निर्माण में मदद करे, साथ ही बढ़ती महंगाई के प्रभाव को भी संतुलित कर सके।

रिटायर लोगों के लिए सिस्टेमैटिक विदड्रॉल प्लान (SWP) एक अच्छा विकल्प माना जाता है। यह म्यूचुअल फंड की ऐसी सुविधा है, जिसमें निवेशक नियमित अंतराल पर एक निश्चित राशि निकाल सकते हैं। इसके अलावा सेविंग अकाउंट और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) भी नियमित आय और रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करने में मदद कर सकते हैं।

निवेश पोर्टफोलियो में विविधता लाने के लिए शॉर्ट-टर्म डेट फंड पर भी विचार किया जा सकता है। ये कई मामलों में एफडी की तुलना में बेहतर रिटर्न देने की क्षमता रखते हैं। वहीं लंबी अवधि में संपत्ति बढ़ाने के लिए इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ELSS) जैसे ग्रोथ-ओरिएंटेड निवेश विकल्प बेहतर साबित हो सकते हैं।

बढ़ती उम्र के साथ स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें भी बढ़ती हैं, इसलिए रिटायरमेंट प्लानिंग में मेडिकल खर्चों के लिए अलग बजट रखना जरूरी है। इसके लिए एक अलग हेल्थ फंड बनाने के साथ-साथ पर्याप्त स्वास्थ्य बीमा लेना भी महत्वपूर्ण है।

डिस्क्लेमर: TimesNow Navbharat किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ या बॉन्ड्स में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।

Shivani Kotnala
शिवानी कोटनालाauthor

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने बिजनेस और टेक से जुड़ी खबरों पर काम किया है। यूटीलिटी, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग से जुड़ी खबरों पर वह लगातार लिख रही हैं। शिवानी ने डिजिटल के साथ-साथ न्यूज एजेंसी में भी काम किया है।

और पढ़ें
End of Article