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भारत में बनी कारों का शानदार रहा सफर, वर्तमान दौर तक हुए कई बड़े बदलाव

देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर का इतिहास काफी रोचक रहा है। जहां 1945 में महिंद्रा एंड महिंद्रा ने अपने संचालन की शुरुआत की वहीं, एक दौर ऐसा भी था जब बाजार में हिंदुस्तान एंबेसडर और प्रिमियर पदमिनी का दबदबा रहा।

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भारत में निर्मित कारों का बेहद रोचक रहा सफर (Photo : iStock)

भारत की सड़कों पर पहली कार 1897 में दौड़ी थी। समय के साथ देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर का इतिहास समृद्ध और रोमांच से भरा रहा है। इस इंडस्ट्री ने इन वर्षों में शानदार प्रगति का अनुभव किया है। बदलते समय के साथ गाड़ियों में हुए तेजी से बदलावों को हर दशक के साथ समझा जा सकता है।

1940-1950 का दौर

इस दौर में भारत में विदेशों से आयात गाड़ियों का इस्तेमाल होता था। इसके बाद हिंदुस्तान मोटर्स और प्रिमियर ने विदेशी मॉडलों पर आधारित कारों को बनाया। 1945 में महिंद्रा एंड महिंद्रा ने अपने संचालन की शुरुआत की और जीप CJ सीरीज का निर्माण किया। इसी वर्ष जे.आर.डी. टाटा ने टाटा इंजीनियरिंग और लोकोमोटिव कंपनी की स्थापना की।

1960 और 1980 का दौर

प्रिमियर ने 1964 में पदमिनी लॉन्च की। इसी समय टाटा और महिंद्रा जैसी कंपनियां मुख्य रूप से कमर्शियल वाहनों पर ध्यान दे रही थीं, क्योंकि इनकी बिक्री लगातार बढ़ रही थी। 1980 तक भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में हिंदुस्तान एंबेसडर और प्रिमियर पदमिनी का दबदबा रहा।

1980-90 का दौर

यह भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए बदलाव का दौर था। 1983 में मारुति उद्योग लिमिटेड की स्थापना हुई, जिसने आम भारतीयों को*तीन दशकों के बाद एंबेसडर या पदमिनी के अलावा एक नई विकल्प दिया।

1990-2000 का दौर

यह भारत के ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए असाधारण विकास का दौर रहा। लिबरलाइजेशन के समय टैरिफ कमीशन की पुरानी नीतियां** हटा दी गईं, जिससे भारत में विदेशी तकनीक और निवेश का प्रवेश हुआ। 1991 में टाटा ने अपनी पहली पैसेंजर कार, सिएरा लॉन्च की।इस समय कंपनियों का फोकस फीचर्स पर नहीं बल्कि ईंधन-कुशल और किफायती कारों को बनाने पर था।

2000-2010 का दौर

इस समय लगभग सभी बड़े विदेशी ब्रांड्स ने भारत में अपने प्लांट स्थापित कर लिए थे। साल 2000 में एमीशन नॉर्म्स लागू किए गए ताकि वाहनों के प्रदूषण को कम किया जा सके। इस दौर में बेसिक फीचर्स जैसे म्यूजिक प्लेयर और एसी स्टैंडर्ड के रूप में शामिल किए गए।

2010-2020 का दौर

2010 के दशक में सभी कैटेगरी में कारों की बिक्री लगातार बढ़ती रही। विदेशी ब्रांडस को लोकप्रियता मिलने लगी और Audi और BMW जैसी कंपनियों से ग्राहक बड़ी संख्या में जुड़ने लगे। कंपनियों ने अधिक फीचर्स के साथ फेसलिफ्ट मॉडल्स भी पेश किए। इस दौर में कुछ इलेक्ट्रिक कार भारत भी पहुंची।

वर्तमान दौर

वर्तमान दौर की बात करें तो जहां एक ओर भारत 2021 में उत्पादन के मामले में चौथा सबसे बड़ा देश बना तो वहीं, 2022 में वैल्यूएशन के लिहाज से भी चौथे स्थान पर पहुंच गया। इसी के साथ बिक्री के मामले में भारत 2023 में तीसरा सबसे बड़ा देश बन चुका है। अब बाजार में फीचर-रिच कारों का चलन बढ़ रहा है। नई कारों में एडवांस टेक्नोलॉजी देखी जा रही हैं।

Shivani Kotnala
शिवानी कोटनालाauthor

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने बिजनेस और टेक से जुड़ी खबरों पर काम किया है। यूटीलिटी, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग से जुड़ी खबरों पर वह लगातार लिख रही हैं। शिवानी ने डिजिटल के साथ-साथ न्यूज एजेंसी में भी काम किया है।

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