लाखों रुपये की हाइटेक डिवाइस
पुलिस की मानें तो इस गैंग के सभी सदस्य लेटेस्ट टेक और गैजेट्स से लैस होते हैं जिससे इनके लिए कार चोरी करना काफी आसान हो जाता है। इन डिवाइसों की कीमत 30,000 से लेकर लाखों रुपये तक है। आम तौर पर ये तकनीक अधिकृत वर्कशॉप द्वारा एक बैकअप के रूप में इस्तेमाल की जाती हैं। इनमें गलती से कार के अंदर चाबी छूट जाने, कार अलार्म को ठीक करने और किसी वजह से इंजन सीज होने पर उसे दोबारा शुरू करने का काम किया जाता है।
पुलिस से बचने के लिए ये करते थे
इलाके के एडीसीपी क्राइम सच्चिदानंद ने बताया कि पुलिस से बचने के लिए ये गैंग कार चोरी करने के बाद जीपीएस बंद करने के लिए जैमर का इस्तेमाल करती थी। ये कार में लगे जीपीएस की तलाश कर उसे बाहर फेंक देते थे और फिर इसे दूसरे ग्राहक को बेच देते थे। पुलिस की जानकारी के हिसाब से ये गैंग 2013 से कारें चोरी कर रही है और अब तक संभवतः 500 से ज्यादा कारें चोरी कर चुकी है। इस गैंग का सरगना नूर मोहम्मद उर्फ रिंकू है जिसका मुख्य साथी चांद मोहम्मद उर्फ चंडाल अभी फरार चल रहा है।
