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Car Safety Tips: एक्सीडेंट से बचना है तो रियर व्यू और साइड मिरर्स को एडजस्ट करने का सही तरीका जानें

कई लोग वर्षों से गाड़ी चलाते हैं लेकिन सच यह है कि उन्हें आज भी साइड मिरर को ना तो ढंग से एडजस्ट करने आया और ना ही इसका वे सही से इस्तेमाल करते हैं। इसी कारण आए दिन एक्सिडेंट होते रहते हैं।

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रियर व्यू और साइड मिरर्स को एडजस्ट करने का सही तरीका

कार चलाते समय ज्यादातर लोग सीट बेल्ट लगाने और स्पीड लिमिट का ध्यान रखते हैं, लेकिन एक छोटी-सी लापरवाही कई बार बड़े हादसे का कारण बन जाती है। यह लापरवाही है कार के रियर व्यू और साइड मिरर्स को सही तरीके से एडजस्ट न करना। सही तरीके से सेट किए गए मिरर्स न केवल ब्लाइंड स्पॉट को कम करते हैं, बल्कि लेन बदलने, ओवरटेक करने और रिवर्स पार्किंग के दौरान भी बेहतर विजिबिलिटी देते हैं। आइए जानते हैं कि रियर व्यू और साइड मिरर्स को सही तरीके से कैसे एडजस्ट करें और इससे सड़क सुरक्षा में क्या फायदा होता है।

क्यों जरूरी है मिरर्स को सही तरीके से सेट करना?

हर साल सड़क हादसों का एक बड़ा कारण ब्लाइंड स्पॉट होता है। ब्लाइंड स्पॉट वह हिस्सा होता है जिसे ड्राइवर सीधे या मिरर में नहीं देख पाता। यदि मिरर्स सही तरीके से एडजस्ट नहीं किए गए हैं, तो दूसरी गाड़ी, बाइक या पैदल यात्री आपकी नजर से छूट सकता है। ऐसे में लेन बदलते समय या मोड़ लेते वक्त दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।

सबसे पहले ड्राइविंग पोजिशन सही करें

मिरर्स एडजस्ट करने से पहले अपनी ड्राइविंग सीट को सही पोजिशन में सेट करें। सीट ऐसी होनी चाहिए कि आपके पैर आसानी से पैडल तक पहुंचें और दोनों हाथ स्टीयरिंग पर आरामदायक स्थिति में रहें। सीट सेट करने के बाद ही मिरर्स एडजस्ट करें, क्योंकि सीट बदलने के बाद मिरर्स की एंगलिंग भी बदल जाती है।

रियर व्यू मिरर ऐसे करें सेट

रियर व्यू मिरर को इस तरह एडजस्ट करें कि पीछे की विंडशील्ड का लगभग पूरा हिस्सा साफ दिखाई दे। मिरर में आपको पीछे की सड़क का अधिकतम दृश्य मिलना चाहिए। इसे ऊपर या नीचे झुकाकर केवल कार की पिछली सीट दिखने वाली स्थिति में न रखें।

साइड मिरर्स को कैसे करें एडजस्ट?

बाएं और दाएं दोनों साइड मिरर्स में आपकी कार का केवल एक छोटा-सा हिस्सा दिखाई देना चाहिए। यदि मिरर में कार का बड़ा हिस्सा दिख रहा है, तो इसका मतलब है कि मिरर अंदर की ओर ज्यादा मुड़ा हुआ है। मिरर को थोड़ा बाहर की तरफ एडजस्ट करें ताकि बगल वाली लेन का अधिक हिस्सा दिखाई दे और ब्लाइंड स्पॉट कम हो।

ब्लाइंड स्पॉट को पूरी तरह नजरअंदाज न करें

भले ही मिरर्स सही तरीके से सेट हों, लेकिन लेन बदलने से पहले एक बार कंधे के ऊपर से पीछे की ओर देखकर ब्लाइंड स्पॉट जरूर चेक करें। इसे "शोल्डर चेक" कहा जाता है और यह सुरक्षित ड्राइविंग की सबसे महत्वपूर्ण आदतों में से एक है।

रात और बारिश में रखें विशेष सावधानी

रात के समय पीछे से आने वाली गाड़ियों की तेज हेडलाइट्स से बचने के लिए यदि आपकी कार में डे-नाइट रियर व्यू मिरर है, तो उसे नाइट मोड में कर दें। वहीं बारिश के दौरान मिरर्स को साफ रखें ताकि पानी की बूंदों के कारण विजिबिलिटी प्रभावित न हो।

इन गलतियों से हमेशा बचें

कई ड्राइवर मिरर्स को इस तरह सेट कर लेते हैं कि उनमें केवल अपनी कार का साइड हिस्सा ही दिखाई देता है। कुछ लोग ड्राइविंग के दौरान मिरर्स एडजस्ट करते हैं, जो बेहद खतरनाक हो सकता है। इसके अलावा मिरर्स पर धूल या गंदगी जमा होने से भी पीछे का दृश्य साफ नहीं दिखता, इसलिए नियमित रूप से इन्हें साफ करना जरूरी है।

आधुनिक कारों में मिलते हैं एडवांस सेफ्टी फीचर्स

आजकल कई नई कारों में ब्लाइंड स्पॉट मॉनिटर, 360-डिग्री कैमरा, रियर क्रॉस ट्रैफिक अलर्ट और ऑटो-डिमिंग रियर व्यू मिरर जैसे फीचर्स दिए जा रहे हैं। हालांकि ये तकनीकें सुरक्षा बढ़ाती हैं, लेकिन इन पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय मिरर्स का सही इस्तेमाल करना और सतर्क ड्राइविंग करना सबसे जरूरी है।

Pradeep Pandey
प्रदीप पाण्डेय author

प्रदीप पाण्डेय टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट पर कंटेंट तैयार करते हैं। डिजिटल मीडिया में 10 वर्षों के अनुभव के साथ प्रदीप तकनीक की दुनिय... और देखें

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