कृषि

काला नमक चावल क्या है? यूपी के इस जिले से सिंगापुर-थाईलैंड जैसे देशों तक हो रहा निर्यात

Kala Namak Rice: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सिद्धार्थनगर में 1000 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का शुभारंभ किया। भगवान बुद्ध की आध्यात्मिक धरती सिद्धार्थनगर अब काला नमक चावल के कारण नई पहचान बना रही है। ओडीओपी योजना से जुड़कर यह पारंपरिक फसल किसानों की आय बढ़ा रही है और जिले की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रही है।

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ओडीओपी से बनी सिद्धार्थनगर की वैश्विक पहचान, काला नमक चावल का उत्पादन 18 हजार हेक्टेयर तक पहुंचा (तस्वीर-istock/x)

Kala Namak Rice : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को सिद्धार्थनगर जिले में 1000 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सिद्धार्थनगर अब केवल अपनी धार्मिक पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जिला कृषि और आर्थिक विकास का भी मजबूत केंद्र बनता जा रहा है। भगवान बुद्ध की तपोभूमि रही यह धरती आज अपने खास उत्पाद काला नमक चावल के कारण देश और दुनिया में पहचान बना रही है।

धार्मिक विरासत के साथ कृषि की नई पहचान

सिद्धार्थनगर का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व पूरी दुनिया में जाना जाता है। यह वही क्षेत्र है, जहां भगवान बुद्ध के जीवन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण घटनाएं हुईं। अब इसी पवित्र भूमि पर उगाया जाने वाला काला नमक चावल जिले की नई पहचान बन रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार की ‘एक जनपद–एक उत्पाद’ (ODOP) योजना ने इस पारंपरिक फसल को आधुनिक बाजार से जोड़कर किसानों के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है।

2600 साल पुरानी खेती की परंपरा

काला नमक चावल का इतिहास करीब 2600 साल पुराना बताया जाता है। इसका उत्पादन 600 ईसा पूर्व से सिद्धार्थनगर के पिपरहवा क्षेत्र में होता आ रहा है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद कपिलवस्तु लौटते समय यहां के लोगों को काले भूसे वाले धान के दाने आशीर्वाद के रूप में दिए थे। कहा जाता है कि इसकी खुशबू बुद्ध की स्मृति से जुड़ी हुई है। तभी से यह चावल धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक माना जाता है।

खुशबू और सेहत का अनोखा मेल

काला नमक चावल अपनी खास सुगंध के लिए जाना जाता है। पकने के बाद भी इसकी खुशबू लंबे समय तक बनी रहती है, जो इसे सामान्य चावल से अलग बनाती है। इसमें आयरन, जिंक और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। यही वजह है कि इसे स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है। धार्मिक महत्व के कारण इसे भगवान बुद्ध के प्रसाद के रूप में भी चढ़ाया जाता है। अब स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग भी इसे बड़े चाव से अपना रहे हैं।

ओडीओपी योजना से बदली किसानों की किस्मत

उत्तर प्रदेश सरकार की ओडीओपी योजना ने काला नमक चावल की खेती को नई दिशा दी है। इस योजना के तहत किसानों को बेहतर बीज, आधुनिक खेती की तकनीक, प्रशिक्षण, पैकेजिंग और ब्रांडिंग की सुविधा दी गई। पहले जहां इसका उत्पादन केवल 2642 हेक्टेयर क्षेत्र में होता था, वहीं अब यह बढ़कर करीब 18,000 हेक्टेयर तक पहुंच गया है। इससे उत्पादन बढ़ा है और किसानों की आय में भी अच्छा इजाफा हुआ है।

रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिला बल

काला नमक चावल की बढ़ती मांग से जिले में रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं। खेती के साथ-साथ प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग से जुड़े लोगों को भी काम मिला है। इससे सिद्धार्थनगर की स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है और किसान आत्मनिर्भर बन रहे हैं।

विदेशों तक पहुंचा सिद्धार्थनगर का चावल

अब काला नमक चावल केवल स्थानीय या राष्ट्रीय बाजार तक सीमित नहीं है। ओडीओपी योजना और जिला प्रशासन के प्रयासों से इसका निर्यात सिंगापुर और थाईलैंड जैसे देशों में हो रहा है। इसकी खास खुशबू, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और स्वास्थ्य लाभों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। इससे किसानों को बेहतर दाम मिल रहे हैं और जिले की पहचान वैश्विक स्तर पर बन रही है।

राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित जिला प्रशासन

काला नमक चावल के संरक्षण, विकास और प्रचार-प्रसार के लिए सिद्धार्थनगर जिला प्रशासन को कई राष्ट्रीय पुरस्कार मिले हैं। प्रशासन को प्रधानमंत्री पुरस्कार 2021, स्कॉच अवार्ड 2022 (गोल्ड) और राष्ट्रीय वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट अवार्ड 2024 से सम्मानित किया गया है। ये पुरस्कार इस बात का प्रमाण हैं कि पारंपरिक उत्पादों को सही समर्थन मिले तो वे विकास का मजबूत आधार बन सकते हैं।

विरासत से विकास की सफल कहानी

कुल मिलाकर, काला नमक चावल आज सिद्धार्थनगर के लिए विरासत से विकास की एक बेहतरीन मिसाल बन चुका है। यह न केवल किसानों की आमदनी बढ़ा रहा है, बल्कि रोजगार सृजन और जिले की वैश्विक पहचान का भी मजबूत आधार बन रहा है। ओडीओपी योजना के जरिए सिद्धार्थनगर ने यह साबित कर दिया है कि परंपरा और आधुनिकता साथ मिलकर विकास की नई कहानी लिख सकती हैं।

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