आजकल के समय में एक से अधिक बैंक अकाउंट (Multiple Bank Accounts) होना बेहद आम बात हो चुका है। लोग अक्सर नौकरी बदलने पर नया सैलरी अकाउंट खुलवा लेते हैं, या फिर क्रेडिट कार्ड और लोन के ऑफर्स के लालच में अलग-अलग बैंकों में खाते खोल लेते हैं। शुरुआत में तो कई अकाउंट्स रखना काफी सुविधाजनक लगता है, लेकिन अगर इन खातों को सही तरीके से मैनेज न किया जाए, तो अनजाने में की गई यह लापरवाही आपकी जेब पर भारी पड़ सकती है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की गाइडलाइंस और वित्तीय विशेषज्ञों के मुताबिक, बिना इस्तेमाल के पड़े कई बैंक खाते आपकी बचत को धीरे-धीरे खत्म कर सकते हैं।
एक से ज्यादा बैंक अकाउंट रखने के नुकसान
एकाधिक बैंक खाते रखने का सबसे बड़ा नुकसान न्यूनतम बैलेंस (Minimum Balance Maintenance) न रख पाने का होता है। आज के समय में लगभग हर प्राइवेट और सरकारी बैंक अपने बचत खातों में एक तय मंथली या क्वार्टरली एवरेज बैलेंस बनाए रखना अनिवार्य करता है। अगर आप अपने किसी पुराने या निष्क्रिय पड़े खाते में मिनिमम बैलेंस मेंटेन नहीं करते, तो बैंक आप पर भारी पेनाल्टी लगाना शुरू कर देते हैं। नतीजा यह होता है कि बिना किसी लेन-देन के भी आपका जमा पैसा पेनाल्टी और चार्जेस के रूप में कटता चला जाता है।
ये भी होते हैं नुकसान
इसके अलावा, हर बैंक अकाउंट के साथ कुछ छिपे हुए शुल्क (Hidden Charges) जुड़े होते हैं। जैसे कि डेबिट कार्ड (ATM) की एनुअल मेंटेनेंस फीस, SMS अलर्ट चार्जेस और अन्य सर्विस फीस। भले ही आप उस खाते का इस्तेमाल न कर रहे हों, फिर भी बैंक हर साल ये चार्जेस आपके अकाउंट से काटते रहते हैं। एक और गंभीर पहलू यह है कि अगर किसी बैंक खाते में लगातार 12 महीनों तक कोई लेन-देन नहीं होता, तो बैंक उसे 'इनएक्टिव' (Inactive) घोषित कर देता है। वहीं 24 महीने तक कोई ट्रांजैक्शन न होने पर वह खाता 'डॉर्मेंट' (Dormant) यानी निष्क्रिय श्रेणी में चला जाता है, जिसे दोबारा चालू कराने के लिए आपको लंबी कागजी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
वित्तीय सुरक्षा और टैक्स के लिहाज से भी कई खाते रखना झंझट भरा साबित हो सकता है। इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करते समय आपको अपने सभी एक्टिव बैंक खातों की जानकारी और उनसे मिलने वाले ब्याज का ब्योरा देना अनिवार्य होता है। इसके अलावा, आजकल साइबर क्राइम और ऑनलाइन फ्रॉड के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं; ऐसे में लावारिस या अन-मॉनिटर्ड पड़े बैंक खातों पर साइबर ठगों की नज़र आसानी से पड़ जाती है, जिसका इस्तेमाल अवैध लेन-देन के लिए किया जा सकता है।
