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महीने की किस तारीख को SIP करना सबसे फायदेमंद? 30 साल के आंकड़े से समझें

क्या महीने की सही तारीख पर म्यूचुअल फंड SIP करने से ज्यादा रिटर्न मिलता है? जानिए सेंसेक्स के 30 साल के ऐतिहासिक आंकड़ों के आधार पर SIP की बेस्ट डेट से जुड़े मिथक और हकीकत।

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महीने की किस तारीख को SIP करना सबसे फायदेमंद? 30 साल के आंकड़े से समझें

म्यूचुअल फंड में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए निवेश करने वाले निवेशकों के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि महीने की किस तारीख को SIP की किस्त कटना सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है। कई लोग यह मानते हैं कि महीने की शुरुआत (1 या 5 तारीख), मध्य (15 तारीख) या महीने के अंत (25 या 28 तारीख) को बाजार में खास उतार-चढ़ाव होता है, जिसका फायदा उठाकर ज्यादा रिटर्न कमाया जा सकता है। लेकिन क्या वाकई SIP की तारीख बदलने से आपके पोर्टफोलियो के फाइनल रिटर्न पर कोई बड़ा असर पड़ता है? इस बात का सच जानने के लिए किए गए 30 साल के सेंसेक्स डाटा के गहन अध्ययन ने एक चौंकाने वाला और आंखें खोलने वाला नतीजा सामने रखा है।

30 साल के आंकड़े क्या कहते हैं?

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) के सेंसेक्स के 30 वर्षों के आंकड़ों के विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि लंबी अवधि के निवेश में SIP की तारीख का रिटर्न पर लगभग नगण्य (Zero to Negligible) असर पड़ता है। डाटा से पता चलता है कि चाहे आपने महीने की 1 तारीख को SIP चुनी हो, 10 तारीख को या 25 तारीख को, 10 से 30 सालों की अवधि के दौरान मिलने वाले अंतिम सालाना रिटर्न (CAGR) में महज 0.05% से 0.1% का ही मामूली अंतर आता है। यह अंतर इतना छोटा होता है कि इससे आपके लॉन्ग टर्म वेल्थ क्रिएशन पर कोई वास्तविक प्रभाव नहीं पड़ता।

क्या है रुपी कॉस्ट एवरैजिंग?

शेयर बाजार का मूल सिद्धांत रुपी कॉस्ट एवरैजिंग (Rupee Cost Averaging) पर काम करता है। जब आप SIP के जरिए हर महीने एक निश्चित राशि बाजार में लगाते हैं, तो बाजार में गिरावट के समय आपको ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं और तेजी के समय कम यूनिट्स। 30 साल जैसी लंबी अवधि में बाजार के दैनिक उतार-चढ़ाव अपने आप संतुलित हो जाते हैं। इसलिए, यह सोचने में समय बर्बाद करना कि 'मार्केट की सबसे निचली तारीख कौन सी होगी', वित्तीय समझदारी नहीं है।

SIP के लिए सबसे अच्छी तारीख 'मार्केट टाइमिंग' के हिसाब से नहीं, बल्कि आपकी व्यक्तिगत वित्तीय सुविधा के हिसाब से तय होनी चाहिए। विशेषज्ञों की सलाह है कि वेतनभोगियों (Salaried Employees) को अपनी SIP की तारीख सैलरी आने के तुरंत बाद (जैसे 3 से 7 तारीख के बीच) रखनी चाहिए। इससे 'पहले खर्च, फिर बचत' के बजाय 'पहले निवेश, फिर खर्च' का अनुशासित नियम लागू होता है और खाते में बैलेंस न होने की वजह से SIP बाउंस होने का जोखिम भी खत्म हो जाता है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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