Kisan Ki Khabren: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि अगर प्रदेश में अंतःफसली खेती को मिशन के रूप में लागू किया जाए, तो इससे किसानों की आय में कई गुना बढ़ोतरी हो सकती है। उन्होंने खासतौर पर गन्ने के साथ तिलहन और दलहन फसलों की अंतःफसली खेती पर जोर दिया। मुख्यमंत्री के अनुसार, यह तरीका किसानों को कम लागत में अधिक लाभ देने के साथ-साथ खेती को सुरक्षित और टिकाऊ बनाएगा।
कृषि क्षेत्र में नई छलांग का रास्ता
मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश को कृषि के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जाने का सबसे प्रभावी तरीका है गन्ने के साथ सरसों, मसूर, उड़द और मूंग जैसी फसलों की अंतःफसली खेती को बड़े पैमाने पर अपनाना। उन्होंने कहा कि यह मॉडल किसानों को अतिरिक्त उत्पादन और पूरे साल स्थिर आमदनी देने में मदद करता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।
सीमित भूमि, अधिक उत्पादन की जरूरत
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदेश में कृषि योग्य भूमि का विस्तार अब संभव नहीं है। ऐसे में एक हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रति इकाई भूमि से अधिक उत्पादन लेना ही एकमात्र रास्ता है। उन्होंने कहा कि गन्ना आधारित अंतःफसली खेती प्रदेश के कृषि भविष्य का एक नया और प्रभावी मॉडल बन सकती है।
गन्ना आधारित अंतःफसली खेती का मॉडल
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गन्ने के साथ अंतःफसली खेती किसानों को तीन बड़े फायदे देती है। अधिक उत्पादन, अधिक कमाई और जोखिम से सुरक्षा। इस मॉडल में गन्ने की पैदावार पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता, बल्कि उसके साथ अतिरिक्त फसल उगाकर किसान ज्यादा लाभ कमा सकते हैं।
मिशन मोड में लागू होगी योजना
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इस योजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक मिशन मोड में लागू किया जाए। वर्तमान में प्रदेश में करीब 29.50 लाख हेक्टेयर भूमि पर गन्ने की खेती हो रही है। इसमें से 14.64 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में नई बुवाई और 14.86 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में पेड़ी फसल शामिल है। इतने बड़े क्षेत्र में अगर तिलहन और दलहन की अंतःफसल जोड़ी जाए, तो उत्पादन में बड़ी बढ़ोतरी संभव है।
तिलहन और दलहन में आत्मनिर्भरता की दिशा
मुख्यमंत्री ने कहा कि अंतःफसली खेती से न सिर्फ किसानों को फायदा होगा, बल्कि प्रदेश और देश को तिलहन और दलहन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में भी मदद मिलेगी। इससे आयात पर निर्भरता कम होगी और खाद्य सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।
वैज्ञानिक और व्यावहारिक चयन पर जोर
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि अंतःफसल का चयन कृषि विज्ञान केंद्रों और कृषि विश्वविद्यालयों के माध्यम से किया जाए। फसलों का चुनाव वैज्ञानिक और व्यावहारिक आधार पर होना चाहिए, ताकि किसानों को वास्तविक लाभ मिल सके और खेती में कोई जोखिम न हो।
रबी और जायद सीजन की प्राथमिक फसलें
मुख्यमंत्री ने रबी सीजन में सरसों और मसूर को प्राथमिकता देने की बात कही। वहीं, जायद सीजन में उड़द और मूंग जैसी दलहनी फसलों को अपनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि यह फसलें गन्ने के साथ आसानी से उगाई जा सकती हैं और कम समय में अच्छा उत्पादन देती हैं।
किसानों के लिए मजबूत भविष्य
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अंत में कहा कि गन्ने की पैदावार को बिना नुकसान पहुंचाए अतिरिक्त फसल, अतिरिक्त लाभ और अतिरिक्त सुरक्षा देना ही इस मॉडल की सबसे बड़ी ताकत है। यह योजना किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ प्रदेश की कृषि व्यवस्था को अधिक मजबूत और आत्मनिर्भर बनाएगी।
