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गन्ने से चीनी कैसे बनती है? किस प्रोसेस से बनाई जाती है मिठास घोलने वाली Sugar

  • Agency by: Agency
  • Updated Aug 25, 2026, 03:06 PM IST

How Sugar Made from Sugarcane: चाय से लेकर खीर और त्योहारों पर मिलने वाली मिठाइयों की मिठास चमकदार चीनी (Sugar) के बिना अधूरी होती है, लेकिन आपने कभी सोचा की चीनी को गन्ने से कैसे बनाया जाता है। चीनी बनाने की प्रक्रिया का नाम क्या है। आइए जानते हैं -

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How Sugar Made from Sugarcane (Photo - AI)

How Sugar Made from Sugarcane: सुबह की कड़क चाय हो या त्योहारों में बनने वाली टेस्टी-टेस्टी मिठाइयां, बिना चीनी के इनकी मिठास अधूरी लगती है। हम सभी जानते हैं कि चाय, खीर और मिठाई में इस्तेमाल होने वाली चीनी गन्ने से बनती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि खेतों में लहराने वाले हरे-भरे गन्ने से सफेद, चमकदार चीनी की क्रिस्टल कैसे तैयार होते है? गन्ने से चीनी बनाने का यह सफर बहुत ही दिलचस्प और आधुनिक टेक्नोलॉजी से भरा हुआ है। जी हां, गन्ने के रस को निकालकर, उसे साफ करने और फिर क्रिस्टल का रूप देने तक की पूरी प्रक्रिया कई चरणों में पूरी की जाती है, जिसके बाद आपके घरों तक खाने में मिठास घोलने वाली चीनी पहुंचती है। आइए, आज जानते हैं की चीनी मिलों में गन्ने से चीनी किस प्रक्रिया का इस्तेमाल करते हुए बनाई जाती है।

गन्ने से चीनी बनाने का प्रोसेस

गन्ने से चीनी बनाने की इस पूरी प्रक्रिया को 'शुगर मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस' या चीनी निर्माण प्रक्रिया कहा जाता है। इसमें भौतिक और रासायनिक (फिजिक्स और केमिस्ट्री) दोनों तरह की प्रक्रियाओं का उपयोग किया जाता है। इन दोनों का इस्तेमाल करते हुए गन्ने के रस से सुक्रोज को अलग किया जाता है और उसे क्रिस्टलाइज किया जाता है। खेतों में लहरा रहे हरे-भरे गन्ने से चीनी बनने की प्रक्रिया स्टेप-बाय-स्टेप इस प्रकार है -

How Sugar Made from Sugarcane

गन्ने से चीनी कैसे बनती है (Photo -AI)

1. गन्ने की पेराई और रस निकालना

सबसे पहले खेतों से लाए गए गन्ने को कटिंग मशीनों में डालकर छोटे-छोटे टुकड़े किए जाते हैं। इसके बाद इन्हें भारी-भरकम रोलर्स के बीच से गुजारा जाता है। इस गन्ने का रस निकलता है और बचा हुआ सूखा छिलका जिसे 'बगास' कहते हैं, अलग हो जाता है। बता दें कि रस निकालने के प्रक्रिया के दौरान निकलने बगास का उपयोग चीनी मिलों में बॉयलर चलाने के लिए ईंधन के रूप में किया जाता है।

2. रस का शुद्धिकरण

आपने जब भी कभी गन्ने रस पिया होगा तो उसका रंग हल्का हरा या भूरा देखा होगा। बता दें कि रस निकालने की इस प्रक्रिया में गन्ने का कच्चा रस भी हल्के हरे या भूरे रंग का होता है लेकिन यह गंदा होता है। इसे साफ करने के लिए इसमें चूना और सल्फर डाइऑक्साइड मिलाया जाता है। इस प्रक्रिया को 'सल्फिटेशन' कहते हैं। इससे गन्ने के रस में मौजूद गंदगी नीचे बैठ जाती है और साफ सुक्रोज युक्त रस ऊपर आ जाता है।

3. वाष्पीकरण और रस का गाढ़ा होना

साफ रस को बड़े-बड़े इवैपोरेटर (Evaporators) में उबाला जाता है। इस दौरान रस में मौजूद अधिकांश पानी उड़ जाता है और वह एक गाढ़े सिरप या चाशनी का रूप ले लेता है।

4. क्रिस्टलाइजेशन

खुब उबाले जाने के बाद बना गन्ने के रस के गाढ़े सिरप को वैक्यूम पैन में पकाया जाता है। यहां इसमें पहले से बने चीनी के छोटे-छोटे दाने मिलाए जाते हैं। धीरे-धीरे सीरप में मौजूद चीनी इन दानों के चारों ओर जमने लगती है और चीनी के क्रिस्टल बनने शुरू हो जाते हैं। इस गाढ़े घोल को 'मैसेकाइट' (Massecuite) कहते हैं।

5. सेंट्रीफुगेशन

क्रिस्टल बनने के बाद इस पूरे घोल को सेंट्रीफ्यूज मशीन में बहुत ही तेज स्पीड में घुमाया जाता है। उदाहरण के तौर पर बात करें तो यह ठीक उसी प्रकार काम करती है जैसे वॉशिंग मशीन में कपड़े सुखाए जाते हैं। तेज घुमाव के कारण चीनी के दाने अलग हो जाते हैं और बचा हुआ गाढ़ा तरल बाहर निकल जाता है।

6. सुखाना, ग्रेडिंग और पैकेजिंग

सेंट्रीफुगेशन की इस प्रक्रिया के दौरान अलग हुए चीनी के दानों को गर्म हवा से सुखाया जाता है। फिर उन्हें चालनियों से छानकर बड़े, मध्यम और छोटे दानों के हिसाब से इनकी ग्रेडिंग की जाती है। अंत में इन्हें चमकदार सफेद चीनी की बोरियों में पैक कर बाजार में भेजा जाता है।

एक क्विंटल गन्ने से कितनी चीनी बनती है?

एक क्विंटल गन्ने से कितनी चीनी बनती है यह गन्ने की किस्म, उसकी गुणवत्ता और मौसम पर निर्भर करती है। भारत में औसतन गन्ने से चीनी की रिकवरी दर 10% से 12% के बीच होती है। आसान भाषा में इसका अर्थ यह है कि 1 क्विंटल यानी 100 किलोग्राम गन्ने से लगभग 10 से 12 किलोग्राम चीनी तैयार होती है। इसके अलावा, बाकी बचे हिस्से से बगास, शीरा और प्रेसमुड जैसे सह-उत्पाद (By-products) मिलते हैं।

बगासईंधन/कागज बनाने के लिए
शीराएथेनॉल और शराब बनाने के लिए
प्रेसमुडजैविक खाद के लिए

चीनी मिल में एक दिन में कितना उत्पादन होता है?

एक चीनी मिल की उत्पादन क्षमता उसकी पेराई क्षमता (TCD - Tons Crushed per Day) पर निर्भर करती है। मध्यम आकार की चीनी मिलें प्रतिदिन 5,000 से 10,000 टन गन्ने की पेराई करती हैं, जिससे प्रतिदिन लगभग 5 लाख से 10 लाख किलोग्राम चीनी का उत्पादन होता है। जबकि बड़ी और आधुनिक चीनी मिलें रोजाना 15,000 से 20,000 टन से अधिक गन्ने की पेराई करने की क्षमता रखती हैं, जहां एक ही दिन में 15 लाख से 20 लाख किलो चीनी तक बनाई जाती है।

भारत में चीनी उत्पादन मे कौन से राज्य अव्वल

भारत में चीनी उत्पादन के सबसे बड़े राज्यों के बारे में बात करें तो पहले स्थान पर महाराष्ट्र और दूसरे नंबर पर यूपी का नाम है। साल 2025-26 में महाराष्ट्र में कुल 99 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ, जबकि उत्तर प्रदेश 92.5 लाख टन चीनी की उत्पादन किया गया। तीसरा स्थान कर्नाटक और चौथे स्थान पर तमिलनाडु है।

देश की सबसे बड़ी चीनी मिल कहां है?

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के खतौली में स्थित त्रिवेणी चीनी मिल एशिया की सबसे बड़ी चीनी मिल है। यह उत्पादन और भंडारण क्षमता के हिसाब से सबसे बड़ी चीनी मिल है, जो 1993 में चालू हुई थी। इसके अलावा लखीमपुर खीरी जिले में स्थित 'बजाज हिंदुस्तान शुगर लिमिटेड' और महाराष्ट्र की सहकारी चीनी मिलें भी देश की सबसे बड़ी चीनी मिलों को लिस्ट में शामिल है।

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