बजट में नारियल प्रमोशन स्कीम का ऐलान, सबसे अधिक कहां होता उत्पादन, टॉप 10 राज्यों में नंबर 1 कौन
- Authored by: रामानुज सिंह
- Updated Feb 1, 2026, 03:51 PM IST
India Coconut Production: भारत विश्व के प्रमुख नारियल उत्पादक देशों में है। नारियल का उपयोग खाद्य तेल, पूजा-पाठ और पारंपरिक व्यंजनों में होता है तथा इससे लाखों किसानों की आजीविका जुड़ी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नारियल उत्पादन बढ़ाने और उत्पादकता सुधारने के लिए Coconut Promotion Scheme की घोषणा की। राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के अनुसार 2023-24 में भारत का कुल नारियल उत्पादन 1.45 करोड़ मीट्रिक टन रहा, जिसमें दक्षिण भारत के राज्यों की प्रमुख भूमिका रही। आइए जानते हैं सबसे अधिक नारियल का उत्पादन कहां होता है। टॉप 10 राज्यों के बारे में जानिए।
भारत में नारियल उत्पादन के टॉप 10 राज्य (तस्वीर-istock)
India Coconut Production: भारत दुनिया के प्रमुख नारियल उत्पादक देशों में शामिल है। नारियल न केवल खाद्य तेल, पूजा-पाठ और पारंपरिक व्यंजनों में उपयोग होता है, बल्कि इससे जुड़े लाखों किसानों की आजीविका भी इससे चलती है। बजट 2026 पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नारियल उत्पादन बढ़ाने और उत्पादकता सुधारने के लिए Coconut Promotion Scheme की घोषणा की। इसका उद्देश्य भारत में नारियल की खेती को और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना है। फाइनेंस मिनिस्टर ने बताया कि इस स्कीम में प्रमुख नारियल उगाने वाले राज्यों पर ध्यान दिया जाएगा। इसमें अप्रभावी पेड़ों की जगह उच्च उत्पादकता वाले नए पौधे लगाना और अन्य तकनीकी हस्तक्षेप शामिल होंगे। उनका कहना था कि प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए हम नई तकनीक और उच्च गुणवत्ता वाले पौधों का उपयोग करेंगे ताकि किसानों की आमदनी बढ़े और उत्पादन में सुधार हो। आइए जानते हैं देश में सबसे अधिक नारियल का उत्पादन कहां होता है। राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) के अनुसार वर्ष 2023-24 में भारत का कुल नारियल उत्पादन 1 करोड़ 45 लाख 42 हजार मीट्रिक टन (14,542.47 हजार मीट्रिक टन) रहा है। इस उत्पादन में कुछ राज्यों की भूमिका बेहद अहम रही है, जिनमें दक्षिण भारत के राज्य सबसे आगे हैं।
कर्नाटक सबसे बड़ा उत्पादक राज्य
वर्ष 2023-24 के आंकड़ों के अनुसार कर्नाटक देश का सबसे बड़ा नारियल उत्पादक राज्य बनकर उभरा है। राज्य में कुल 4,232.61 हजार मीट्रिक टन नारियल का उत्पादन हुआ, जो देश के कुल उत्पादन का 28.78 प्रतिशत है। कर्नाटक में अनुकूल जलवायु, बेहतर सिंचाई सुविधाएं और उन्नत कृषि तकनीकों ने नारियल उत्पादन को मजबूती दी है। यहां के किसान नारियल के साथ-साथ इससे बनने वाले उत्पादों पर भी ध्यान दे रहे हैं।
भारत में नारियल उत्पादन के टॉप 10 राज्य
| क्रम संख्या | राज्य | उत्पादन (हजार मीट्रिक टन) | हिस्सा (%) |
|---|---|---|---|
| 1 | कर्नाटक | 4,232.61 | 28.78 |
| 2 | तमिलनाडु | 4,192.00 | 28.50 |
| 3 | केरल | 3,800.27 | 25.84 |
| 4 | आंध्र प्रदेश | 1,174.67 | 7.99 |
| 5 | पश्चिम बंगाल | 289.82 | 1.97 |
| 6 | ओडिशा | 274.86 | 1.87 |
| 7 | महाराष्ट्र | 180.70 | 1.23 |
| 8 | गुजरात | 169.33 | 1.15 |
| 9 | असम | 122.67 | 0.83 |
| 10 | अंडमान और निकोबार द्वीप समूह | 105.54 | 0.72 |
| — | कुल उत्पादन | 14,542.47 | 100.00 |
तमिलनाडु और केरल की मजबूत स्थिति
कर्नाटक के ठीक बाद तमिलनाडु दूसरे स्थान पर रहा, जहां 4,192.00 हजार मीट्रिक टन उत्पादन दर्ज किया गया। इसका राष्ट्रीय हिस्सेदारी में योगदान 28.50 प्रतिशत रहा। वहीं, केरल जो लंबे समय से नारियल उत्पादन के लिए जाना जाता है, तीसरे स्थान पर रहा। केरल में 3,800.27 हजार मीट्रिक टन नारियल का उत्पादन हुआ, जो कुल उत्पादन का 25.84 प्रतिशत है। इन तीनों राज्यों ने मिलकर देश के लगभग 83 प्रतिशत नारियल उत्पादन में योगदान दिया है।
अन्य राज्यों का योगदान
दक्षिण भारत के अलावा आंध्र प्रदेश ने भी नारियल उत्पादन में अहम भूमिका निभाई है। राज्य में 1,174.67 हजार मीट्रिक टन उत्पादन हुआ, जो कुल उत्पादन का लगभग 8 प्रतिशत है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल (1.97 प्रतिशत), ओडिशा (1.87 प्रतिशत), महाराष्ट्र (1.23 प्रतिशत) और गुजरात (1.15 प्रतिशत) जैसे राज्यों ने भी योगदान दिया है। पूर्वोत्तर राज्य असम में 122.67 हजार मीट्रिक टन उत्पादन दर्ज किया गया, जबकि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 105.54 हजार मीट्रिक टन नारियल का उत्पादन हुआ।
आर्थिक और सामाजिक महत्व
नारियल उत्पादन न केवल कृषि क्षेत्र को मजबूती देता है, बल्कि इससे जुड़े उद्योगों जैसे तेल, कोयर, नारियल पानी और प्रसंस्कृत उत्पादों को भी बढ़ावा मिलता है। लाखों छोटे और सीमांत किसान नारियल की खेती पर निर्भर हैं। सरकार द्वारा बागवानी मिशन और तकनीकी सहायता से भविष्य में उत्पादन और बढ़ने की संभावना है।
कुल मिलाकर, वर्ष 2023-24 में भारत का नारियल उत्पादन मजबूत रहा है। दक्षिण भारत के राज्य इस क्षेत्र में रीढ़ की हड्डी बने हुए हैं, जबकि अन्य राज्य भी धीरे-धीरे अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। आने वाले वर्षों में बेहतर तकनीक और सरकारी समर्थन से नारियल उत्पादन और किसानों की आय दोनों में वृद्धि की उम्मीद है।