अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक अहम कूटनीतिक निर्णय लेते हुए सर्जियो गोर (Sergio Gor) को भारत में अमेरिका का अगला राजदूत और दक्षिण तथा मध्य एशियाई मामलों के विशेष दूत (Special Envoy) के रूप में नामित किया। गोर फिलहाल व्हाइट हाउस के "Presidential Personnel Office" के निदेशक हैं और अमेरिकी सीनेट की पुष्टि तक इसी पद पर बने रहेंगे। ट्रम्प ने गोर की नियुक्ति को "रणनीतिक और निर्णायक" बताते हुए कहा कि वह उनके सबसे भरोसेमंद और प्रभावशाली सहयोगियों में से एक हैं।
कौन हैं सर्जियो गोर?
सर्जियो गोर का जन्म ताशकंद, उज्बेकिस्तान में हुआ था और वे 1999 में अपने परिवार के साथ अमेरिका आ गए थे। उन्होंने वाशिंगटन डीसी की प्रतिष्ठित जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी से अपनी शिक्षा पूरी की। युवावस्था से ही वे रिपब्लिकन विचारधारा से प्रभावित रहे और यहीं से उनकी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत हुई।
- गोर ने अमेरिकी कांग्रेस में रिपब्लिकन सांसद स्टीव किंग और मिशेल बैकमान के लिए काम किया।
- बाद में उन्होंने सीनेटर रैंड पॉल के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ के रूप में जिम्मेदारी संभाली। यह भूमिका उन्हें राजनीतिक रणनीति और नीति-निर्माण के करीब ले आई।
- साल 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों के दौरान सर्जियो गोर ट्रम्प कैंपेन से जुड़े और उन्होंने संगठनात्मक कार्यों से लेकर संचार रणनीति तक में अहम भूमिका निभाई।
- ट्रम्प के दोबारा चुने जाने के बाद, नवंबर 2024 में उन्हें "Presidential Personnel Office" का निदेशक नियुक्त किया गया, जहां उन्होंने 'अमेरिका फर्स्ट' सोच वाले लोगों की भर्ती में प्रमुख भूमिका निभाई।
ट्रम्प को क्यों है गोर पर इतना भरोसा?
ट्रम्प ने गोर को "मेरा महान दोस्त", "लॉयल" और "मेरे एजेंडे को जमीन पर उतारने वाला सच्चा सहयोगी" बताया है। ट्रम्प के कई प्रमुख अभियानों, पुस्तकों के प्रकाशन और यहां तक कि सुपर PAC (Political Action Committee) के संचालन में गोर की भूमिका रही है। गोर ट्रम्प के उन चुनिंदा सलाहकारों में से हैं, जो उनके निजी और राजनीतिक दोनों एजेंडों को आगे बढ़ाने में विश्वास रखते हैं। यही वजह है कि अब उन्हें एक प्रमुख राजनयिक भूमिका में भेजा जा रहा है।
विवादों से भी रहा है नाता
सर्जियो गोर को लेकर कुछ विवाद भी समय-समय पर सामने आए हैं। एलन मस्क ने एक बार गोर को “स्नेक” यानी "सांप" कहा था। वजह यह थी कि गोर ने नासा के लिए मस्क के पसंदीदा उम्मीदवार के नामांकन को रोकने की कोशिश की थी, जो कि ट्रम्प प्रशासन के भीतर मतभेदों की ओर इशारा करता है। इसके अलावा, गोर की नियुक्ति से पहले उनके बैकग्राउंड चेक और पुष्टिकरण दस्तावेजों को लेकर देरी की भी खबरें आईं, जिससे उनकी पारदर्शिता और क्षमता पर कुछ संदेह खड़े हुए।
राजनयिक परिप्रेक्ष्य और भारत-अमेरिका संबंधों में भूमिका
गोर की नियुक्ति ऐसे समय में की गई है जब अमेरिका और भारत के बीच कुछ मुद्दों को लेकर तल्खी देखी जा रही है। इनमें आयात शुल्क, तेल व्यापार और टेक्नोलॉजी साझेदारी जैसे मुद्दे शामिल हैं। ऐसे में ट्रम्प का गोर जैसे विश्वासपात्र व्यक्ति को भारत भेजना यह संकेत देता है कि अमेरिका भारत के साथ अपने संबंधों को एक नई दिशा देना चाहता है- लेकिन अपने शर्तों पर। गोर की भूमिका केवल भारत तक सीमित नहीं होगी। दक्षिण और मध्य एशिया के लिए विशेष दूत के रूप में वे पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल जैसे देशों के साथ संबंधों में भी योगदान देंगे। यह क्षेत्र रणनीतिक दृष्टि से अमेरिका के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
