Times Now Navbharat
live-tv
Premium

क्या है H1B Visa जिसपर ट्रंप की निगाहें टेढ़ी? जानिए भारतीयों के लिए है कितना अहम क्या हो सकता है असर

H1B Visa को लेकर भारतीयों खासतौर पर आईटी प्रोफेशनल्स में जबरदस्त क्रेज इसलिए है क्योंकि यह न सिर्फ अमेरिका में काम करने का मौका देता है, बल्कि एक बेहतर जीवन, करियर ग्रोथ और स्थायित्व की उम्मीद भी जगाता है। एच -1बी वीजा को लेकर कुछ चिंताएं सिर उठा रही हैं, जानिए क्या है यह सब...

Image
क्या है H1B Visa जो भारतीयों के लिए बेहद अहम (फोटो: टाइम्स नाउ नवभारत)
Authored by: Ravi Vaish
Updated Aug 22, 2025, 14:34 IST

अमेरिका में भारतीय प्रोफेशनल्स काफी तादात में काम कर रहे हैं और वहां की तरक्की में भारतीयों का योगदान किसी से छिपा नहीं है। वहीं अब सोशल मीडिया सर्कल में कई तरह के सवाल तैर रहे हैं कि अमेरिका और भारत के बीच जारी टैरिफ वॉर का असर क्या H-1B वीजा पर काम कर रहे भारतीयों पर भी पड़ सकता है? भारतीय आईटी इंजीनियरों (Indian IT Professionals) और भी कई प्रोफेशनल स्किल्स वाले इंडियन्स के लिए अमेरिका में करियर बनाने का खासा क्रेज है।

भारी तादाद में भारतीय अमेरिका में जॉब कर रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक कहा जा रहा है कि H-1B वीजा को लेकर ट्रंप प्रशासन कुछ कदम उठा सकता है। हालांकि इसे लेकर अभी ऐसा कुछ सामने नहीं आया है। अगर ऐसा कुछ होता है तो जाहिर सी बात है कि अमेरिका में भारतीयों की दिक्कतें बढ़ेंगी।

एच -1बी वीजा को लेकर कुछ चिंताएं! (फोटो:istock)

एच -1बी वीजा को लेकर कुछ चिंताएं! (फोटो:istock)

भारतीय पेशेवरों का प्रभाव अमेरिकी तकनीकी उद्योग में बहुत गहरा और व्यापक है उनके नेतृत्व, इंजीनियरिंग कौशल और प्रतिस्पर्धी मानसिकता ने उन्हें सिलिकॉन वैली और टॉप टेक कंपनियों में काफी आगे बढ़ा दिया है।

एच -1बी वीजा (H1B Visa) है क्या

एच -1बी संयुक्त राज्य अमेरिका में गैर-आप्रवासी वीजा का एक वर्गीकरण है। जो अमेरिकी नियोक्ताओं को विशिष्ट व्यवसायों में विदेशी कर्मचारियों, साथ ही फैशन मॉडलों और रक्षा विभाग की परियोजनाओं में लगे कर्मचारियों को नियुक्त करने की अनुमति देता है, जो कुछ शर्तों को पूरा करते हैं। वीजा कार्यक्रमों का विनियमन और कार्यान्वयन संयुक्त राज्य नागरिकता और आव्रजन सेवा (USCIS) द्वारा किया जाता है। जो संयुक्त राज्य अमेरिका के गृह सुरक्षा विभाग (DHS) के अंतर्गत एक एजेंसी है । विदेशी नागरिक संयुक्त राज्य अमेरिका में रहते हुए एच-1बी स्थिति प्राप्त कर सकते हैं, और उनके पास भौतिक एच-1बी वीज़ा स्टैम्प हो भी सकता है और नहीं भी। यह वीजा खासतौर पर Highly Skilled Professionals के लिए बनाया गया है। यानी ऐसे लोग जिनके पास किसी खास क्षेत्र में गहरी शिक्षा और ज्ञान हो।

शुरुआती 3 साल का प्रवास मिलता है

एच-1बी वीजा धारकों को आमतौर पर अमेरिका में शुरुआती तीन साल का प्रवास मिलता है। वे एच-1बी वीजा में अधिकतम छह साल तक भौतिक रूप से उपस्थित रह सकते हैं। ग्रीन कार्ड प्रक्रिया में कुछ निश्चित पड़ाव पार करने के बाद, एच-1बी वीजा को अधिकतम छह साल से आगे बढ़ाया जा सकता है। H1B Visa भारत-अमेरिका संबंधों का एक बड़ा मुद्दा भी है। जब भी अमेरिका H1B नियमों को सख्त करता है, तो इसका सीधा असर भारतीय IT कंपनियों और पेशेवरों पर पड़ता है।

H-1B वीजा भारतीयों के लिए बेहद खास (फोटो:istock)

H-1B वीजा भारतीयों के लिए बेहद खास (फोटो:istock)

H-1B वीजा भारतीयों के लिए बेहद खास

H-1B वीजा भारतीयों के लिए बेहद खास इसलिए है क्योंकि यह उन्हें अमेरिका में उच्च-कुशल नौकरियों में काम करने का अवसर देता है। खासतौर पर IT, इंजीनियरिंग, फाइनेंस और हेल्थकेयर और जैसे जॉब फील्ड में। यह वीजा अमेरिकी कंपनियों को विदेशी पेशेवरों को नियुक्त करने में खासी मदद करता है। हर साल H1B कोटा में से बड़ा हिस्सा भारतीय IT प्रोफेशनल्स ले जाते हैं। अमेरिका की कंपनियां और खासकर भारतीय आईटी कंपनियां जिसमें- Infosys, TCS, Wipro, HCL, Tech Mahindra आदि अहम हैं जो सबसे ज्यादा कर्मियों को H1B पर भेजती हैं।

भारतीयों के लिए क्यों है सबसे लोकप्रिय

H-1B वीजा भारतीयों के लिए यह सबसे लोकप्रिय वीजा है चूंकि भारत में तकनीकी और इंजीनियरिंग प्रतिभा की भरमार है और भारतीय प्रोफेशनल अमेरिका में जॉब करना पसंद करते हैं क्योंकि H-1B वीजा धारकों को अमेरिकी कंपनियों से प्रतिस्पर्धी वेतन मिलता है। भारतीयों को वहां हायर सेलरी मिलने के साथ वहां का उच्च जीवन स्तर भी लुभाता है। वहीं उनका मानना है कि अमेरिका में रहने से जीवनशैली, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार भी होता है।

अमेरिका में Green Card की राह

कई भारतीय H1B पर अमेरिका जाते हैं और बाद में वहीं स्थाई निवास (Green Card) के लिए अप्लाई करते हैं। दरअसल ग्रीन कार्ड (स्थायी निवासी कार्ड) एक ऐसा दस्तावेज है जो किसी व्यक्ति को संयुक्त राज्य अमेरिका में स्थायी रूप से रहने और काम करने का अधिकार देता है। यह अमेरिका में नौकरी करने, व्यवसाय चलाने और अंततः अमेरिकी नागरिक बनने का रास्ता भी प्रदान करता है, यह एक प्रकार का स्थायी वीजा है। ग्रीन कार्ड रखने वाले व्यक्ति को 'वैध स्थायी निवासी' ( LPR) कहा जाता है, जो अमेरिका में लगभग अमेरिकी नागरिक के समान अधिकार प्राप्त करता है।

भारतीयों के लिए क्यों है सबसे लोकप्रिय? (फोटो:istock)

भारतीयों के लिए क्यों है सबसे लोकप्रिय? (फोटो:istock)

कॉमर्शियल ट्रक चालकों के लिए श्रमिक वीजा जारी करना बंद

ताजा घटनाक्रम में अमेरिका के विदेश मंत्री रुबियो ने कहा कि उनका देश कॉमर्शियल ट्रक चालकों के लिए श्रमिक वीजा जारी करना बंद कर रहा है। रुबियो ने इस कदम की घोषणा करते हुए कहा कि यह बदलाव तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। उन्होंने कहा, 'अमेरिकी सड़कों पर बड़े ट्रैक्टर-ट्रेलर चलाने वाले विदेशी चालकों की बढ़ती संख्या अमेरिकी नागरिकों की जान को खतरे में डाल रही है और अमेरिकी ट्रक चालकों की आजीविका को नुकसान पहुंचा रही है।'

मागा (MAGA) चुनौती

MAGA फालोअर्स या कहें कि ट्रंप समर्थकों में गहरी दरारें उभरकर सामने आईं- एक ओर 'America First' विचारधारा वाली ताकतें थीं जो H-1B को अमेरिकी नौकरियों के लिए खतरा मानती थीं, वहीं दूसरी ओर टेक उद्योग के नेताओं ने इस प्रोग्राम को जरूरी बताया।

अमेरिका की टेक इंडस्ट्री में भारतीयों का दबदबा

अमेरिका की टेक इंडस्ट्री में भारतीयों का दबदबा उल्लेखनीय है, चाहे वह लीडरशिप हो, प्लानिंग, इंजीनियरिंग कार्यबल हो या स्टार्ट-अप का फील्ड सभी जगह भारतीयों का परचम लहलहाता है। अकेले सिलिकॉन वैली में हजारों भारतीय H-1B वीजा पर काम कर रहे हैं। वहीं Google, Apple, Meta जैसी नामचीन कंपनियों में और तमाम और छोटी-बड़ी कंपनियों में बड़ी संख्या में भारतीय कर्मचारी हैं जो वहां पर अपना बहूमूल्य योगदान देते हैं।

5.5 करोड़ अमेरिकी वीज़ा धारकों और आवेदकों की जांच

ट्रंप प्रशासन ने अप्रवासियों पर नई कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है इसके तहत 5.5 करोड़ से ज़्यादा अमेरिकी वीजा धारकों और आवेदकों की जांच की जा रही है। यह समीक्षा किसी भी उल्लंघन की जांच के लिए की जा रही है जिससे वीजा धारकों का अमेरिका से निर्वासन हो सकता है। अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि पर्यटकों सहित सभी अमेरिकी वीज़ा धारकों की अब 'निरंतर जांच' की जा रही है।यदि कोई उल्लंघन पाया जाता है, तो वीज़ा रद्द कर दिया जाएगा और उस व्यक्ति को अमेरिका आने के लिए 'अयोग्य' माना जाएगा।

भारतीयों पर क्या होगा असर! (फोटो:istock)

भारतीयों पर क्या होगा असर! (फोटो:istock)

भारतीयों पर क्या होगा असर!

ट्रंप सरकार में अगर H-1B वीजा को लेककर कोई कड़ा कदम उठाया गया तो इसका सबसे बड़ा असर भारतीयों पर पड़ेगा क्योंकि इस वीजा के सबसे ज्यादा लाभार्थी भारतीय ही हैं। अमेरिकी वीजा की ड्रॉप बॉक्स सुविधा यानी इंटरव्यू वेवर प्रोग्राम को 2 सितंबर, 2025 से अधिकांश नॉन-इमिग्रेंट वीजा श्रेणियों के लिए बंद कर दिया गया है। इसका अर्थ यह हुआ कि वर्क वीजा (H1B),स्टूडेंट वीजा (F1) और अन्य सामान्य वीजा के लिए आवेदन करने वाले तमाम लोगों को अब अमेरिकी दूतावास में व्यक्तिगत इंटरव्यू देना होगा। भारत से अमेरिका जाने वाले टेक कर्मचारियों और छात्रों पर इसका खास असर पड़ेगा, क्योंकि वे अक्सर H1B और F1 वीजा का उपयोग करते हैं। अमेरिका में इन-पर्सन (व्यक्तिगत) इंटरव्यू (In-Person Interview) आमतौर पर वीजा प्राप्त करने की प्रक्रिया का एक चरण होता है, खासकर पर्यटक या छात्र वीजा के लिए आपको अमेरिकी दूतावास या वाणिज्य दूतावास में एक अपॉइंटमेंट लेनी होगी। जहां एक अधिकारी आपके वीजा आवेदन की योग्यता, अंग्रेजी दक्षता और आपकी यात्रा के उद्देश्य का आकलन करेगा। भारत से H-1B वीजा धारकों की संख्या बहुत अधिक है, इसलिए यह बदलाव काफी हद तक भारतीय पेशेवरों को प्रभावित करेगा।

End of Article