Anil Menon : भारतीय मूल के अंतरिक्षयात्री अनिल मेनन 14 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) के लिए रवाना होंगे। मेनन का यह मिशन करीब 8 महीने का है। मेनन की यह पहली अंतरिक्ष यात्रा है। उनके साथ रूसी अंतरिक्षयात्री पयोत्र डुब्रोव एवं अन्ना किकिना भी स्पेस में जाएंगे। अंतरिक्षयान रोस्कोसमोस सोयूज एमएस-29 इन्हें लेकर अंतरिक्ष में जाएगा। अंतरिक्षयान कजाकिस्तान के बैकोनूर कोस्मोड्रोन से रवाना होगा। रिपोर्टों के मुताबिक अंतरिक्षयात्रियों का यह दल अप्रैल 2027 में पृथ्वी पर वापस लौटेगा। इस दौरान यह दल कई तरह के अभियान संपन्न करेगा।
कौन हैं अनिल मेनन
अनिल नासा के अंतरिक्ष यात्री हैं, जो भारतीय मूल के हैं। उनका जन्म मिनियापोलिस (अमेरिका) में हुआ था, और उनके माता-पिता भारतीय व यूक्रेनी प्रवासी हैं। पेशे से वे इमरजेंसी मेडिसिन के डॉक्टर और मैकेनिकल इंजीनियर हैं, और साथ ही अमेरिकी स्पेस फोर्स में कर्नल भी हैं। पहले वे अमेरिकी वायुसेना में रहे और अफगानिस्तान में 'ऑपरेशन एंड्योरिंग फ्रीडम' के तहत तैनात थे। हिमालयन रेस्क्यू एसोसिएशन से जुड़कर उन्होंने माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वालों को मेडिकल सहायता दी है।
भारत में पोलियो टीकाकरण कार्यक्रमों का अध्ययन किया
रोटरी एंबेसडोरियल स्कॉलर के तौर पर वे एक साल भारत में रहे, जहां उन्होंने पोलियो टीकाकरण कार्यक्रमों का अध्ययन किया। वे स्पेसएक्स के पहले फ्लाइट सर्जन भी रह चुके हैं। 2014 में नासा से जुड़े और स्पेस स्टेशन पर मौजूद एस्ट्रोनॉट्स की सेहत की देखभाल की जिम्मेदारी संभाली।
2021 में नासा की एस्ट्रोनॉट क्लास में चुने गए।
MS-29 अंतरिक्ष यान से रवाना हो रहे
मेनन आज, 14 जुलाई 2026 को, रूस के बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से सोयूज MS-29 अंतरिक्ष यान से रवाना हो रहे हैं। यह कॉस्मोनॉट पयोत्र डुब्रोव और अन्ना किकिना के साथ उनकी उड़ान है, और यह मेनन का पहला अंतरिक्ष मिशन है। सुबह 10:47 बजे EDT (बैकोनूर समयानुसार शाम 7:47 बजे) लॉन्च होकर, यान दो परिक्रमाओं के बाद स्टेशन से डॉक करेगा। टीम करीब आठ महीने स्पेस स्टेशन पर बिताएगी और अप्रैल 2027 में धरती पर वापसी करेगी।
मिशन के दौरान मेनन क्या करेंगे?
अंतरिक्ष में यह दल माइक्रोग्रैविटी में खून के बहाव, नसों की संरचना और ब्लड कंपोजिशन पर रिसर्च करेगा। साथ ही स्टेशन के पानी सिस्टम से IV फ्लूइड बनाने की तकनीक का परीक्षण भी होगा। यह तकनीक भविष्य की गहरी अंतरिक्ष यात्राओं के लिए अहम होगी। सेमीकंडक्टर क्रिस्टल के स्पेस-मैन्युफैक्चरिंग पर रिसर्च, जो हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग, AI और मेडिकल डिवाइसेज़ के लिए जरूरी कंपोनेंट्स बनाने में मदद करेगी। AR और AI तकनीक से अल्ट्रासाउंड स्टडीज़, ताकि भविष्य में डीप-स्पेस मिशनों में धरती से मदद की जरूरत कम हो।मेनन की पत्नी अन्ना मेनन भी नासा एस्ट्रोनॉट हैं और इससे पहले स्पेसएक्स की पोलारिस डॉन मिशन पर जा चुकी हैं, जो पहला कमर्शियल स्पेसवॉक था।
