अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि 'मुझे हैरानी होती है कि अगर हम ईरानी 'आतंकी देश' के बचे-खुचे हिस्से को 'खत्म' कर दें, और उन देशों को-जो इसका इस्तेमाल करते हैं (हम नहीं)-इस तथाकथित 'जलडमरूमध्य' (स्ट्रेट) की ज़िम्मेदारी सौंप दें, तो क्या होगा? इससे हमारे कुछ 'सहयोगी' देश, जो अभी कोई जवाब नहीं दे रहे हैं, वे तुरंत हरकत में आ जाएंगे-और वह भी बहुत तेजी से!' अमेरिकी राष्ट्रपति ने 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में कहा।
उन्होंने एक अलग पोस्ट में आगे आरोप लगाया कि ईरान को 'आतंकवाद का नंबर एक सरकारी प्रायोजक' माना जाता है। ट्रंप ने कहा, 'याद रखें, उन सभी 'मूर्खों' के लिए, ईरान को हर कोई आतंकवाद का नंबर एक सरकारी प्रायोजक मानता है,' और साथ ही यह भी जोड़ा कि अमेरिका 'तेजी से उन्हें खत्म कर रहा है।'
ईरान पर NATO कर रहा है 'बेवकूफी भरी गलती' बोले ट्रंप
ट्रंप का यह पोस्ट उनके उस बयान के एक दिन बाद आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि वह NATO से 'निराश' हैं। उन्होंने आगे कहा था कि उन्हें लगता है कि यह गठबंधन ईरान पर अपने रुख को लेकर एक 'बेवकूफी भरी गलती' कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक दिन पहले कहा था कि NATO ने अमेरिका को बताया है कि वे ईरान में चल रहे सैन्य अभियानों में 'शामिल नहीं होना चाहते।'
'वो सैन्य अभियान में शामिल नहीं होना चाहते'
'अमेरिका को हमारे ज़्यादातर NATO 'सहयोगियों' ने बताया है कि वे मध्य-पूर्व में ईरान के आतंकवादी शासन के खिलाफ़ हमारे सैन्य अभियान में शामिल नहीं होना चाहते। ऐसा तब है, जब लगभग हर देश इस बात से पूरी तरह सहमत था कि हम जो कर रहे हैं वह सही है, और यह कि ईरान को किसी भी तरह से, किसी भी रूप में परमाणु हथियार रखने की इजाज़त नहीं दी जा सकती,' ट्रंप ने Truth Social पर कहा।
'उन्हें NATO की मदद की ज़रूरत नहीं थी'
हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान में 'सैन्य सफलता' हासिल की है, और कहा कि उन्हें NATO की मदद की जरूरत नहीं थी। ट्रंप ने कहा, 'इस तथ्य के कारण कि हमने इतनी बड़ी सैन्य सफलता हासिल की है, अब हमें इसकी जरूरत नहीं है-बल्कि हमें कभी थी ही नहीं!'
