ईरान-इजराइल और अमेरिका के बीच जारी जंग के बीच बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जहां इराक में अमेरिकी पत्रकार शेली किटल्सन (Shelly Kittleson) के अपहरण ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 31 मार्च 2026 को राजधानी बगदाद में हथियारबंद लोगों ने उन्हें दिनदहाड़े किडनैप कर लिया था। हालांकि, ईरान समर्थित इराकी मिलीशिया कताइब हिज्बुल्लाह ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि वह अमेरिकी पत्रकार शेली किटलसन को रिहा करेगा, जिनका पिछले सप्ताह बगदाद की एक सड़क से अपहरण कर लिया गया था। कताइब ने कहा कि इस पहल को भविष्य में दोहराया नहीं जाएगा। कताइब ने पहले यह स्वीकार नहीं किया था कि किटलसन के अपहरण के लिए वह जिम्मेदार है, हालांकि अमेरिकी और इराकी अधिकारियों ने इस घटना के लिए इसी समूह को जिम्मेदार ठहराया था।
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब मध्य पूर्व क्षेत्र पहले से ही तनाव और संघर्ष के दौर से गुजर रहा है और लगातार युद्ध की स्थितियां जटिल होती जा रही हैं। द न्यूयार्क टाइम्स की रिपोर्ट के हवाले से इस अपहरण के पीछे ईरान समर्थित मिलिशिया संगठन Kataib Hezbollah का हाथ होना बताया जा रहा था। अमेरिकी और इराकी अधिकारियों का मानना है कि किटल्सन को इस संगठन के गढ़ में रखा गया था और उन्हें एक तरह से रणनीतिक दबाव के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था।
हालांकि, ताजा जानकारी के अनुसार, इस मिलिशिया समूह ने संकेत दिए हैं कि पत्रकार को रिहा किया जा सकता है। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि उनकी रिहाई के पीछे राजनीतिक बातचीत और स्थानीय नेतृत्व की भूमिका अहम रही है। हालांकि संगठन ने यह भी साफ किया है कि रिहाई के बाद किटल्सन को तुरंत इराक छोड़ना होगा।
एक दशक से इराक-सीरिया में कर रहीं रिपोर्टिंग
Shelly Kittleson एक अनुभवी फ्रीलांस पत्रकार हैं, जिन्होंने पिछले एक दशक से अधिक समय तक इराक, सीरिया और अफगानिस्तान जैसे संघर्ष क्षेत्रों से रिपोर्टिंग की है। वे अपनी जमीनी रिपोर्टिंग और जोखिम उठाने वाले पत्रकारिता के लिए जानी जाती हैं।
इस घटना के बाद FBI और अमेरिकी विदेश विभाग सहित कई एजेंसियां उनकी सुरक्षित रिहाई के लिए प्रयास कर रही हैं। वहीं, पत्रकार संगठनों और मानवाधिकार समूहों ने भी उनकी जल्द रिहाई की मांग की है। यह मामला एक बार फिर युद्धग्रस्त क्षेत्रों में पत्रकारों की सुरक्षा पर सवाल खड़ा करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव और सशस्त्र समूहों की सक्रियता के बीच स्वतंत्र पत्रकारों के लिए जोखिम पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। कुल मिलाकर, शेली किटल्सन का अपहरण न सिर्फ एक व्यक्तिगत त्रासदी है, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर प्रेस की स्वतंत्रता और सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता भी पैदा करता है।
