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'हां, हमसे बहुत बड़ी गलती हो गई...' होर्मुज में जहाजों पर हमले को लेकर ईरान ने बंद कमरे में मानी गलती- अमेरिका का सनसनीखेज दावा

US Iran Tension: अमेरिका-ईरान तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में व्यावसायिक जहाजों पर हुए हमलों को लेकर बड़ा दावा सामने आया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरान ने बंद कमरे में हुई बातचीत में माना कि जहाजों पर हमला "बड़ी गलती" थी और इसके लिए कट्टरपंथी तत्वों को जिम्मेदार ठहराया। हालांकि, व्हाइट हाउस चाहता है कि ईरान सार्वजनिक रूप से भी अपनी गलती स्वीकार करे।

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होर्मुज हमले पर ईरान ने बंद कमरे में मानी भूल- अमेरिका का बड़ा दावा।

US Iran Tension: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में व्यावसायिक जहाजों पर हाल ही में हुए हमलों को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरानी अधिकारियों ने बंद कमरों में ट्रंप प्रशासन के सलाहकारों के सामने यह स्वीकार किया है कि जहाजों पर गोलीबारी करना उनकी एक बड़ी भूल थी। ईरान का कहना है कि यह हमला उनके सिस्टम के कुछ 'कट्टरपंथियों और गुमराह तत्वों' की करतूत थी, जो जारी शांति वार्ताओं को पटरी से उतारना चाहते हैं।

सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बताया, "ईरानी अधिकारी बातचीत की मेज पर वापस आए और उन्होंने कहा हमसे बड़ी गड़बड़ हो गई, यह हमारी गलती थी। चलिए बातचीत जारी रखते हैं।"

व्हाइट हाउस की सख्त शर्त

पर्दे के पीछे ईरान द्वारा गलती मानने के बावजूद, ट्रंप प्रशासन इस रुख से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। व्हाइट हाउस का मानना है कि जहाजों पर हमला सीधे तौर पर संघर्ष विराम का उल्लंघन था। अमेरिका चाहता है कि ईरानी शासन निजी तौर पर अपनी गलती स्वीकार करने के बजाय दुनिया के सामने सार्वजनिक रूप से अपनी इस भूल को स्वीकार करे।

ओमान में महत्वपूर्ण बैठक और अमेरिका की चेतावनी

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर अमेरिकी वार्ताकारों की टीम बातचीत को आगे बढ़ा रही है। इस टीम का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, राष्ट्रपति के दामाद जारेड कुश्नर, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और विदेश मंत्री मार्को रुबियो कर रहे हैं। दोनों पक्षों के बीच शनिवार को ओमान में बेहद अहम बैठक तय हुई है। प्रशासन को उम्मीद है कि इस बैठक के बाद ईरान का रुख साफ होगा और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह से व्यापार के लिए खोल दिया जाएगा, ठीक वैसे ही जैसे संघर्ष शुरू होने से पहले था।

होर्मुज पर अमेरिका की दो टूक

अमेरिकी अधिकारियों ने साफ किया है कि यदि ईरान ने तनाव कम नहीं किया या होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने पर सहमति नहीं जताई, तो अमेरिका अपनी सैन्य और आर्थिक ताकत का इस्तेमाल कर कड़ा जवाब देगा। एक अधिकारी ने कहा, "अगर उनकी स्थिति नहीं बदलती, तो उनके लिए आने वाले दिन अच्छे नहीं होंगे।"

होर्मुज पर हमले को लेकर अमेरिका ने क्या कहा?

ईरान भले ही इसे अपने ही कुछ बिगड़े हुए कट्टरपंथियों की मनमानी बता रहा हो, लेकिन अमेरिकी खुफिया तंत्र का विश्लेषण अलग है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, समझौते के तहत ओमान के तट के साथ लगने वाला दक्षिणी समुद्री मार्ग व्यापार के लिए खुला रहना था, लेकिन ईरान इस बात से हैरान रह गया कि ट्रैफिक कितनी तेजी से बढ़ रहा था और तेल व गैस का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी दक्षिणी लेन से होकर गुजरने लगा था। इस अप्रत्याशित व्यापारिक तेजी को देखकर ईरान घबरा गया और उसने समझौते से पीछे हटते हुए जहाजों को निशाना बनाया।

परमाणु मुद्दे पर बातचीत लटकी

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप ईरान को समझौता करने के लिए थोड़ा समय और मौका दे रहे हैं, लेकिन यह समय बहुत सीमित है। अमेरिकी पक्ष ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर ईरान समझौते के सबसे आसान हिस्से यानी 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को व्यापार के लिए खुला रखने का सम्मान नहीं कर सकता, तो ईरान के परमाणु कार्यक्रम जैसे बेहद जटिल और संवेदनशील मुद्दे पर कभी बातचीत आगे नहीं बढ़ पाएगी।

Piyush Kumar
पीयूष कुमारauthor

पीयूष कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर Senior Copy Editor के रूप में कार्यरत हैं। देश-दुनिया की हलचल पर उनकी पैनी नजर रहती है और इन घटनाओं को सटीक, सरल और असरदार अंदाज में खबरों की भाषा देना उनकी सबसे बड़ी ताकत है। ब्रेकिंग न्यूज की रफ्तार हो या किसी जटिल मुद्दे को आसान बनाकर समझाने वाले एक्सप्लेनर—पीयूष दोनों में बराबर दक्षता रखते हैं। न्यूज जजमेंट, फैक्ट-बेस्ड राइटिंग और एंड-टू-एंड कॉपी प्रोडक्शन पर इनकी पकड़ मजबूत है और अबतक 4,000 से अधिक स्टोरी लिख चुके हैं।

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