US Iran Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा युद्ध एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर शुक्रवार को सोशल मीडिया पर ऐलान किया है कि ईरान के साथ हुआ अंतरिम सीजफायर समझौता अब पूरी तरह से खत्म हो चुका है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने के लिए बातचीत जारी रहेगी। इस बीच, अमेरिकी अधिकारियों ने ईरान के सामने कड़ी शर्त रखी है कि वह सार्वजनिक रूप से बयान दे कि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) से जहाजों की आवाजाही पूरी तरह सुरक्षित है और अब उन पर कोई हमला नहीं होगा।
ईरान का दावा: 'होर्मुज' पर सिर्फ हमारा हक
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरान के भीतर चल रहे अंदरूनी सत्ता संघर्ष के कारण किसी समझौते पर टिके रहना मुश्किल हो रहा है। युद्ध की शुरुआत में अमेरिकी और इजरायली हमलों में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने के बाद से तेहरान में वर्चस्व की जंग चल रही है।
दूसरी तरफ, संयुक्त राष्ट्र (UN) में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने अमेरिकी मांग को खारिज करते हुए साफ कह दिया कि होर्मुज जलडमरूमध्य का पूरा नियंत्रण विशेष रूप से ईरान के पास है। ईरान ने अब इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों से टैक्स (फीस) वसूलने की बात भी कही है।
परमाणु सामग्री सौंपने की शर्त और सैन्य विकल्प
अमेरिका ने साफ कर दिया है कि किसी भी नए परमाणु समझौते के लिए ईरान को अपने अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम का भंडार सौंपना होगा। अमेरिकी अधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि ईरान ऐसा नहीं करता है, तो वाशिंगटन के पास ऐसे सैन्य विकल्प मौजूद हैं जो ईरान के परमाणु कार्यक्रम को हमेशा के लिए जमीन के नीचे दफन कर देंगे।
मिडिल ईस्ट में हमलों का नया दौर
हाल ही में जब ईरान अपने दिवंगत नेता खामेनेई को दफनाने की तैयारी कर रहा था, तब उस पर अज्ञात हवाई हमले हुए। इसके जवाब में ईरान ने बहरीन, जॉर्डन, कुवैत और कतर पर मिसाइलें दागीं। ईरानी अधिकारियों ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को भी अंजाम भुगतने की धमकी दी है, जिस पर अमेरिकी हमलों में पीछे से मदद करने का आरोप है। फिलहाल ओमान और कतर जैसे मध्यस्थ देश दोनों पक्षों के बीच तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों में जुटे हैं।
