US Iran Peace Deal: पश्चिम एशिया को पिछले कई महीनों से झुलसा रही जंग के खात्मे को लेकर एक बार फिर वैश्विक कूटनीति के गलियारों में हलचल बेहद तेज हो गई है। संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान एक ऐसे ऐतिहासिक समझौते के बेहद करीब दिखाई दे रहे हैं, जो न सिर्फ इस विनाशकारी युद्ध को समाप्त कर सकता है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को भी फिर से खोल सकता है। हालांकि, समझौते के टाइमिंग को लेकर वाशिंगटन और तेहरान के बयानों में भारी विरोधाभास देखने को मिल रहा है, जिससे सवाल उठ रहा है कि क्या यह डील वाकई 'लॉक' हो पाएगी?
ट्रंप बोले रविवार को होगी डील, ईरान बोला- कुछ दिन और
बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी दावा किया था कि इस सौदे पर रविवार (आज) हस्ताक्षर होने की पूरी संभावना है, जिसके तुरंत बाद हॉरमुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए खोल दिया जाएगा। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने रविवार को हस्ताक्षर होने की संभावना को खारिज करते हुए कहा कि इसमें अभी कुछ दिनों का समय और लग सकता है।
दूसरी ओर, इस पूरे मामले में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का एक बड़ा बयान सामने आया है। शनिवार को उन्होंने दावा किया कि मिडिल ईस्ट में शांति स्थापित करने की कोशिशें अपने अंतिम चरण में हैं और अगले 24 घंटों के भीतर इस समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान इस ऐतिहासिक समझौते के 'इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर' की मेजबानी के लिए पूरी तरह तैयार है, जिसके ठीक बाद अगले सप्ताह तकनीकी स्तर की बातचीत शुरू की जाएगी।
60 दिनों का 'डेडलाइन' और यूरेनियम नष्ट करने का प्लान
इस संभावित शांति समझौते के तहत ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर लगाम लगाने के लिए एक विशेष रणनीति बनाई गई है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के मुताबिक, शुरुआती समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद अगले 60 दिनों के भीतर परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी शर्तों को अंतिम रूप दिया जाएगा, और जरूरत पड़ने पर इस समयसीमा को आगे भी बढ़ाया जा सकता है। व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस समझौते के लागू होते ही तेहरान के अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम (Highly Enriched Uranium) को पूरी तरह से हटाने या नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। यह यूरेनियम ईरान के उन तीन भूमिगत परमाणु केंद्रों में दफन है, जिन्हें पिछले साल अमेरिकी हवाई हमलों में निशाना बनाया गया था।
होर्मुज का खुलना और 'टोल' का विवाद
इस महासौदे का सबसे अहम हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से चालू करना है। दरअसल, इस साल 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू की गई सैन्य कार्रवाई के बाद से इस समुद्री मार्ग से तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई पूरी तरह ठप है। 7 अप्रैल से एक कमजोर संघर्षविराम तो लागू है, लेकिन वैश्विक बाजार में ईंधन, खाद्य और उर्वरकों की कीमतें आसमान छू रही हैं। ईरान इस मार्ग को खोलने के बदले वहां से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलना चाहता है। हालांकि, अमेरिका और उसके सहयोगी देश ईरान के इस कदम को अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का खुला उल्लंघन मान रहे हैं।
