United Nations on Israeli-Palestinian conflict: संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में सदस्य देशों को संबोधित करते हुए इस बात पर जोर दिया कि 'फिलिस्तीनियों के लिए राज्य का दर्जा एक अधिकार है, न कि कोई पुरस्कार।' UN ने लंबे समय से चले आ रहे इजराइल-गाजा संघर्ष को सुलझाने के लिए द्वि-राष्ट्र समाधान के प्रति अपना समर्थन दोहराया।
क्या है UN का कहना?
एंटोनियो गुटेरेस ने कहा, 'इजराइल-फिलिस्तीनी संघर्ष पीढ़ियों से अनसुलझा रहा है। बातचीत लड़खड़ा गई है, प्रस्तावों का उल्लंघन किया गया है।'उन्होंने द्वि-राज्य ढांचे पर संयुक्त राष्ट्र के रुख को रेखांकित करते हुए कहा, 'एक द्वि-राष्ट्र समाधान जहां दो स्वतंत्र संप्रभु लोकतांत्रिक राष्ट्र, इजराइल और फिलिस्तीन, 1967 से पहले की 1967 की सीमाओं पर आधारित अपनी सुरक्षित और मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर शांति और सुरक्षा के साथ-साथ रहें, और अंतर्राष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव और अन्य प्रासंगिक समझौतों के अनुरूप यरुशलम दोनों राज्यों की राजधानी हो।'
बिना अलग राष्ट्रों के शांति नहीं होगी
उन्होंने आगे कहा, 'एक फिलिस्तीनी के लिए राज्य का दर्जा एक अधिकार है, न कि कोई पुरस्कार, और राज्य का दर्जा न देना हर जगह चरमपंथियों को एक उपहार होगा। दो राष्ट्रों के बिना, मध्य पूर्व में शांति नहीं होगी।'
फ्रांस ने दी मान्यता
इस बीच, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने औपचारिक रूप से फिलिस्तीन राष्ट्र को मान्यता देने की घोषणा की, जिससे वह न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र से पहले ऐसा करने वाला नया पश्चिमी देश बन गया।
इजराइल पर दवाब बनाने की कोशिश
यह निर्णय कनाडा, यूनाइटेड किंगडम और ऑस्ट्रेलिया द्वारा भी फिलिस्तीन को औपचारिक मान्यता देने की घोषणा के एक दिन बाद आया है। इस कदम को व्यापक रूप से गाजा में इजराइल के निरंतर सैन्य अभियान के बीच उस पर अंतर्राष्ट्रीय दबाव बढ़ाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
140 से ज्यादा देश पहले ही फिलिस्तीन को मान्यता दे चुके हैं। यूके और फ्रांस के इन फैसलों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि दोनों ही G7 और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य हैं।
भारत किसके साथ?
12 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इजराइल और फिलिस्तीन के लिए द्वि-राष्ट्र समाधान को पुनर्जीवित करने वाला एक प्रस्ताव पारित किया। यह प्रस्ताव इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू द्वारा यह कहने के 24 घंटे से भी कम समय बाद पारित हुआ कि फिलिस्तीनी राज्य कभी अस्तित्व में नहीं आएगा। भारत उन 142 देशों में शामिल था जिन्होंने 'फलिस्तीन के प्रश्न के शांतिपूर्ण समाधान और द्वि-राष्ट्र समाधान के कार्यान्वयन पर न्यूयॉर्क घोषणापत्र का समर्थन' शीर्षक वाले प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया।
फलिस्तीनी विदेश मंत्रालय ने कनाडा, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया द्वारा फिलिस्तीनी राज्य को मान्यता देने के निर्णय का स्वागत किया। वहीं, इजराइल भड़का हुआ है।
