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CJP प्रदर्शन से पहले हिरासत के दावे और ट्रेन से उतारे गए छात्र! पुलिसियां कार्रवाई पर फिर उठे सवाल; राजधानी में हलचल तेज

CJP Protest: सीजेपी के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने का दावा किया जा रहा है। दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि 10 अक्टूबर को सीजेपी को प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई है।

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Photo : PTI
दिल्ली में भारी सुरक्षाबलों की तैनाती
Edited by: अनुराग गुप्ता
Updated Oct 9, 2026, 18:02 IST
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CJP Protest: आमतौर पर किसी भी प्रदर्शन के दौरान या बाद में, प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया जाता है, कार्रवाई की जाती है, लेकिन दिल्ली में 10 अक्टूबर को होने वाले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन से पहले ही देशभर में पुलिस का कार्रवाई शुरू हो गई है। पिछले कुछ दिनों से जैसे-जैसे प्रदर्शन की तारीख नजदीक आ रही है, पुलुसियां कार्रवाई बढ़ती जा रही है। महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों से कार्रवाई की रिपोर्ट्स सामने आ रही हैं। सीजेपी का दावा है कि अबतक 10 हजार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। ऐसे में किसी को नोटिस थमाया जा रहा, तो किसी को बीच रास्ते में भी रोका जा रहा है। साथ ही दिल्ली आने से रोकने की अपील भी की जा रही हैं। अब जब भारतीय संविधान के तहत शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों का मौलिक अधिकार है, तब पुलिस की यह कार्रवाई कई सवालों को जन्म देती है।

प्रदर्शन रोकने की हर संभव कोशिश

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP), वामपंथी संगठनों और अन्य युवा संगठनों के नेतृत्व में 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर होने वाले विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस हरसंभव कोशिश कर रही है। दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि 10 अक्टूबर को सीजेपी को प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई है। पुलिस ने अनुमति देने से इनकार करने का कारण संगठन द्वारा पहले किए गए प्रदर्शन के दौरान कानूनी निर्देशों और अपने आश्वासनों का पालन नहीं किए जाने को बताया।

नई दिल्ली रेंज की संयुक्त पुलिस आयुक्त (जेसीपी) नूपुर प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि प्रदर्शन की अनुमति के लिए कॉकरोच जनता पार्टी के सह-संयोजक सौरव दास की ओर से आवेदन प्राप्त हुआ था। उन्होंने कहा कि आवेदन पर विचार किया गया लेकिन यह पाया गया कि प्रदर्शन की सूचना बहुत कम समय पहले दी गई थी, जबकि निर्धारित दिशानिर्देशों के तहत प्रस्तावित प्रदर्शन से कम से कम 10 दिन पहले इसकी सूचना देना जरूरी है।

नूपुर प्रसाद ने कहा कि इससे पहले भी कॉकरोच जनता पार्टी को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति दी गई थी, लेकिन उस दौरान संगठन ने कानूनी निर्देशों और स्वयं दिए गए आश्वासनों का पालन नहीं किया था। उन्होंने कहा कि कानूनी निर्देशों और आश्वासनों का पालन नहीं किए जाने, कानून-व्यवस्था की मौजूदा स्थिति एवं सार्वजनिक सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत को ध्यान में रखते हुए इस बार प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई है।

'10 हजार लोग हिरासत में'

इस बीच, सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका ने दावा किया कि प्रदर्शन से पहले देशभर में कम से कम 10,000 लोगों को हिरासत में लिया गया है। पिछले कुछ दिनों से लगातार लोगों को हिरासत में लिए जाने की रिपोर्ट्स सामने आ रही हैं। इसके अलावा, दिल्ली मेट्रो के 57 स्टेशनों को बंद करने का आदेश जारी किया गया है और ट्रेनें भी रद्द की जा रही हैं, ताकि दूसरे राज्यों से प्रदर्शनकारी दिल्ली में एकजुट न हो सकें। छात्र संगठन और सीजेपी बार-बार लोगों को हिरासत में लिए जाने का दावा भी कर रही है और सोशल मीडिया पर भी कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें हाउस अरेस्ट में लिए जाने जैसी बातें कही जा रही हैं।

'देशभर से हिरासत में लिए जा रहे प्रदर्शनकारी'

दिल्ली में 10 अक्टूबर को होने वाले विरोध प्रदर्शन से पहले सीजेपी समेत कई संगठन लगातार आरोप लगा रहे हैं कि देश के विभिन्न हिस्सों से प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया जा रहा है। सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका ने दावा किया कि संगठन के सह प्रभारी दीपक बलियान को राजस्थान से हिरासत में लिया गया है। हालांकि, बाद में रांका ने नया अपडेट दिया। उन्होंने कहा कि दीपक बलियान को देर रात रिहा कर दिया गया। राजस्थान पुलिस दीपक बलियान को 100 किलोमीटर तक घुमाने ले गई।

'वकीलों को भी हिरासत में लिया गया'

आशुतोष रांका ने वकीलों को भी हिरासत में लिए जाने का दावा किया। उन्होंने कहा, ''देशभर में इस समय अघोषित आपातकाल लागू हो चुका है।वकीलों को भी राजस्थान पुलिस जबर उठाकर ले जा रही है। इससे यही साबित होता है कि सरकार पूरी तरह पैनिक मोड में है और इन्हें समझ नहीं आ रहा कि किससे कैसे डील करना है।''

'परिवारों को डराया-धमकाया जा रहा'

स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) का आरोप है कि पुलिसकर्मी कार्यकर्ताओं के घर पहुंच रहे हैं और उनके परिवारों को डराया-धमकाया जा रहा, ताकि कार्यकर्ता दिल्ली न आ सकें।

MP में ट्रेन से उतार गए 15 छात्र

मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले के लगभग 15 छात्रों को इटारसी रेलवे जंक्शन पर ट्रेन से कथित तौर पर उतार दिया गया। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, लगभग 15 छात्र प्रदर्शन में शामिल होने के लिए पुणे से गोवा एक्सप्रेस में सवार होकर दिल्ली जा रहे थे। हालांकि, गुरुवार रात ट्रेन के इटारसी जंक्शन पहुंचने पर उन्हें ट्रेन से कथित तौर पर उतार दिया गया। पुलिसकर्मियों द्वारा छात्रों को ट्रेन से उतारे जाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) के इटारसी थाना निरीक्षक संजय चौकसे ने शुक्रवार को बताया कि छात्रों को ट्रेन से उतारा गया और बाद में उन्हें सम्मानपूर्वक जाने दिया गया। हालांकि, उन्होंने इस कार्रवाई के पीछे की वजह नहीं बताई। उन्होंने बताया कि सभी छात्र अपनी मर्जी से इटारसी के एक होटल में ठहरे हुए हैं।

दो अक्टूबर से हो रही कार्रवाई

  • दिल्ली पुलिस ने दो अक्टूबर को जंतर-मंतर पर CEC के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान आम आदमी पार्टी (AAP) और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA), स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI), भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) तथा अन्य छात्र संगठनों के तकरीबन 1000 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।
  • तीन अक्टूबर को पटेल चौक से जंतर मंतर की ओर मार्च करने का प्रयास करने वाले करीब 200 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया गया। जिनमें नेहा बोरा, कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण शामिल हैं।
  • चार अक्टूबर को सौरभ भारद्वाज, विधायक संजीव झा और कुलदीप कुमार तथा इसकी इकाई 'एसोसिएशन ऑफ स्टूडेंट्स फॉर अल्टरनेटिव पॉलिटिक्स' (ASAP) के 25 कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों को हिरासत में लिए गए।
  • छह अक्टूबर को विपक्षी इंडिया गठबंधन के घटक दलों के 50 सांसदों समेत 260 लोगों को हिरासत में लिया गया। जिनमें राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा शामिल हैं।
  • सात अक्टूबर को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा समेत 100 लोगों को जंतर-मंतर की ओर जाने की कोशिश करते समय हिरासत में लिया गया।

विपक्षी दलों की क्या है मांग

विपक्षी दलों की प्रमुख मांगों में सीईसी ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर तत्काल रोक और वोटर लिस्ट की जांच शामिल है। सीजेपी, छात्र संगठनों और विपक्षी दल लगातार सीईसी के इस्तीफे की मांग को लेकर अड़े हुए हैं और इसी मुद्दे पर देश की सियासत गर्मायी हुई है।

'प्रदर्शन में जा रहे व्यक्ति को हिरासत में लेना गुंडागर्दी'

उत्तराखंड हाई कोर्ट ने 21 जुलाई को ऋषिकेश रेलवे स्टेशन पर 62 साल के प्रभात ध्यानी को हिरासत में लेने के लिए पुलिस को लताड़ा था। उस वक्त कोर्ट ने कहा था, ''देश में कहीं भी आने-जाने का अधिकार हर किसी को है, उन्हें रोकने वाले आप कौन होते हैं? क्या विरोध प्रदर्शन में शामिल होने कोई संज्ञेय अपराध है? यह पुलिस की गुंडागर्दी है।'' कोर्ट ने कहा था कि हम एक संवैधानिक व्यवस्था के तहत रह रहे हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा या सरकार की छवि के नाम पर लोगों को परेशान न करें।

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