Houthi Rebels Attack Saudi: सऊदी अरब में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति के बीच भारतीय दूतावास ने वहां रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। दूतावास ने भारतीयों को सतर्क रहने, जरूरत पड़ने पर घरों के अंदर रहने और स्थानीय अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है। इसके साथ ही, मौजूदा घटनाक्रम से जुड़े वीडियो या खबरों को सोशल मीडिया पर साझा करने अथवा दोबारा पोस्ट करने से बचने को कहा गया है।
यह एडवाइजरी ऐसे समय में आई है, जब सऊदी अरब की राजधानी रियाद समेत कुछ इलाकों में हमलों और मिसाइलों को रोके जाने की घटनाओं के बाद सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं। यमन के हूती विद्रोहियों ने रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को निशाना बनाने का दावा किया है। हालांकि, सऊदी अधिकारियों ने हवाई अड्डे पर सीधे मिसाइल हमले की पुष्टि नहीं की है।
भारतीय दूतावास ने एडवाइजरी में क्या कहा?
रियाद स्थित भारतीय दूतावास ने 8 अक्टूबर को जारी परामर्श में सऊदी अरब में मौजूद सभी भारतीय नागरिकों से सतर्क और सावधान रहने की अपील की। एडवाइजरी में कहा गया है कि नागरिक जरूरत के अनुसार घरों के अंदर रहें और स्थानीय प्रशासन की ओर से आधिकारिक माध्यमों से जारी निर्देशों का पालन करें।
दूतावास ने खास तौर पर मौजूदा घटनाओं से संबंधित वीडियो या खबरों को प्रसारित करने और दोबारा पोस्ट करने से बचने को कहा है। ऐसे समय में सोशल मीडिया पर अपुष्ट जानकारी फैलने से भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।
रियाद में क्यों बढ़ी सुरक्षा की चिंता?
सऊदी अरब में हाल के दिनों में हवाई अड्डों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ी है। सऊदी अधिकारियों के मुताबिक, रियाद और अबहा के हवाई अड्डों पर हुए हमलों में तीन लोगों की मौत हुई और 36 लोग घायल हुए।
सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने रियाद और खामिस मुशैत की ओर दागी गई बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने का दावा किया है। वहीं, हूती विद्रोहियों ने रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को निशाना बनाने की जिम्मेदारी ली है। इन घटनाओं के बीच हवाई अड्डे पर उड़ान संचालन भी प्रभावित हुआ।
क्या सऊदी अरब में भारतीय दूतावास और वीजा सेवाएं बंद हैं?
नहीं। भारतीय दूतावास के मुताबिक, रियाद स्थित दूतावास, जेद्दा स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास और उनकी आउटसोर्स वीजा सेवाएं सामान्य रूप से काम कर रही हैं। दूतावास ने कहा है कि स्थिति के अनुसार आगे भी आधिकारिक अपडेट और एडवाइजरी जारी की जाएगी।
भारतीय नागरिक मदद के लिए कहां संपर्क करें?
सऊदी अरब में रहने वाले भारतीय नागरिक किसी परेशानी या आपात स्थिति में प्रवासी भारतीय सहायता केंद्र की 24 घंटे उपलब्ध हेल्पलाइन से संपर्क कर सकते हैं।
- हेल्पलाइन नंबर: 8002471234
- सुरक्षा सलाह: स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और दूतावास के आधिकारिक अपडेट पर नजर रखें।
भारत ने हमलों की निंदा की
भारत के विदेश मंत्रालय ने सऊदी अरब के अबहा और किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर हुए हमलों की निंदा की है। मंत्रालय ने नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाए जाने को अस्वीकार्य बताया और हमलों में जान गंवाने वालों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। भारत ने सऊदी अरब की सरकार और वहां के लोगों के साथ एकजुटता भी जताई।
सऊदी अरब में मौजूदा सुरक्षा हालात को देखते हुए भारतीय नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे अफवाहों से बचें, अपुष्ट वीडियो साझा न करें और किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय अधिकारियों तथा भारतीय दूतावास के निर्देशों को प्राथमिकता दें।
हूती ठिकानों पर सऊदी लड़ाकू विमानों की बमबारी
यमन की सरकारी सेना को समर्थन देने के लिए सऊदी अरब के लड़ाकू विमान भी हूती विद्रोहियों के ठिकानों पर हवाई हमले कर रहे हैं। सऊदी अरब और उसके समर्थन वाली यमन की सरकारी सेना के बीच बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य और लाल सागर के तटीय इलाकों पर हूती के नियंत्रण को चुनौती देने के लिए संघर्ष जारी है।
बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य एक संकरा लेकिन रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यह लाल सागर को अदन की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। पिछले महीने हूती विद्रोहियों ने इस जलमार्ग से जहाजों की आवाजाही को प्रभावित करने वाले अहम ठिकानों पर यमन की सरकारी सेना से नियंत्रण छीन लिया था। इसके साथ ही लाल सागर के तटीय इलाकों में भी अपनी पकड़ मजबूत कर ली थी।
इस घटनाक्रम से बाब अल-मंदेब के रास्ते लाल सागर में होने वाले समुद्री व्यापार की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। हूती विद्रोही ईरान समर्थित हैं और सऊदी अरब के जहाजों तथा तेल टैंकरों की आवाजाही पर रोक लगाने की बात सामने आई है।
होर्मुज संकट के बीच बढ़ा बाब अल-मंदेब का महत्व
ईरान के साथ जारी युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री आवाजाही बाधित होने की स्थिति ने बाब अल-मंदेब के रणनीतिक महत्व को और बढ़ा दिया है। होर्मुज से तेल की आपूर्ति प्रभावित होने पर लाल सागर से गुजरने वाले समुद्री मार्गों की अहमियत बढ़ जाती है। ऐसे में बाब अल-मंदेब पर किसी एक पक्ष का मजबूत नियंत्रण वैश्विक तेल कारोबार और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को प्रभावित कर सकता है। इसी वजह से सऊदी अरब यमन की सरकारी सेना के साथ मिलकर हूती विद्रोहियों को बाब अल-मंदेब और लाल सागर के तटीय क्षेत्रों से पीछे धकेलने की कोशिश कर रहा है।
सऊदी अरब ने वर्ष 2015 में कई सुन्नी मुस्लिम देशों के साथ मिलकर यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था। हालांकि, लंबे संघर्ष के बावजूद वह हूती को निर्णायक रूप से पराजित नहीं कर सका। करीब सात वर्षों तक चली लड़ाई के बाद संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से युद्धविराम हुआ।
हूती विद्रोहियों का यमन के लगभग एक-तिहाई भूभाग पर नियंत्रण बताया जाता है। इन इलाकों में देश की करीब 80 प्रतिशत आबादी रहती है। इससे स्पष्ट होता है कि यमन में हूती की पकड़ केवल क्षेत्रीय नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की बड़ी आबादी वाले क्षेत्रों पर उसके प्रभाव के कारण संघर्ष का समाधान भी बेहद जटिल बना हुआ है।
