Nidal Hasan Firing Squad Execution: वर्ष 2009 में टेक्सास के फोर्ट हुड सैन्य अड्डे पर अंधाधुंध गोलीबारी कर 13 निहत्थे अमरीकी सैनिकों की हत्या करने वाले पूर्व मेजर और दोषी आतंकवादी निडाल मलिक हसन (Nidal Malik Hasan) को फायरिंग स्क्वॉड (गोली मारने वाले दस्ते) के जरिए मौत की सजा दी जाएगी।
अमरीकी रक्षा मंत्री (Secretary of War) पीट हेगसेथ की सिफारिश पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हसन के मृत्युदंड को औपचारिक मंजूरी दे दी है। पेंटागन के अधिकारियों के अनुसार, इस सजा को 3 दिसंबर 2026 को दोपहर 1:00 बजे पूरा किया जाएगा और इसका सार्वजनिक रूप से सीधा प्रसारण (Live Streaming) भी किया जाएगा।
'अल्लाहु अकबर' के नारे लगाकर बरसाई थीं गोलियां
युद्ध विभाग (Department of War) के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने सोशल मीडिया पर इस फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि 2009 में फोर्ट हुड में हुए आतंकवादी हमले के दौरान हसन ने 'अल्लाहु अकबर' के नारे लगाते हुए निहत्थे अमरीकी सैनिकों पर गोलियां बरसाई थीं।
हमले का भयानक मंजर: इस घातक जिहादी हमले में 13 लोगों की जान चली गई थी, जबकि 32 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
सैन्य इतिहास में 1961 के बाद पहली कार्रवाई: अगर 3 दिसंबर को यह सजा दी जाती है, तो यह वर्ष 1961 के बाद अमरीकी सेना द्वारा किसी अमरीकी सैन्यकर्मी को दी जाने वाली पहली मौत की सजा होगी।
लाइव स्ट्रीमिंग का फैसला क्यों?
अमरीकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि इस कार्रवाई को सार्वजनिक करने और लाइव स्ट्रीम करने का मकसद दुनिया को यह संदेश देना है कि अमरीका पर हमला करने वाले और निर्दोषों का खून बहाने वाले चरमपंथियों को उनके अंजाम तक पहुंचाया जाएगा।
समय और स्थान: अमरीकी सेना के सचिव सजा के सटीक समय और स्थान को अंतिम रूप देंगे, हालांकि शुरुआती आदेशों के तहत 3 दिसंबर को फोर्ट हुड में ही मृत्युदंड दिए जाने की योजना है।
पेंटागन की पुष्टि: पेंटागन के आधिकारिक बयान में कहा गया कि निडाल हसन के खिलाफ न्याय का अंतिम फैसला आ चुका है और उसे उसके कृत्य की सजा भुगतनी होगी।
फायरिंग स्क्वॉड क्या?
आखिर निडाल हसन को कैसे मारा जाएगा? इसका सही उत्तर है कि उसे सामने खड़ा किया जाएगा और फायरिंग स्क्वॉड के शूटर उस पर गोली चलाएंगे। ऐसे में उसको मौत की सजा दी जाएगी। बता दें कि फायरिंग स्क्वॉड कई देशों में ऐतिहासिक रूप से इस्तेमाल हुआ है और आज भी कुछ जगहों पर कानूनी रूप से मौजूद है। हालांकि, अमेरिका में यह तरीका बेहद दुर्लभ है।
जानकारी के मुताबिक, हसन अमेरिकी सेना में मनोचिकित्सक के पद पर तैनात था। मुकदमे के दौरान उसने कहा कि उसका मकसद सैनिकों को अफगानिस्तान जाने और वहां अपने साथी मुसलमानों को मारने से रोकना था। बता दें कि नवंबर 2009 में निडाल हसन फोर्ट हुड के एक मेडिकल भवन में पहुंचा था। उस दौरान वहां तमाम सैनिक अपनी स्वास्थ्य जांच कराने के लिए पहुंचे हुए थे। जहां हसन ने अचानक गोलीबारी शुरू कर दी और 'अल्लाहु अकबर' कहकर सैनिकों को मार डाला।
