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सीमापुरी से सत्य निकेतन तक 19 से ज्यादा मौतें, दिल्ली में क्यों ढह रही हैं बहुमंजिला इमारतें, क्या कर रहा प्रशासन?

Delhi Building Collapse Explainer: राजधानी दिल्ली में ताश के पत्तों की तरह इमारतों का ढहना अब एक जानलेवा पैटर्न बन चुका है। नई सीमापुरी में 25 गज पर बनी बहुमंजिला इमारत गिरने की ताजा घटना के साथ ही इस साल दिल्ली में साकेत, रोहिणी, करावल नगर और सत्य निकेतन जैसे हादसों में 19 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

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कागजों पर पास नक्शा और जमीन पर अवैध मंजिलें! (Photo: AI Generated/Newsroom Verified)
Edited by: मोनू झा
Updated Oct 7, 2026, 23:52 IST
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Delhi Building Collapse Explainer: देश की राजधानी दिल्ली के शाहदरा जिले के नई सीमापुरी में बुधवार दोपहर एक बेहद दर्दनाक हादसा हुआ, जब 25 गज के छोटे से प्लॉट पर बनी चार मंजिला इमारत अचानक ढह गई। हादसे के वक्त मकान में करीब 14-15 लोग मौजूद थे और देखते ही देखते चारों तरफ चीख-पुकार और धूल का गुबार छा गया। इस हादसे में एक गर्भवती महिला समेत तीन लोगों की मौत हो गई।

लेकिन सीमापुरी (New Seemapuri Building Collapse) का यह हादसा कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि दिल्ली में बहुमंजिला इमारतों का ताश के पत्तों की तरह ढहना एक खौफनाक और जानलेवा सिलसिला बन चुका है।

इस साल दिल्ली में कहां-कहां हुए बड़े हादसे?

सरकारी आंकड़ों और मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इस साल दिल्ली में अलग-अलग इलाकों में आधा दर्जन से अधिक इमारतें गिर चुकी हैं, जिनमें अब तक 19 से अधिक मासूम लोगों की जान जा चुकी है:

सत्य निकेतन (6 सितंबर): दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में एक बहुमंजिला इमारत ढहने से 7 लोगों की मौत हो गई थी।

साकेत (30 मई): कोचिंग सेंटर और कैफे वाली कमर्शियल इमारत गिरने से 6 छात्रों की जान चली गई थी।

रोहिणी सेक्टर-16 (8 जुलाई): भारी बारिश के दौरान निर्माणाधीन मकान गिरने से 3 मजदूरों की मौत हुई थी।

करावल नगर व मुकुंदपुर: नाले की खुदाई और एलपीजी सिलेंडर ब्लास्ट के चलते मकान ढहे और कई लोग मलबे में दबकर घायल हुए।

(Photo: ANI)

(Photo: ANI)

आखिर क्यों गिर रही हैं दिल्ली की इमारतें?

एक्सपर्ट्स और जांच रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली के इन हादसों के पीछे तीन सबसे बड़े कारण जिम्मेदार हैं:

अवैध निर्माण और extra floors: 25 से 50 गज के छोटे प्लॉटों पर बिना स्ट्रक्चरल जांच के 4 से 5 मंजिलें खड़ी कर दी जाती हैं।

बीम और कॉलम से छेड़छाड़: निर्माण या मरम्मत के दौरान सुरक्षा मानकों को पूरी तरह नजरअंदाज किया जाता है।

प्रशासनिक लापरवाही: स्थानीय स्तर पर शिकायतों के बावजूद समय रहते MCD और पुलिस की ओर से ठोस कार्रवाई न होना।

हादसों के बाद दिल्ली सरकार और MCD का बड़ा एक्शन

लगातार होती मौतों के बाद चौतरफा घिरी दिल्ली सरकार और दिल्ली नगर निगम (MCD) ने कड़े कदम उठाने शुरू किए हैं:

अफसरों पर गाज और FIR: सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD के 3 इंजीनियरों और डिप्टी कमिश्नर समेत 5 अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया। अवैध निर्माण कराने वाले बिल्डरों और मकान मालिकों पर पुलिस केस दर्ज कर गिरफ्तारियां की गईं।

बुलडोजर और सीलिंग ड्राइव: पूरे शहर में अभियान चलाकर 350 से ज्यादा अवैध मंजिलों और जर्जर ढांचों को गिराया गया, जबकि 150 से अधिक बिना NOC वाली संपत्तियों को सील कर दिया गया।

PG और हॉस्टलों के लिए नई नीति: 1,300 से अधिक PG इमारतों का सर्वे किया गया है। अब PG चलाने के लिए फायर NOC, पुलिस वेरिफिकेशन और स्ट्रक्चरल फिटनेस सर्टिफिकेट अनिवार्य कर दिया गया है।

सीधी जवाबदेही तय: दिल्ली सरकार ने साफ किया है कि अगर किसी इलाके में बिना पास नक्शे के निर्माण होता है, तो सीधे क्षेत्र के जूनियर इंजीनियर (JE) पर आपराधिक कार्रवाई की जाएगी।

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