Iran Nuclear Sites: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से अपने दावों पर जोर देते हुए कहा है कि वाशिंगटन ने 22 जून को अपने लक्षित हमलों के दौरान ईरानी परमाणु स्थलों को नष्ट कर दिया। ट्रंप ने इसके लिए इजरायल परमाणु ऊर्जा आयोग (IAEC) की रिपोर्ट का हवाला दिया। बुधवार को ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में ट्रंप ने ईरान में फोर्डो परमाणु स्थल पर IAEC द्वारा किए गए आकलन का जिक्र किया। इजरायली एजेंस ने कहा कि अमेरिका के हमले में साइट के बुनियादी ढाँचे को नष्ट कर दिया और संवर्धन सुविधा को निष्क्रिय कर दिया है।
ट्रंप बोले- ईरान के परमाणु स्थल नष्ट
ट्रंप ने लिखा, इजराइल ने अभी कहा है कि ईरान के परमाणु स्थल नष्ट हो गए हैं! हमारे महान बी-2 पायलटों और इसमें शामिल सभी अन्य लोगों को धन्यवाद!" ट्रंप की घोषणा IAEC द्वारा किए गए आकलन के मद्देनजर आई, जहां उसने फोर्डो और अन्य परमाणु स्थलों पर अमेरिकी हमले के प्रभाव का विस्तार से वर्णन किया, जिसमें कहा गया कि फोर्डो में हमलों ने इसके अहम बुनियादी ढांचे को नष्ट कर दिया और संवर्धन सुविधा को निष्क्रिय बना दिया। इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा घोषित अपने बयान में IAEC ने यह भी कहा कि अमेरिकी हमलों और इजरायल द्वारा सुविधाओं पर हमलों के कारण तेहरान के परमाणु हथियार विकास कार्यक्रम को कई वर्षों के लिए बड़ा झटका लगा है।
IAEC ने कहा- ईरान का परमाणु कार्यक्रम कई साल पीछे गया
IAEC ने लिखा, फोर्डो पर अमेरिका के विनाशकारी हमले ने साइट के अहम बुनियादी ढांचे को नष्ट कर दिया और संवर्धन सुविधा को निष्क्रिय कर दिया। हमारा आकलन है कि ईरान की परमाणु सुविधाओं पर अमेरिकी हमलों ने ईरान के सैन्य परमाणु कार्यक्रम ईरान की परमाणु हथियार विकसित करने की क्षमता को कई वर्षों तक पीछे धकेल दिया है। अगर ईरान को परमाणु सामग्री तक पहुंच नहीं मिलती है, तो यह उपलब्धि अनिश्चित काल तक जारी रह सकती है।
ट्रंप के दावे पर उठाए गए सवाल
ट्रंप की ओर से बार-बार की गई टिप्पणियों के बीच CNN के निष्कर्ष की भी चर्चा हो रही है, जिसमें कहा गया था कि अमेरिकी हमलों ने ईरान के परमाणु स्थलों को पूरी तरह नष्ट नहीं किया, जैसा कि अमेरिकी राष्ट्रपति या उनके प्रशासन ने दावा किया है। सीएनएन ने अपनी रिपोर्ट में सात व्यक्तियों का हवाला देते हुए कहा है कि रक्षा खुफिया एजेंसी (DIA) के शुरुआती मूल्यांकन से पता चलता है कि हमलों ने केवल अस्थायी रुकावट पैदा की है, जिससे तेहरान का परमाणु कार्यक्रम सिर्फ कुछ महीनों के लिए पीछे गया है। हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने इस तरह के दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
12 दिन तक चला युद्ध
ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष 13 जून को शुरू हुआ जब इजरायल ने "ऑपरेशन राइजिंग लॉयन" के तहत ईरानी सैन्य और परमाणु स्थलों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर हवाई हमला किया था। ईरान ने जवाब में "ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 3" शुरू किया, जिसमें इजरायल पर मिसाइल और ड्रोन हमले शामिल थे। इसके बाद अमेरिका ने भी बी-2 बॉम्बर्स से ईरान के परमाणु स्थलों पर बमबारी कर उसे भारी नुकसान पहुंचाया। 24 जून को ट्रंप ने ईरान-इजरायल के बीच सीजफायर का ऐलान किया। (एएनआई)
