US Iran War: ईरान संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल के प्रति अपना कड़ा समर्थन जताते हुए उसे अमेरिका का एक महान और विश्वसनीय सहयोगी करार दिया है। अपने हालिया बयान में ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा कि चाहे लोग इजरायल को पसंद करें या न करें, लेकिन इतिहास गवाह है कि वह हर मुश्किल परिस्थिति में अमेरिका के साथ मजबूती से खड़ा रहा है।
उन्होंने इजरायल की तारीफ करते हुए उसे साहसी, निर्भीक, वफादार और बुद्धिमान देश बताया। ट्रंप के इस बयान को वैश्विक राजनीति में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि उन्होंने स्पष्ट किया है कि इजरायल जैसे सहयोगियों की वफादारी पर सवाल नहीं उठाया जा सकता।
ट्रंप ने बिना नाम लिए नाटो पर साधा निशाना
इसके साथ ही ट्रंप ने उन अन्य देशों पर भी तीखा हमला बोला, जिन्होंने संघर्ष और तनाव के समय में अपनी प्रतिबद्धताओं से समझौता किया है। उन्होंने बिना नाम लिए इशारा किया कि जब दुनिया संकट के दौर से गुजरती है, तब कई देश अपना 'असली रंग' दिखा देते हैं, जबकि इजरायल अपने सिद्धांतों पर अडिग रहता है। माना जा रहा है कि ट्रंप का इशारा ब्रिटेन और फ्रांस जैसे नाटो देशों पर था, जिन्होंने ईरान के खिलाफ अमेरिका का खुलकर समर्थन नहीं किया।
ट्रंप ने इजरायल की सैन्य क्षमता और जीतने के जज्बे पर भरोसा जताते हुए कहा कि यह एक ऐसा राष्ट्र है जो कठिन परिस्थितियों में लड़ना जानता है और अंत में जीत हासिल करना भी जानता है। ट्रंप का यह संदेश न केवल इजरायल के मनोबल को बढ़ाने वाला है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अमेरिका के पुराने रुख की याद दिलाता है।

ट्रंप ने की इजरायल की तारीफ। Trump Truth Social
सीजफायर के बीच हिजबुल्लाह को निशाना बना रहा इजरायल
इस बीच, इजरायली सेना ने दावा किया कि उसने दक्षिणी लेबनान में ‘येलो लाइन’ के पास संदिग्ध लड़ाकों को निशाना बनाया। वहीं, सीमा क्षेत्र के पास नए सैन्य ठिकाने के निर्माण की भी खबर है, जिससे हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं। बताया जा रहा है कि हाल ही में घोषित 10 दिन का युद्धविराम, जिसकी जानकारी ट्रंप ने दी थी, लागू तो हो गया है, लेकिन जमीनी स्तर पर तनाव अभी भी बना हुआ है।
हिजबुल्लाह ने क्या कहा?
हिजबुल्लाह चीफ नईम कासिम ने बयान जारी कर कहा कि युद्धविराम का मतलब दोनों पक्षों की ओर से पूरी तरह से सैन्य कार्रवाई रोकना है। उन्होंने कहा, “एकतरफा सीजफायर नहीं हो सकता,” और चेतावनी दी कि अगर इजरायल की ओर से कोई उल्लंघन हुआ तो हिज़्बुल्लाह जवाब देगा।
कासिम ने पांच प्रमुख मांगें भी रखीं- पूरे लेबनान में स्थायी शांति, इजरायली सेना की पूरी वापसी, बंदियों की रिहाई, विस्थापित लोगों की वापसी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से पुनर्निर्माण। उन्होंने यह भी कहा कि हिजबुल्लाह को हराया नहीं गया है और वह लेबनान की आज़ादी और संप्रभुता के लिए संघर्ष जारी रखेगा।
