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सत्य निकेतन हादसे में चौथी गिरफ्तारी, नया खुलासा-शुभम और सुधांशु हर महीने महेश को देते थे 1 लाख रुपये

दिल्ली सरकार और MCD ने पूरी दिल्ली में बिना इजाजत 5वीं मंजिल बनाने वाली इमारतों और नियमों का उल्लंघन कर चलाए जा रहे पीजी को सील करने का अभियान शुरू किया है।

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पीजी हादसे में एक और गिरफ्तारी

Photo : PTI

Satya Niketan building collapse: दिल्ली के सत्य निकेतन हादसे में चौथी गिरफ्तारी हुई है। दिल्ली पुलिस के मुताबिक पुलिस रिमांड के दौरान महेश गुप्ता ने बिल्डिंग को अगस्त 2025 से दो बिजनेस पार्टनर शुभम त्यागी और सुधांशु को लीज पर दिया था। सुधांशु को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। शुभम त्यागी अभी फरार है। शुभम त्यागी और सुधांशु लीज पर लेकर ‘Hostel Daze’ नाम से PG के तौर पर चला रहे थे। महेश ने पूछताछ में खुलासा किया कि PG संचालक सुधांशु और शुभम हर महीने महेश को 1,05,000 रुपए देते थे।

प्रशासनिक कार्रवाई और गिरफ्तारियां

हादसे के बाद दिल्ली सरकार, पुलिस और हाईकोर्ट सख्त रुख अपना रहे हैं। दिल्ली पुलिस ने पीजी का संचालन और मालिकाना हक रखने वाले परिवार—हरिराम गुप्ता (81), उनकी पत्नी उर्मिला (75) और बेटे महेश (52) को गिरफ्तार कर लिया है। साथ ही एमसीडी (MCD) के साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर समेत 5 अधिकारियों को लापरवाही बरतने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है।

5वीं मंजिल वाले अवैध निर्माण होंगे सील

दिल्ली सरकार और MCD ने पूरी दिल्ली में बिना इजाजत 5वीं मंजिल बनाने वाली इमारतों और नियमों का उल्लंघन कर चलाए जा रहे पीजी को सील करने का अभियान शुरू किया है। वहीं, दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस मामले में उच्चस्तरीय जांच का आदेश देते हुए कहा कि सरकार और नागरिक निकाय अपनी जवाबदेही से भाग नहीं सकते।

छात्रों में डर और पलायन

सत्य निकेतन दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस (जैसे जीसस एंड मैरी, वेंकटेश्वर कॉलेज) के छात्रों के रहने का मुख्य केंद्र है। दिल्ली विश्वविद्यालय के हॉस्टलों में सीमित सीटें होने के कारण हजारों छात्र इन्हीं अनधिकृत और तंग पीजी में रहने को मजबूर हैं। हादसे के बाद प्रशासन द्वारा आसपास की खतरनाक घोषित की गई इमारतों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। कई इमारतों की बिजली-पानी की आपूर्ति काट दिए जाने और अपनी सुरक्षा की चिंता के कारण मंगलवार को छात्रों को मजबूरी में अपने-अपने पीजी खाली कर दूसरे सुरक्षित स्थानों या अपने घर लौटना पड़ा।

कैसे हुआ हादसा?

दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से सटे सत्य निकेतन इलाके में यह 40 से 50 साल पुरानी इमारत बिना किसी ठोस पिलर स्ट्रक्चर के बनी हुई थी। प्रॉपर्टी टैक्स रिकॉर्ड्स के अनुसार, यह ढांचा 1970-80 के दशक का बना हुआ था, जिस पर बाद में अतिरिक्त मंजिलें बना दी गईं। हादसे के समय इमारत के बेसमेंट या निचले हिस्से में अतिरिक्त जगह बनाने के लिए बिना सुरक्षा मानकों के मरम्मत कार्य कराया जा रहा था। पिछले दिनों दिल्ली-एनसीआर में हुई भारी बारिश की वजह से पुरानी इमारत की नींव और दीवारें कमजोर हो गई थीं। रविवार दोपहर अचानक पूरी 5-मंजिला इमारत भरभराकर ढह गई।

Anuj Mishra
अनुज मिश्राauthor

अनुज मिश्रा भारत के अग्रणी क्राइम और इन्वेस्टिगेटिव पत्रकारों में से एक हैं। वह वर्तमान में टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। पिछले करीब दो दशकों से अनुज मिश्रा ने अपराध, आंतरिक सुरक्षा और संगठित अपराध से जुड़े मामलों की गहन रिपोर्टिंग और संपादकीय नेतृत्व किया है। उन्होंने सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग, एनआईए और खुफिया एजेंसियों से संबंधित बड़ी और संवेदनशील खबरों को नज़दीकी से कवर किया है। अनुज मिश्रा की सबसे बड़ी ताक़त उनकी ग्राउंड रिपोर्टिंग है। हर बड़ी और अहम खबर में वह ग्राउंड ज़ीरो पर मौजूद रहकर घटनाओं की प्रत्यक्ष कवरेज करते रहे हैं। यही कारण है कि उनकी रिपोर्टिंग में जमीनी सच्चाई और तथ्य हमेशा साफ़ झलकते हैं। टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ने से पहले अनुज मिश्रा देश के कई बड़े टेलीविज़न न्यूज़ चैनलों के साथ काम कर चुके हैं, जहां उन्होंने अपनी पत्रकारिता और एडिटोरियल स्किल्स से अलग पहचान बनाई। अनुज ने न केवल देश-विदेश की बड़ी खबरों को जनता तक पहुँचाया है, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति और सत्ता गलियारों से जुड़े घटनाक्रमों पर भी पैनी नज़र रखी है। उनकी पत्रकारिता शैली तथ्यपरक, इन्वेस्टिगेटिव और जमीनी हकीकत पर आधारित मानी जाती है। उन्होंने आतंकवाद, संगठित अपराध, ड्रग्स सिंडिकेट, हाई-प्रोफाइल जांच और सियासी घटनाक्रमों पर कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स की हैं, जिन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है।

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