China Taiwan Conflict: दुनिया के कई देशों में युद्ध छिड़ा हुआ है। रूस-यूक्रेन के बीच 4 साल से युद्ध चल रहा है। इजरायल ईरान के साथ-साथ फिलिस्तीन और बेरूत में भी बमबारी कर रहा है और अमेरिका उसका साथ दे रहा है। इधर, पाकिस्तान और अफगानिस्तान भी एक-दूसरे पर कहर बरपा रहे हैं और निर्दोषों लोगों की मौत हो रही है। इस बीच, ताइवान को चीनी हमले का डर सता रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ताइवान के पास भारी संख्या में चीनी एयरक्राफ्ट और जहाज डिटेक्ट किए गए हैं।
ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि बुधवार को तड़के चीन के 36 एयरक्राफ्ट, 8 नौसैनिक जहाज और एक अन्य जहाज ताइवान के आस-पास देखे गए हैं। इन 36 एयरक्राफ्ट में से 24 ताइवान स्ट्रेट की मीडियन लाइन पार की और ताइवान के उत्तरी, मध्य, दक्षिणी-पश्चिमी और पूर्वी एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन ज़ोन (ADIZ) में दाखिल हुए।
ताइवान को सता रहा चीन का खौफ!
ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि इन सभी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है और स्थिति के अनुसार जवाब दिया गया है। इससे एक दिन पहले, ताइवान ने मंगलवार को चीन के 28 एयरक्राफ्ट्स की गतिविधियां दर्ज की थीं। इनमें से 21 विमानों ने मीडियन लाइन पार कर ADIZ में प्रवेश किया। इन विमानों में J-10, J-16 और KJ-500 जैसे एयरक्राफ्ट शामिल थे, जो नौसैनिक जहाज़ों के साथ मिलकर संयुक्त अभ्यास कर रहे थे।
क्या है चीन-ताइवान विवाद?
चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है। बीजिंग का दावा है कि ताइवान चीन का अभिन्न अंग है और चीन इसे अपनी नीति व कानून का हिस्सा बताता है, जबकि ताइवान खुद को अलग पहचान वाला देश मानता है और अपनी सरकार, सेना तथा अर्थव्यवस्था के साथ स्वतंत्र रूप से काम करता है।
यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन ऑफ़ इंडिया के मुताबिक, ताइवान की स्थिति अंतरराष्ट्रीय बहस का एक अहम मुद्दा बनी हुई है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून में संप्रभुता, आत्मनिर्णय और अहस्तक्षेप (Non-Interference) के सिद्धांतों की कसौटी पर खरी उतरती है।
