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Syria Civil War: सीरिया में तख्तापलट के बीच राष्ट्रपति असद ने छोड़ा देश, विशेष विमान से अज्ञात लोकेशन पर रवाना

Syria Civil War: समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने दावा किया है कि सीरिया के राष्ट्रपति असद विशेष विमान में सवार होकर किसी अज्ञात स्थान के लिए रवाना हो गए हैं। बता दें, इससे पहले सीरिया की सरकारी मीडिया ने राष्ट्रपति असद के देश छोड़ने की खबरों का खंडन भी किया था।

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सीरिया के राष्ट्रपति अल असद ने छोड़ा देश।

Syria Civil War: सीरिया में तख्तापलट के लिए चल रही जंग खूनी हो चुकी है। राष्ट्रपति अल असद सरकार के विरोध में विद्रोही लड़ाकों ने एक-एक कर कई बड़े शहरों पर कब्जा जमा लिया है। अब ये विद्रोही राजधानी दमिश्क में भी घुस चुके है। कहा जा रहा है कि दमिश्क के उपनगरों में विद्रोही लड़ाकों ने घुसपैठ शुरू कर दी है। इस बीच राष्ट्रपति बशर अल असद ने देश छोड़ दिया है।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने दावा किया है कि राष्ट्रपति असद विशेष विमान में सवार होकर किसी अज्ञात स्थान के लिए रवाना हो गए हैं। बता दें, इससे पहले सीरिया की सरकारी मीडिया ने राष्ट्रपति असद के देश छोड़ने की खबरों का खंडन भी किया था। इसमें कहा गया था कि राष्ट्रपति असद दमिश्क में ही हैं और अपने कर्तव्व्यों का निवर्हन कर रहे हैं। हालांकि, अब एक बार फिर उनके देश छोड़कर भागने की खबरें सामने आई हैं।

दमिश्क एयरपोर्ट पर अराजकता का माहौल

सीरिया में छिड़ी खूनी जंग के बीच हजारों की संख्या में लोग देश छोड़कर भागने की कोशिश के फिराक में हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में लोग दमिश्क इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंच गए हैं, जिससे यहां अराजकता का माहौल बन गया है। वहीं, खबर आ रही है कि दमिश्क में एक तरफ विद्रोहियों ने एंट्री कर ली है, तो दूसरी तरफ यहां सीरियाई सेना की तैनाती के कोई संकेत नहीं मिले हैं।

होम्स शहर पर भी विद्रोहियों ने किया कब्जा

सीरिया में सरकारी बल होम्स शहर से पीछे हट गए हैं। ऐसे में विद्रोहियों ने इस शहर पर भी कब्जे का दावा किया है। सुरक्षा बलों का होम्स से पीछे हटना असद के लिए संभवत: एक बड़ा झटका है। यह शहर, राजधानी दमिश्क और सीरिया के तटीय प्रांतों लताकिया और टारटस के बीच स्थित है। ये प्रांत सीरियाई नेता के समर्थकों का आधार हैं और यहां रूसी रणनीतिक नौसैनिक अड्डा है। सरकार समर्थक ‘शम एफएम’ समाचार संस्थान ने विस्तृत जानकारी दिए बिना बताया कि सरकारी बलों ने सीरिया के तीसरे सबसे बड़े शहर के बाहर मोर्चा संभाल लिया है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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