Sep 07, 2026

बादलों के बीच 4,380 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है यह झील, इस नदी को देती है जन्म

Pankaj Yadav

​4,380 मीटर की ऊंचाई पर है ये झील​

नेपाल के हिमालय में करीब 4,380 मीटर की ऊंचाई पर गोसाईंकुंड झील मौजूद है। बर्फीले पहाड़ों के बीच इसका नजारा बेहद खूबसूरत दिखाई देता है।

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​भगवान शिव से है गहरा कनेक्शन​

गोसाईंकुंड को हिंदू धर्म में बेहद पवित्र माना जाता है। इस झील को लेकर भगवान शिव से जुड़ी एक खास धार्मिक मान्यता है।

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​समुद्र मंथन की कहानी से जुड़ी है इसकी उत्पत्ति​

मान्यता है कि समुद्र मंथन से निकला विष पीने के बाद भगवान शिव का गला जलने लगा था। तब उन्होंने पानी की तलाश की।

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​त्रिशूल से बनाया पानी का स्रोत​

कहा जाता है कि भगवान शिव ने अपनी त्रिशूल से जमीन पर प्रहार किया। वहां से पानी निकला और गोसाईंकुंड झील का निर्माण हुआ।

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​झील का पानी माना जाता है पवित्र​

हिंदू श्रद्धालुओं के लिए गोसाईंकुंड का पानी बेहद पवित्र माना जाता है। यहां आकर स्नान करने की भी धार्मिक परंपरा है।

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​जनै पूर्णिमा पर उमड़ती है भीड़​

हर साल जनै पूर्णिमा के मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु गोसाईंकुंड पहुंचते हैं। लोग कठिन पहाड़ी रास्ता तय करके यहां दर्शन और स्नान करते हैं।

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​इस झील से निकलती है एक नदी​

गोसाईंकुंड अकेली झील नहीं है। इसके आसपास कई छोटी-बड़ी झीलें और तालाब मौजूद हैं। साथ ही इस झील से एक नदी भी निकलती है जिसका नाम त्रिशूली नदी है।

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​रामसर साइट भी है ये इलाका​

गोसाईंकुंड और आसपास की झीलों को अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि के रूप में मान्यता मिली है। यह इलाका प्रकृति के लिए भी बेहद खास है।

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​यहां पहुंचना आसान नहीं​

गोसाईंकुंड तक पहुंचने के लिए पहाड़ों के बीच ट्रेकिंग करनी पड़ती है। ऊंचाई और कठिन रास्ते इस यात्रा को चुनौतीपूर्ण बनाते हैं।

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