जयपुर का नाम आते ही गुलाबी इमारतें और रेतीला भूभाग याद आता है। लेकिन सितंबर में इसका एक अलग रूप दिखाई देता है। मानसून की बारिश के बाद अरावली की पहाड़ियां हरी हो जाती हैं। आमेर, जयगढ़ और नाहरगढ़ की ओर जाते समय रास्ते ज्यादा सुंदर नजर आते हैं।
सितंबर के बादल जयपुर के किलों को थोड़ा और शानदार बना देते हैं। हरी पहाड़ियों के बीच आमेर किला किसी खूबसूरत पेंटिंग जैसा दिखाई देता है। वहीं, जयगढ़ किले की पुरानी दीवारें बारिश के बाद और प्रभावशाली लगती हैं। फिसलन से बचने के लिए आरामदायक जूते जरूर पहनें। (Pic: Wikipedia)
नाहरगढ़ किले से जयपुर का सूर्यास्त देखना अपने आप में खास अनुभव है। सितंबर में आसमान में छाए बादल इस नजारे को और नाटकीय बना देते हैं। थोड़ी बारिश के बाद मौसम साफ हो जाए तो ऊंचाई से शहर की इमारतें और गलियां दूर तक दिखाई देती हैं। (Pic: Wikipedia)
सितंबर में मानसागर झील में पानी और आसपास की हरियाली जल महल की सुंदरता बढ़ा देती है। झील के बीच खड़ा यह महल दूर से तैरता हुआ दिखाई देता है। यहां सुबह या सूर्यास्त के आसपास पहुंचें। बदलती रोशनी और शांत पानी के बीच आप शानदार तस्वीरें ले सकते हैं। (Pic: Wikipedia)
सितंबर में जयपुर का सालाना पोलो सीजन भी यात्रियों के लिए खास आकर्षण बन सकता है। साल 2026 में राजस्थान पोलो क्लब का सीजन 1 सितंबर से शुरू हुआ है। इस दौरान अलग-अलग टूर्नामेंट और प्रदर्शनी मुकाबले आयोजित किए जाएंगे। जाने से पहले मैच का ताजा शेड्यूल जरूर देख लें। (Pic: AI Image)
जौहरी बाजार, बापू बाजार और त्रिपोलिया बाजार घूमे बिना जयपुर की यात्रा अधूरी है। यहां बंधेज और लहरिया के कपड़े, लाख की चूड़ियां, जयपुरी जूतियां, चांदी के आभूषण और ब्लू पॉटरी खरीदी जा सकती है। सितंबर की हल्की फुहारों के बीच पुराने बाजारों में घूमने का अपना आनंद है। (Pic: AI Image)
हल्की बारिश के बाद गर्म प्याज की कचौरी, मिर्ची वड़ा और मसाला चाय का स्वाद दोगुना हो जाता है। पूरे राजस्थानी भोजन का मन हो तो दाल-बाटी-चूरमा, गट्टे की सब्जी और केर-सांगरी आजमा सकते हैं। जयपुर में भोजन केवल भूख मिटाने का जरिया नहीं, बल्कि शहर को जानने का एक स्वादिष्ट रास्ता है। (Pic: AI Image)