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नित्यानंद के काल्पनिक देश 'कैलासा' ने कैसे लगाया 30 अमेरिकी शहरों को चूना? जानें

  • Written by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Mar 17, 2023, 08:37 PM IST

नित्यानंद के काल्पनिक देश कैलासा के प्रतिनिधि के साथ नेवॉर्क का यह समझौता 12 जनवरी को हुआ था। इस समझौते को सिस्टर सिटी प्रोग्राम नाम दिया गया था, जिसके तहत साइनिंग सेरेमनी भी आयोजित की गई थी।

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नित्यानंद ने 30 अमेरिकी शहरों को लगाया चूना

Photo : PTI

Swami Nithyananda: रेप का आरोपी नित्यानंद और उसका काल्पनिक देश कैलासा एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह कुछ अलग हट कर है। भारत में भगोड़ा घोषित हो चुके नित्यानंद ने इस बार एक या दो नहीं बल्कि अमेरिका के करीब 30 शहरों को चूना लगाया है। एक मामले में नित्यानंद के खिलाफ पहला मामला भी दर्ज किया गया है। यह मामला अमेरिका के न्यू जर्सी के शहर नेवॉर्क में धोखाधड़ी से जुड़ा हुआ है।

दरअसल, नेवॉर्क के अधिकारियों ने नित्यानंद के काल्पनिक देश कैलासा के साथ एक सांस्कृतिक समझौता किया था। अधिकारियों का कहना था इस समझौते के तहत वह उस साझेदारी की तरफ देख रहे थे, जो संस्कृतियों से भरी हुई थी। हालांकि, बाद में अधिकारियों को पता चला कि उन्होंने जिस कैलासा नाम के साथ यह समझौता किया है, उसका कोई अस्तित्व ही नहीं है। यह सबकुछ एक धोखाधड़ी का हिस्सा था।

12 जनवरी को हुआ था समझौता

नित्यानंद के काल्पनिक देश कैलासा के प्रतिनिधि के साथ नेवॉर्क का यह समझौता 12 जनवरी को हुआ था। इस समझौते को सिस्टर सिटी प्रोग्राम नाम दिया गया था, जिसके तहत साइनिंग सेरेमनी भी आयोजित की गई थी। कार्यक्रम का मकसद दोनों शहरों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना था। यह घटना तब हुई जब नेवॉर्क के मेयर रास बराका ने सांस्कृतिक व्यापार समझौते के लिए कैलासा के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया था।

पूरे 30 देशों को लगाया चूना

कैलासा ने सिर्फ नेवॉर्क नहीं, बल्कि अमेरिका के ऐसे 30 शहरों को चूना लगाया है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ज्यादातर शहरों के मेयरों ने इसी तरह का समझौता कैलासा के प्रतिनिधियों के साथ किया था।

टापू खरीदकर नाम रखा कैलासा

दरअसल, नित्यानंद ने दक्षिण अमेरिकी देश इक्वाडोर के पास एक टापू खरीदा था। उसने इस टापू को कैलासा देश घोषित कर दिया। कैलासा की अपनी वेबसाइट भी है। नित्यानंद ने कैलासा के अपने रिजर्व बैंक, करेंसी होने का भी दावा किया है। बीते दिनों कैलासा के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से एक लिंक भी साझा किया गया था, जिसमें दावा किया गया था कि इसके जरिए कैलासा की नागरिकता ली जा सकती है।

भारत में वांछित है नित्यानंद

नित्यानंद भारत में कई मामलों में वांछित अपराधी है। उस पर बच्चों, लड़कियों के दुष्कर्म और अपहरण का अरोप है। साल, 2019 में नित्यानंद देश छोड़कर भाग गया था।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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