रूसी राष्ट्रपति पुतिन (फाइल फोटो- AP)
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने शनिवार को पुष्टि की कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के हालिया निर्देशों के तहत देश में परमाणु परीक्षण दोबारा शुरू करने की संभावनाओं पर काम चल रहा है। दरअसल, 5 नवंबर को हुई रूसी सुरक्षा परिषद की बैठक में पुतिन ने विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, खुफिया एजेंसियों और नागरिक विभागों को आदेश दिया था कि यदि अमेरिका व्यापक परीक्षण प्रतिबंध संधि (CTBT) का पालन नहीं करता, तो रूस को अपने परमाणु हथियार परीक्षणों की तैयारी पर विचार करना चाहिए।
रूसी सरकारी एजेंसियों तास और आरआईए नोवोस्ती ने लावरोव के हवाले से बताया कि राष्ट्रपति के निर्देशों को औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया गया है और उस पर कार्य आरंभ हो चुका है। लावरोव ने कहा, “हम इस निर्देश पर काम कर रहे हैं। परिणामों की जानकारी जनता को दी जाएगी।” उन्होंने यह भी बताया कि वाशिंगटन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं मिला है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल में दिए गए बयान में किस संदर्भ में कहा था कि अमेरिका तीन दशकों के बाद परमाणु परीक्षण फिर से शुरू करने की योजना बना रहा है।
राष्ट्रपति पुतिन ने स्पष्ट किया है कि रूस केवल तभी परमाणु परीक्षण करेगा, जब अमेरिका पहले ऐसा करेगा। यह रुख रूस की रणनीतिक नीति में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है, जो संकेत देता है कि मॉस्को वॉशिंगटन की किसी भी एकतरफा कार्रवाई का जवाब देने के लिए तैयार है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर परमाणु निरस्त्रीकरण और सुरक्षा के मुद्दों पर तनाव बढ़ता जा रहा है। रूस और अमेरिका दोनों ही 1996 में हस्ताक्षरित व्यापक परीक्षण प्रतिबंध संधि (CTBT) के हस्ताक्षरकर्ता हैं, लेकिन अमेरिका ने इसे अब तक अनुमोदित नहीं किया है। रूस की ओर से यह कदम संकेत देता है कि यदि अमेरिका प्रतिबंधों की अनदेखी करता है, तो एक नई परमाणु प्रतिस्पर्धा की शुरुआत हो सकती है- जो शीत युद्ध के बाद से सबसे गंभीर सुरक्षा चुनौती बन सकती है।