विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने पाकिस्तान की गुप्त परमाणु गतिविधियों पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि ये अवैध और गोपनीय परमाणु गतिविधियां पाकिस्तान के दशकों पुराने इतिहास को दर्शाती हैं, जो तस्करी, निर्यात नियंत्रण उल्लंघन, गुप्त साझेदारियों और ए. क्यू. खान नेटवर्क जैसी गतिविधियों पर आधारित रहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की इन हरकतों के कारण परमाणु प्रसार (nuclear proliferation) की समस्या और गहराती गई है।
'पाकिस्तान करते रहा है नियमों का बार-बार उल्लंघन'
जायसवाल ने कहा कि भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान पाकिस्तान के इस रिकॉर्ड की ओर आकर्षित करता रहा है, ताकि दुनिया इस खतरे को समझ सके। उन्होंने कहा, “भारत ने हमेशा वैश्विक समुदाय को आगाह किया है कि पाकिस्तान की परमाणु गतिविधियां पारदर्शी नहीं हैं और यह अंतरराष्ट्रीय नियमों का बार-बार उल्लंघन करता रहा है।”
'दुनिया की सुरक्षा के लिए खतरा'
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह भी कहा कि इसी परिप्रेक्ष्य में भारत ने अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस टिप्पणी को नोट किया है जिसमें उन्होंने पाकिस्तान के परमाणु परीक्षणों के बारे में बात की थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान की अवैध परमाणु गतिविधियां न केवल दक्षिण एशिया बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए खतरा हैं। भारत का यह मानना है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस विषय पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए और परमाणु प्रसार को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
ट्रंप ने क्या कहा था
कुछ दिनों पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह दावा करके सनसनी फैला दी थी कि पाकिस्तान उन देशों में शामिल है जो गुप्त रूप से परमाणु हथियार परीक्षण कर रहे हैं। इस पर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की अटकलें लगने लगीं, कुछ लोगों ने तो यह भी अनुमान लगाया कि इस साल की शुरुआत में अफगानिस्तान-पाकिस्तान क्षेत्र में आए भूकंप इसी वजह से आए थे। ट्रंप ने कहा था- "रूस परीक्षण कर रहा है और चीन परीक्षण कर रहा है, लेकिन वे इसके बारे में बात नहीं करते... हम परीक्षण करेंगे, क्योंकि वे परीक्षण करते हैं, और दूसरे भी परीक्षण करते हैं और निश्चित रूप से उत्तर कोरिया परीक्षण कर रहा है। पाकिस्तान परीक्षण कर रहा है।"
