ईरान-अमेरिका के बीच शांति समझौते को लेकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बडा दावा किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता निर्णायक चरण में पहुंच गई है। अगले 24 घंटे के भीतर समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है। इसके बाद शांति समझौते पर ई-साइन किए जाएंगे और अगले सप्ताह तकनीकी स्तर की वार्ता शुरू होगी। अगर ऐसा होता है तो पिछले कई महीनों से जारी तनाव और संघर्ष के बाद यह क्षेत्रीय कूटनीति की बड़ी सफलता मानी जाएगी।
शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में यह दावा किया। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष पहले से कहीं अधिक शांति समझौते के करीब हैं। समझौते के अंतिम रूप लेने के तुरंत बाद पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से इसके हस्ताक्षर की तैयारी कर रहा है। इसके बाद अगले सप्ताह तकनीकी स्तर की वार्ताएं आयोजित की जाएंगी, जिनमें समझौते के क्रियान्वयन से जुड़े पहलुओं पर चर्चा होगी।
टाइम्स नाउ नवभारत पर इसे भी पढ़ें- हाय रे पाकिस्तान! गधे का मांस बेचकर पैसे कमाएगा पड़ोसी मुल्क; किस देश को करेगा खाल और मांस का निर्यात?
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने वार्ता प्रक्रिया में सहयोग के लिए अमेरिका और ईरान दोनों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय देशों के समर्थन ने भी बातचीत को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। शरीफ ने उम्मीद जताई कि यह ऐतिहासिक समझौता लंबे समय तक शांति और स्थिरता की मजबूत नींव रखेगा।
दावे पर ईरान-अमेरिका ने नहीं दी है प्रतिक्रिया
हालांकि, पाकिस्तान के इस दावे पर अभी तक न तो व्हाइट हाउस और न ही ईरानी सरकार की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि की गई है। इसके बावजूद दोनों देशों के शीर्ष नेताओं और अधिकारियों के हालिया बयानों ने संकेत दिया है कि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है।
एक दिन पहले कही थी यह बात
शरीफ का यह बयान ऐसे समय आया है जब एक दिन पहले उन्होंने कहा था कि अमेरिका और ईरान शांति समझौते के मसौदे पर सहमत हो चुके हैं और अब पाकिस्तान दोनों पक्षों के साथ मिलकर आगे की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने में जुटा है। उन्होंने कहा था कि शोर-शराबे और अटकलों से अलग हटकर यह पुष्टि की जा सकती है कि समझौते का अंतिम मसौदा तैयार हो चुका है।
अब्बास अराघची ने भी दिए समझौते के संकेत
उधर,ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी वार्ता में प्रगति के संकेत दिए हैं। उन्होंने बीते दिन कहा था कि ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ अपने अंतिम चरण में है। हालांकि उन्होंने समझौते की शर्तों या उसके प्रस्तावों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी थी। साथ ही कहा कि अंतिम रूप दिए जाने तक मीडिया को अटकलों से बचना चाहिए।
ट्रंप और जेडी वेंस भी बोले
वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी शुक्रवार को कहा था कि अमेरिका और ईरान संघर्ष को समाप्त करने के उद्देश्य से एक समझौते के करीब हैं। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले दिनों में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हो सकते हैं।
वहीं अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सोशल मीडिया पर कहा कि संभावित समझौते को लेकर कई भ्रामक और अपुष्ट जानकारियां फैल रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान को केवल समझौते पर हस्ताक्षर करने या बैठक में शामिल होने के बदले कोई आर्थिक सहायता नहीं दी जा रही है। आर्थिक लाभ तभी मिलेगा जब वह समझौते की शर्तों का पूरी तरह पालन करेगा।
28 फरवरी को शुरू हुई जंग से दुनिया तबाह
गौरतलब है कि 28 फरवरी को शुरू हुए इस संघर्ष ने वैश्विक बाजारों, ऊर्जा आपूर्ति, क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर व्यापक प्रभाव डाला है। अप्रैल में लागू हुए नाजुक युद्धविराम के बाद पाकिस्तान की मेजबानी में दोनों पक्षों के बीच पहली औपचारिक वार्ता हुई थी,लेकिन तब कोई अंतिम समझौता नहीं हो सका था।
यदि अगले 24 घंटे में समझौते पर सहमति बन जाती है, तो यह न केवल अमेरिका और ईरान के संबंधों में नया अध्याय खोल सकता है, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र में स्थिरता और शांति की दिशा में भी एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।
