बांग्लादेश ने भारत के साथ अपने कूटनीतिक संबंधों को नए सिरे से शुरू करने और दोनों देशों के बीच पारस्परिक हितों पर आधारित नया द्विपक्षीय ढांचा तैयार करने की बात कही है। बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने ढाका में पत्रकारों से बातचीत के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के कार्यकाल के दौरान भारत के साथ रहे संबंधों को असहज करार दिया। बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने स्पष्ट किया कि ढाका किसी बहुपक्षीय मंच के बजाय भारत के साथ सीधी द्विपक्षीय चर्चा के जरिए संबंधों को आगे बढ़ाना चाहता है।
भारत के प्रति अत्यधिक आकर्षण' खत्म करने का बयान
विदेश राज्य मंत्री कबीर ने टिप्पणी करते हुए कहा, ब्रेकफास्ट भारत में, लंच भारत में, डिनर भारत में—तो फिर आप अपना खाना कब खाएंगे? हमें भारत के प्रति अत्यधिक आकर्षण से बाहर निकलना होगा। भारत केवल एक अन्य देश है और बांग्लादेश उसके साथ एक अच्छा कार्य संबंध चाहता है।
बांग्लादेश संसद में सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के चीफ व्हिप नुरुल इस्लाम मोनी ने घोषणा की है कि ढाका में भारत के साथ हस्ताक्षरित 101 समझौतों (MoUs) की समीक्षा की जा रही है। इसमें भारत को चटगाँव और मोंगला बंदरगाहों के इस्तेमाल से जुड़े रणनीतिक समझौते भी शामिल हैं।
BRICS समिट से दूरी
यह बयान बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान द्वारा भारत में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने से इनकार करने के ठीक बाद आया है। ढाका ने इसके पीछे उचित निमंत्रण न मिलने की बात कही थी।
भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव क्यों बढ़ा? भारत और बांग्लादेश के बीच पिछले कुछ महीनों से गहराए कूटनीतिक खिंचाव के पीछे मुख्य कारण।
अगस्त 2024 का सत्ता परिवर्तन और हसीना को शरण
अगस्त 2024 में छात्रों के भारी विरोध-प्रदर्शनों और जन-आंदोलन के बाद शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देकर भारत भागना पड़ा। नई दिल्ली द्वारा शेख हसीना को शरण दिए जाने के फैसले से ढाका की नई सरकार और राजनीतिक दलों में तीखी नाराजगी देखने को मिली है।
शेख हसीना की राजनीतिक गतिविधियां और प्रत्यर्पण विवाद
बांग्लादेश की BNP सरकार लगातार मांग कर रही है कि भारत शेख हसीना के प्रत्यर्पण (Extradition) पर कार्रवाई करे। हाल ही में भारत से शेख हसीना द्वारा मीडिया को दिए गए बयानों पर ढाका ने सख्त आपत्ति जताई थी और इसे अपनी संप्रभुता पर चोट बताया था।
हसीना-दौर के समझौतों और नीतियों से दूरी
अवामी लीग के 15 वर्षों के शासनकाल में भारत-बांग्लादेश संबंध अपने उच्चतम स्तर पर थे। हालाँकि, बांग्लादेश की वर्तमान BNP सरकार का आरोप है कि पिछला ढांचा एकतरफा था। इसी वजह से ढाका अब भारत के साथ पूर्व में हुए 101 प्रमुख समझौतों और बंदरगाहों के इस्तेमाल से जुड़े करारों की समीक्षा कर रहा है।
विदेश नीति का नया पुनर्संतुलन
ढाका की नई सरकार भारत पर अपनी निर्भरता कम करने और चीन तथा अन्य क्षेत्रीय शक्तियों के साथ आर्थिक व सामरिक संबंध बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। विदेश राज्य मंत्री के ताजा बयानों से यह साफ है कि बांग्लादेश अब भारत के साथ संबंधों को केवल एक सामान्य पड़ोसी के स्तर पर ही सीमित रखना चाहता है।
