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आइसलैंड में पहली बार नजर आया मच्छर, क्या ग्लोबल वार्मिंग का असर, क्या कह रहे एक्सपर्ट?

अध्ययनों से पता चला है कि निरंतर वैश्विक तापमान वृद्धि के कारण, उच्च आर्द्रता और बारिश जैसी स्थितियां मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण बना सकती हैं, जिससे मच्छर जनित संक्रामक रोग उन क्षेत्रों में भी फैल सकते हैं, जहां पहले बहुत कम मामले दर्ज किए गए थे।

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आइसलैंड में पहली बार दिखा मच्छर (File photo: PTI)

Mosquitoes In Iceland Confirmed: आइसलैंड में पहली बार एक मच्छर मिलने की पुष्टि हुई है। आइसलैंड के एक नागरिक ने पिछले हफ्ते अपने घर पर मच्छर देखे और पुष्टि के लिए तस्वीरें भेजीं। एक वैज्ञानिक ने पुष्टि की है कि यह देश में मच्छर का पहला मामला है, हालांकि यह पता लगाने के लिए आगे निगरानी करनी होगी क्या यह प्रजाति यहां स्थापित हो गई है। आइसलैंड के राष्ट्रीय विज्ञान संस्थान के कीट विज्ञानी मैथियास अल्फ्रेडसन ने पीटीआई को भेजे एक ईमेल में कहा कि मच्छरों की उपस्थिति हाल ही में आए मच्छरों का संकेत हो सकती है, जो संभवतः जहाजों या शिपिंग कंटेनरों के माध्यम से यहां लाए गए होंगे।

कुलीसेटा एनुअलाटा नामक यह प्रजाति ठंडे मौसम की आदीamit m

हालांकि 'कुलीसेटा एनुअलाटा' नामक यह प्रजाति ठंडे मौसम की आदी हो सकती है, लेकिन अल्फ्रेडसन ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण गर्म परिस्थितियां मच्छरों के लिए यहां जीवित रहना और खुद को स्थापित करना आसान बना सकती हैं। उन्होंने कहा कि कुलीसेटा एनुअलाटा, या सीएस. एनुलाटा, प्राकृतिक रूप से यूरोप के उत्तरी क्षेत्रों में पाया जाता है और शून्य से नीचे के तापमान को सहन कर सकता है।

अध्ययनों से पता चला है कि निरंतर वैश्विक तापमान वृद्धि के कारण, उच्च आर्द्रता और बारिश जैसी स्थितियां मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण बना सकती हैं, जिससे मच्छर जनित संक्रामक रोग उन क्षेत्रों में भी फैल सकते हैं, जहां पहले बहुत कम मामले दर्ज किए गए थे। आइसलैंड धरती पर मच्छरों से अनजान कुछ जगहों में से एक है, और अंटार्कटिका भी एक ऐसा ही स्थान है।

वाइन रोपिंग विधि से चला मच्छर का पता

अल्फ्रेडसन ने बताया, 2019 से ब्योर्न हजल्टसन (कीट प्रेमी) वाइन रोपिंग नामक एक विधि का प्रयोग कर रहे हैं, जिसका इस्तेमाल पतंगों को आकर्षित करने के लिए किया जाता है। इस विधि में एक लंबे कपड़े को रेड वाइन और चीनी के मीठे, किण्वित मिश्रण में भिगोया जाता है, जिसकी गंध पतंगों को आकर्षित करती है। 16 अक्टूबर की शाम को ब्योर्न को अपनी वाइन रोप्स पर कुछ अप्रत्याशित मिला, एक कीट जिसे उन्होंने शुरू में मच्छर समझा। उन्होंने मुझे एक तस्वीर भेजी, और करीब से जांच करने पर यह पुष्टि हुई कि यह एक मादा मच्छर थी।

अल्फ्रेडसन अगले दिन हजल्टसन के घर गए, जहां उन्हें एक नर नमूना मिला। अगले दिन, एक मादा भी मिली। शुरू से ही यह स्पष्ट था कि ये कीट कुलिसेटा वंश के थे। कीटविज्ञानी ने कहा, पहचान कुंजियों की जांच के बाद प्रजाति का नाम कुलिसेटा एनुअलाटा निश्चित हो गया। पहचान कुंजियां किसी जीव की प्रजाति निर्धारित करने के लिए उपयोग किए जाने वाले वैज्ञानिक उपकरण हैं। इनमें जीव के प्रत्यक्ष लक्षणों का वर्णन करने वाले युग्मित, विपरीत कथनों की एक श्रृंखला होती है, जिनका विश्लेषण करके किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाता है।

यह मच्छर प्रजाति ठंडे मौसम के लिए अच्छी तरह से अनुकूलित

अल्फ्रेडसन ने बताया, यह मच्छर प्रजाति ठंडे मौसम के लिए अच्छी तरह से अनुकूलित लगती है, मुख्यतः वयस्क अवस्था में आश्रय वाले स्थानों में शीतकाल बिताने की क्षमता के कारण ऐसा संभव है। उन्होंने कहा, यह उन्हें ठंडे तापमान पर लंबी और कठोर सर्दियों का सामना करने में सक्षम बनाता है। यह प्रजाति विविध प्रजनन आवासों का भी इस्तेमाल करती है, जिससे आइसलैंड में बने रहने की इसकी क्षमता और बढ़ जाती है। कीटविज्ञानी ने कहा, इसकी उपस्थिति देश में हाल ही में संभवतः जहाजों या कंटेनरों के माध्यम से प्रवेश का नतीजा हो सकती है।

उन्होंने आगे कहा कि हालांकि सीएस. एनुलाटा (Cs. annulata) एक शीत-सहिष्णु प्रजाति है, फिर भी गर्म होती जलवायु इस प्रजाति के लिए आइसलैंड में जीवित रहना और स्थापित होना आसान बना सकती है। अल्फ्रेडसन ने कहा, हल्की सर्दियाँ और लंबी पाला-रहित अवधियां इस संभावना को बढ़ा सकती हैं कि यहां आने वाले कीट अपना जीवन चक्र सफलतापूर्वक पूरा कर सकें। हालांकि यह विशेष खोज जलवायु परिवर्तन का प्रत्यक्ष परिणाम नहीं है, फिर भी धीरे-धीरे गर्म होती जलवायु आइसलैंड को भविष्य में कीट प्रजातियों की एक विस्तृत श्रृंखला के लिए अधिक अनुकूल बना सकती है।

अगले कदमों में हेजाल्टसन के घर के आसपास के क्षेत्र की निगरानी करना शामिल है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या प्रजाति ने प्रजनन के लिए आबादी बना ली है, और अगले वसंत या गर्मियों में अतिरिक्त मच्छरों की जांच की जा सके।

Amit Mandal
अमित कुमार मंडल author

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर... और देखें

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