US Iran Deal: अमेरिका और ईरान के बीच हुए बहुप्रतीक्षित समझौते के बाद दुनियाभर ने फिलहाल राहत की सांस ली है। हालांकि यह तत्काल प्रभाव से लागू नहीं हुआ है। इसी बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस समझौते को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने इसकी तकनीकी शर्तों को साफ किया है। वेंस ने कहा कि दोनों देशों के बीच समझौते पर डिजिटल रूप से हस्ताक्षर हो चुके हैं,हालांकि इसका यह मतलब नहीं है कि ईरान को तुरंत आर्थिक राहत या प्रतिबंधों से छूट मिल जाएगी। वेंस ने कहा कि यह पूरी तरह 'परफॉर्मेंस-बेस्ड' यानी प्रदर्शन आधारित समझौता है> उन्होंने कहा कि समझौते के तहत ईरान को पहले अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करना होगा,इसके बाद ही उसे किसी प्रकार की राहत मिलेगी।
अमेरिकी टीवी चैनल एबीसी न्यूज के कार्यक्रम गुड मॉर्निंग अमेरिका में बातचीत के दौरान वेंस ने ये दावे किए। उन्होंने कहा कि समझौते पर रविवार को डिजिटल हस्ताक्षर किए गए थे,लेकिन इसके बाद भी ईरान को कोई धनराशि जारी नहीं की गई है। उन्होंने कहा,"समझौता साइन हो चुका है, लेकिन कोई पैसा जारी नहीं हुआ है और फिलहाल ऐसा होने वाला भी नहीं है।"
पहले परमाणु कार्यक्रम को लेकर अपनी प्रतिबद्धिता पूरी करे, तभी मिलेगा रुपया
वेंस ने जोर देकर कहा कि अमेरिका ईरान को सीधे कोई आर्थिक सहायता नहीं देगा। उन्होंने कहा कि यदि ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम (एनरिच्ड यूरेनियम) के भंडार को कम करने या समाप्त करने की दिशा में ठोस कदम उठाता है, तो अमेरिका और उसके सहयोगी देश प्रतिबंधों में राहत देने पर विचार करेंगे। इसी तरह यदि ईरान अंतरराष्ट्रीय परमाणु निरीक्षकों को व्यापक सत्यापन की अनुमति देता है और पारदर्शिता सुनिश्चित करता है, तो आर्थिक प्रतिबंधों में ढील का रास्ता खुल सकता है।
वेंस ने कहा कि यह समझौता केवल परमाणु कार्यक्रम तक सीमित नहीं है,बल्कि इसका उद्देश्य पश्चिम एशिया में स्थिरता बहाल करना और लंबे समय से जारी तनाव को कम करना भी है। उनके अनुसार, यदि ईरान समझौते की शर्तों का पालन करता है तो उसे वैश्विक अर्थव्यवस्था में फिर से सम्मानजनक स्थान मिल सकता है। उन्होंने कहा कि यह समझौता ईरान के लिए दुनिया की अर्थव्यवस्था में वापस लौटने का अवसर है। अगर वह सही कदम उठाता है,तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय उसका स्वागत करेगा।
समझौते को लेकर इजराइल के रुख पर भी बोले वेंस
इस दौरान, वेंस ने यह भी स्वीकार किया कि समझौते के क्रियान्वयन में कई चुनौतियां सामने आ सकती हैं। खास तौर पर इजराइल के रुख को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया की परिस्थितियां हमेशा जटिल रही हैं। युद्धविराम और शांति समझौतों को लागू करना आसान नहीं होता,क्योंकि क्षेत्र में कई हितधारक और सुरक्षा संबंधी चिंताएं मौजूद हैं।
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ट्रंप ने कही थी ये बात
वेंस का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता पूरी तरह तैयार हो चुका है और इस पर शुक्रवार को औपचारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे। ट्रंप ने दावा किया था कि समझौते के बाद क्षेत्र में तनाव कम होगा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अहम समुद्री मार्गों पर सामान्य स्थिति बहाल हो जाएगी।
