पेंटागन के पूर्व अधिकारी हैं मिशेल रूबिन।
Michael Rubin : पहलगाम में आतंकवादी हमला होने के बाद दुनिया भर से भारत को समर्थन मिल रहा है। सभी देशों ने कड़े शब्दों में इस जघन्य नरसंहार की निंदा करते हुए भारत के साथ एकजुटता जाहिर की है। इस बीच, अमेरिका की सुरक्षा से जुड़े और पेंटागन के पूर्व अधिकारी मिशेन रूबिन ने बड़ा बयान दिया है। रूबिन ने कहा है कि इस हमले के बाद भारत का कर्तव्य बनता है कि वह पाकिस्तान और उसकी खुफिया एजेंसी इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) का हाल वैसा ही करे जैसा कि 7 अक्टूबर के हमले के बाद इजरायल ने हमास का किया। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि भारत आईएसआई के पूरे नेतृत्व को समाप्त कर दे।
रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिका एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट के सीनियर फेलो रूबिन ने कहा कि मुनीर और बिन लादेन के बीच फर्क बस इतना है कि मुनीर महल में रहता है और लादेन गुफा में रहता था। समाचार एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में उन्होंने कहा, 'पहलगाम हमले पर अमेरिका की प्रतिक्रिया यही बनती है कि वह पाकिस्तान को एक आतंकवादी देश घोषित करने की औपचारिक पहल और आसिम मुनीर को आतंकवादी घोषित करे।'
पूर्व अधिकारी ने पहलगाम हमले में पाकिस्तान की भूमिका बताने के लिए 'लिपस्टिक ऑन ए पिग' कहावत का इस्तेमाल किया। इस कहावत का मतलब वास्तविक स्थिति छिपाने के लिए किस वस्तु पर कृत्रिम रंग का लेपन करना होता है। उन्होंने कहा कि इस हमले को पाकिस्तान स्थानीय आतंकवादियों की करतूत बताकर अपना पल्ला झाड़ सकता है। जहां तक हमले के समय की बात है तो बिल क्लिंटन जब भारत के दौरे पर आए थे तो भी आतंकवादी हमला हुआ था। इसी तरह अब जब उप राष्ट्रपति जेडी वेंस भारत के दौरे पर आए हैं तो कश्मीर पर दुनिया का ध्यान खींचने के लिए पाकिस्तान ने यह हमला कराया है।
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बता दें कि पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद पाकिस्तान को कड़ा संदेश देते हुए भारत ने बुधवार को उसके साथ राजनयिक संबंधों में व्यापक कटौती, 1960 की सिंधु जल संधि स्थगित करने और अटारी चौकी को बंद किए जाने समेत कई फैसले किए। पहलगाम में नृशंस हमले में 26 लोगों की मौत के एक दिन बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा संबंधी कैबिनेट समिति (सीसीएस) की बैठक हुई, जिसमें इस कायरतापूर्ण हमले के प्रति भारत के जवाबी कदमों को अंतिम रूप दिया गया तथा सुरक्षा बलों को ‘उच्च सतर्कता’ बनाए रखने का निर्देश दिया गया। सीसीएस की बैठक के बाद देर शाम विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने संवाददाताओं को फैसलों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि एक मई तक राजनयिक संबंधों में और कटौती के माध्यम से पाकिस्तानी और भारतीय उच्चायोगों में तैनात लोगों की कुल संख्या घटाकर 55 से 30 कर दी जाएगी।