Strait of Hormuz Shipping Rules: पश्चिम एशिया में तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान का नया रुख सामने आया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने कहा है कि वह इस अहम समुद्री रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर पारंपरिक शुल्क नहीं लगाएगा। हालांकि, इसके साथ ही तेहरान एक नया सुरक्षा ढांचा तैयार करने की योजना बना रहा है, जिससे इस क्षेत्र में आवाजाही को और सख्ती से नियंत्रित किया जा सके। ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रवक्ता इब्राहिम रेजाई ने बताया कि सरकार एक नया कानून (iran shipping control law) लाने पर विचार कर रही है। इस कानून के तहत सीधे पारगमन शुल्क की जगह “सुरक्षा से जुड़ा शुल्क” लिया जा सकता है।
उनका कहना है कि जलडमरूमध्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया जा रहा है। रेजाई ने यह भी साफ किया कि इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों को ईरानी अधिकारियों के साथ समन्वय करना होगा। यानी कोई भी जहाज बिना अनुमति के इस क्षेत्र से नहीं गुजर सकेगा। खासतौर पर “शत्रुतापूर्ण” माने जाने वाले देशों, जैसे अमेरिका और इजराइल के सैन्य जहाजों को पूरी तरह रोकने की बात कही गई है। वहीं, मित्र देशों के जहाजों को पहले से अनुमति लेकर गुजरने की छूट मिल सकती है।
रास्ता खुला रहेगा या बंद, जमीनी हालात से तय होगा-गालिबाफ
इस बीच, ईरान के एक अन्य नेता महमूद नबावियन ने कहा कि कुछ वाणिज्यिक जहाजों को शुल्क देने के बाद गुजरने की अनुमति दी जा सकती है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इस मार्ग को पूरी तरह खोलने का फैसला क्षेत्रीय हालात, खासकर लेबनान में स्थिति पर निर्भर कर सकता है। ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघर गालिबाफ ने भी इस मुद्दे पर बयान दिया। उन्होंने कहा कि जलडमरूमध्य से आवाजाही “निर्धारित मार्ग” और “ईरानी अनुमति” के आधार पर ही होगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यह तय करना कि यह रास्ता खुला रहेगा या बंद, जमीनी हालात से तय होगा, न कि सोशल मीडिया पर दिए गए बयानों से।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान रखना चाहता है पूरा नियंत्रण
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य अब खुला है और व्यापार के लिए तैयार है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि जब तक ईरान के साथ कोई अंतिम समझौता पूरी तरह नहीं हो जाता, तब तक अमेरिका अपनी सख्त नीति जारी रखेगा। कुल मिलाकर अगर कहा जाए तो ईरान ने साफ कर दिया है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य पर पूरा नियंत्रण रखना चाहता है। मौजूदा हालात में यह क्षेत्र वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, इसलिए यहां के हर फैसले का असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।
