दुनिया

ईरान शांति समझौते में अमेरिका से क्या मांग रहा? ट्रंप के साथ-साथ सऊदी और UAE जैसे देशों के भी छूट जाएंगे पसीने

Iran terms for ceasefire: तेहरान ने ट्रंप प्रशासन से खाड़ी क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य अड्डों को बंद करने और ईरानी क्षेत्र पर हुए हमलों के लिए मुआवजा देने की मांग की है। इसके अलावा, ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए फीस वसूलना चाहता है।

Image

ईरान शांति समझौते में अमेरिका से क्या मांग रहा?

Iran Demands to Deal with US: क्या मध्य पूर्व में चल रही उथल-पुथल का कोई अंत नजर आ रहा है? ईरान ने अमेरिका के साथ संभावित संघर्ष-विराम के लिए एक ऊंची शर्त रखी है। 28 फरवरी से ईरान पर हमले के बाद तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिका-इजराइल गठबंधन और ईरान के बीच चल रही सैन्य झड़पों ने एक ऐसी स्थिति पैदा कर दी है जो लगातार बदल रही है। इस बीच, तेहरान की मांगों के अलावा, अमेरिका ने एक 15-सूत्रीय प्रस्ताव पेश किया है, जिसका उद्देश्य इस चल रहे संघर्ष को समाप्त करना है।

जो अभियान तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ एक लक्षित मिशन के तौर पर शुरू हुआ था, वह अब इस पूरे क्षेत्र में रोजाना होने वाली बड़े पैमाने की बमबारी में तब्दील हो चुका है, जिसमें दुबई और अबू धाबी जैसे शहर भी शामिल हैं।

वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, अपने सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले नेता को खोने के बावजूद, तेहरान शासन ने ईरानी सरकार और IRGC के भीतर अपनी सत्ता को और मजबूत कर लिया है। इस रिपोर्ट में अब सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के नेतृत्व वाले शासन की मांगों का भी विस्तार से जिक्र किया गया है।

ईरान की मांगें

रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान ने ट्रंप प्रशासन से खाड़ी क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य अड्डों को बंद करने और ईरानी क्षेत्र पर हुए हमलों के लिए मुआवजा देने की मांग की है। इसके अलावा, ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए फीस वसूलना चाहता है, ठीक वैसे ही जैसे मिस्र स्वेज नहर से गुजरने के लिए चार्ज करता है।

इस मांग में US के लगाए गए सभी बैन हटाना भी शामिल था। सरकार यह भी गारंटी चाहती है कि युद्ध फिर से शुरू न हो और लेबनान में हिज्बुल्लाह सहित ईरान से जुड़े मिलिशिया पर इजराइली हमले बंद हों।

ईरान को बिना किसी बातचीत के अपने मिसाइल प्रोग्राम को जारी रखने की अनुमति देना, बातचीत में एक बड़ी रुकावट बना हुआ है। हालांकि, ट्रंप प्रशासन तेहरान की मांगों पर विचार करने को तैयार नहीं लगता। एक अमेरिकी अधिकारी ने इन मांगों को बेतुका और अवास्तविक बताया। अरब और अमेरिकी अधिकारियों ने चेतावनी दी कि इस तरह का रवैया तेहरान के साथ किसी समझौते पर पहुंचना, ट्रंप द्वारा युद्ध शुरू करने से पहले की स्थिति की तुलना में भी ज्यादा मुश्किल बना सकता है। बता दें कि ईरान ने सऊदी और UAE जैसे देशों पर भी हमले किए हुए हैं, क्योंकि वहां अमेरिका के बेस हैं। ऐसे में इन देशों को भी हमेशा डर लगा रहेगा कि अगर अमेरिका अपने बेस वहां से हटाता है तो उनकी सुरक्षा कम हो जाएगी।

Nitin Arora
नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

और पढ़ें
End of Article