अध्यात्म

भगवान को राखी बांधनी चाहिए या नहीं, जानें किस देवता को बांधें रक्षा सूत्र और क्या है सही तरीका

Bhagwan ko Rakhi Bandhe ya nahi: क्या रक्षाबंधन पर भगवान को राखी बांधनी चाहिए? जानें किस देवी-देवता को रक्षा सूत्र अर्पित कर सकते हैं, इसका धार्मिक महत्व और राखी बांधने का सही तरीका।

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भगवान को राखी बांधनी चाहिए या नहीं, जानें किस देवता को बांधें रक्षा सूत्र और क्या है सही तरीका

Bhagwan ko Rakhi Bandhe ya nahi: रक्षाबंधन आते ही घर में पूजा की तैयारी शुरू हो जाती है। बहनें भाई के लिए सुंदर राखी चुनती हैं, पूजा की थाली सजाती हैं और मिठाई रखती हैं। इसी बीच कई लोगों के मन में सवाल आता है कि क्या रक्षाबंधन पर भगवान को भी राखी बांधनी चाहिए? क्या ऐसा करना धार्मिक रूप से सही है या राखी केवल भाई के लिए होती है?

इसका जवाब इस तरह है कि अगर श्रद्धा हो तो भगवान को राखी बांधी जा सकती है। कई परिवारों और मंदिरों में यह परंपरा वर्षों से निभाई जा रही है। हालांकि इसे सभी के लिए जरूरी धार्मिक नियम नहीं माना गया है। यह भक्त की आस्था, पारिवारिक परंपरा और भगवान को लेकर उनके दृष्टिकोण पर निर्भर करता है।

भगवान को राखी क्यों बांधी जाती है

राखी केवल भाई की कलाई पर बांधा जाने वाला सजावटी धागा नहीं है। इसे रक्षा सूत्र माना जाता है। इसके साथ सुरक्षा, विश्वास और हर परिस्थिति में साथ निभाने की भावना जुड़ी होती है।

भक्त के जीवन में भगवान सबसे बड़े रक्षक माने जाते हैं। जब कोई व्यक्ति भगवान को राखी बांधता है तो उसका भाव यह नहीं होता कि वह ईश्वर की रक्षा करेगा। वह इस छोटे से रक्षा सूत्र के माध्यम से भगवान के प्रति अपना प्रेम और भरोसा प्रकट करता है। साथ ही प्रार्थना करता है कि ईश्वर उसके परिवार, भाई और घर की रक्षा करें।

कई भक्त राखी बांधते समय भगवान से यह संकल्प भी लेते हैं कि वे सत्य, दया और धर्म के मार्ग पर चलने की कोशिश करेंगे।

क्या शास्त्रों में भगवान को राखी बांधना जरूरी बताया गया है

भगवान को राखी बांधना रक्षाबंधन की अनिवार्य पूजा का हिस्सा नहीं है। इसका अर्थ यह है कि यदि आपने भगवान को राखी नहीं बांधी तो आपकी पूजा अधूरी नहीं होगी।

फिर भी अलग-अलग क्षेत्रों, मंदिरों और परिवारों में 'देव राखी' की परंपरा दिखाई देती है। कई मंदिरों में श्रद्धालु भगवान गणेश, श्रीकृष्ण और अन्य देवी-देवताओं को राखी अर्पित करते हैं।

रक्षाबंधन पर किस भगवान को राखी बांध सकते हैं

आप अपने इष्ट देव या घर के पूजनीय भगवान को राखी अर्पित कर सकते हैं।

देवी-देवताराखी बांधने के पीछे प्रचलित भाव
भगवान गणेशशुभ शुरुआत और परिवार की सुख-शांति
श्रीकृष्ण या लड्डू गोपालप्रेम, अपनापन और संकट से रक्षा
भगवान शिवपरिवार के कल्याण और भय से मुक्ति की प्रार्थना
हनुमान जीसाहस, शक्ति और सुरक्षा की कामना
श्रीराममर्यादा, धर्म और परिवार में प्रेम बनाए रखने का संकल्प
देवी मांशक्ति, ममता और संरक्षण के प्रति आभार

यदि आपके घर में किसी एक देवता की नियमित पूजा होती है तो सबसे पहले उन्हीं को राखी अर्पित करना सहज माना जा सकता है। अलग-अलग मूर्तियों के लिए कई राखियां खरीदना जरूरी नहीं है। एक मौली या छोटा रक्षा सूत्र भी पर्याप्त है।

भगवान को राखी बांधने का सही तरीका

रक्षाबंधन के दिन स्नान करके पूजा स्थान साफ करें। भगवान के सामने दीपक जलाएं और पूजा की थाली में रोली, अक्षत, फूल, मिठाई और राखी रखें।

इसके बाद सामान्य रूप से यह क्रम अपनाया जा सकता है:

  1. सबसे पहले भगवान का ध्यान करें।
  2. रोली या चंदन से तिलक लगाएं।
  3. अक्षत और फूल अर्पित करें।
  4. राखी या मौली भगवान की कलाई पर हल्के से बांधें।
  5. यदि मूर्ति पर राखी बांधना संभव न हो तो उसे भगवान के पास या चरणों के समीप अर्पित कर दें।
  6. मिठाई या घर में बना प्रसाद चढ़ाएं।
  7. अपने भाई और परिवार की सुरक्षा के लिए प्रार्थना करें।
  8. इसके बाद भाई को तिलक लगाकर राखी बांधें।

राखी बांधते समय मूर्ति के हाथ पर अधिक दबाव न डालें। बहुत भारी, नुकीली या कसकर बंधने वाली राखी का इस्तेमाल भी न करें। मंदिर में भगवान को राखी चढ़ानी हो तो वहां के पुजारी से नियम पूछ लेना बेहतर है।

क्या भगवान को बांधी राखी भाई को बांध सकते हैं

भगवान को अर्पित की गई राखी को प्रसाद की तरह भाई को बांधने की परंपरा कुछ परिवारों में होती है। वहीं कुछ घरों में भगवान और भाई के लिए अलग-अलग राखी रखी जाती है। दोनों ही तरीके आस्था से जुड़े हैं।

यदि भगवान को राखी बांधने के बाद वही रक्षा सूत्र भाई को देना हो तो उसे पहले भगवान के चरणों में अर्पित किया जा सकता है। इसके बाद भाई की कलाई पर बांधते हुए उसके स्वास्थ्य, लंबी आयु और सुख की कामना करें।

भाई न हो तो क्या भगवान को राखी बांध सकते हैं

यदि किसी महिला का भाई नहीं है, भाई दूर रहता है या किसी कारण से रक्षाबंधन पर साथ नहीं है, तब भी वह भगवान को राखी बांध सकती है। भगवान को भाई, मित्र, पिता या रक्षक मानकर उनसे अपना भावनात्मक रिश्ता जोड़ना भक्ति का निजी रूप है।

Medha Chawla
मेधा चावलाauthor

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।

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